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Home बिहार लखीसराय मोहर्रम की छठी पर निकला केला कट्टी जुलूस, पारंपरिक करतबों ने बांधा समां

मोहर्रम की छठी पर निकला केला कट्टी जुलूस, पारंपरिक करतबों ने बांधा समां

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मोहर्रम की छठी पर निकला केला कट्टी जुलूस, पारंपरिक करतबों ने बांधा समां
जुलूस में पारंपरिक करतबों को दिखाते लोग

सूर्यगढ़ा(लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Muharram: तलवार, भाला और लाठी के पारंपरिक करतबों के बीच सूर्यगढ़ा में मोहर्रम की छठी का जुलूस श्रद्धा, उत्साह और अनुशासन का अद्भुत संगम बन गया. पुरानी बाजार इमामबाड़ा से निकले केला कट्टी जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और पारंपरिक रस्मों का निर्वहन किया गया.

शाम साढ़े सात बजे शुरू हुआ जुलूस

जानकारी के अनुसार जुलूस सोमवार शाम करीब 7:30 बजे पुरानी बाजार इमामबाड़ा से निकला. अकीदतमंदों और स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी के साथ जुलूस शहीद स्मृति चौक होते हुए जकरपुरा गाछी पहुंचा. वहां विधि-विधान के साथ केला कट्टी की पारंपरिक रस्म पूरी की गई. इसके बाद जुलूस पुनः उसी मार्ग से इमामबाड़ा लौट आया.

पारंपरिक हथियारों और करतबों ने खींचा ध्यान

जुलूस में शामिल युवाओं ने तलवार, भाला, लाठी, डंडा और फरसे के साथ विभिन्न पारंपरिक खेलों एवं हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया. बच्चों और युवाओं की प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. ढोल-ताशे और बाजे-गाजे की धुनों के बीच पूरा क्षेत्र उत्सवमय माहौल में डूबा रहा.

क्या है केला कट्टी की परंपरा

मोहर्रम की छठी पर केला कट्टी की परंपरा के तहत जुलूस के रूप में जाकर केले के पेड़ के तने को काटा जाता है. इसके बाद उसे सम्मानपूर्वक इमामबाड़ा तक लाया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और क्षेत्र के लोग इसे पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाते हैं.

आज निकलेगा दुलदुल का जुलूस

मोहर्रम की सातवीं तारीख पर सूर्यगढ़ा नगर परिषद क्षेत्र के हल्दी गांव में हजरत इमाम हुसैन के पवित्र घोड़े दुलदुल (ज़ुलजनाह) का जुलूस निकाला जाएगा. इस अवसर पर मस्जिद के समीप भव्य मेले का आयोजन भी होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह जुलूस कर्बला की जंग की याद में निकाला जाता है.

पुरानी बाजार इमामबाड़ा में झुलाया जाएगा पैकर

मोहर्रम की सातवीं तिथि पर पुरानी बाजार सूर्यगढ़ा इमामबाड़ा में पैकर झुलाने की परंपरा भी निभाई जाएगी. धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे. ढोल-बाजों के साथ पूरा क्षेत्र धार्मिक रंग में रंगा रहेगा.

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