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Home बिहार लखीसराय नहीं हो रही है बारिश कैसे गिरेगा धान का बिचड़ा, किसानों की बढ़ रही है चिंता

नहीं हो रही है बारिश कैसे गिरेगा धान का बिचड़ा, किसानों की बढ़ रही है चिंता

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नहीं हो रही है बारिश कैसे गिरेगा धान का बिचड़ा, किसानों की बढ़ रही है चिंता

जून के अंतिम माह बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं होने से किसान चिंतित लंबी अवधि प्रभेद के धान के बिचड़ा गिराने का समय हो रहा समाप्त प्रतिनिधि, लखीसराय आसमान में बादल घूम-घूमकर हल्की बारिश तो हो रही है लेकिन किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंच रहा है आसमान में गहरे बादल छाये जाने के बाद किसानों को अब होगी बारिश की आस लगी हुई रहती है लेकिन बादल बिना बारिश के ही हवा की झोंके के साथ गायब भी हो जाते हैं. जिले के किसानों को धान का बिचड़ा गिराने की चिंता सता रही है. जून माह समाप्ति की ओर है लेकिन बारिश नहीं होने के कारण किसानों का चिंता बढ़ गयी है. किसान जून माह में धान का बिचड़ा गिरा देते हैं. किसान बाल्मीकि यादव, प्रभांस कुमार, कृष्ण यादव, अर्जुन सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण ही किसानों के द्वारा धान का बिचड़ा नहीं गिराया जा रहा है, किसान धान का बिचड़ा बोरिंग के पानी से पटवन कर धान का बिचड़ा गिरा रहे है लेकिन बारिश भी बेहद जरूरी है. अल्प अवधि प्रवेध के धान का बिचड़ा अब गिराने का है समय समय से बारिश नहीं होने के कारण अब अल्प अवधि प्रवेध के धान का बिचड़ा गिराना ही किसानों को मजबूरी बन गयी है. अल्प अवधि प्रवेध के धान का पौधा 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाता हैं. वैज्ञानिक सुधीर चंद्र ने बताया कि जून माह के अंतिम समय तक अल्प अवधि प्रवेध के धान के बिचड़ा गिराने का समय लगभग समाप्त हो रखे जा रहा है, देर से गिरने वाली बिचड़ा देर से तैयार होगा, जिससे की देर से ही रोपनी की जायेगी. देर से रोपनी होने के बाद धान का पैदावार कब हो जायेगा, जिससे कि किसान को घटा लग सकता है. —————————————————————————— धान का बिचड़ा गिराने के लिए किसान कर रहे बारिश का इंतजार चिलचिलाती धूप में खेतों का सूख गया है नमी मानसूनी बारिश हो तभी धान का बिचड़ा गिराने में मिल सकेगा मदद फोटो संख्या 09- सूख कर मरूभूमि बना गोपालपुर मौजे के धान का खेत मेदनीचौकी. प्रखंड के टाल क्षेत्र में धान लगाने वाले किसान मॉनसूनी बारिश के लिए तरस रहे हैं. इधर, रोज-रोज चिलचिलाती धूप में खेतों का नमी सूख गया. अब किसान धान का बिचड़ा गिराने के मॉनसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. वहीं मौसम अपनी गर्म तेबर छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है. सुबह से शाम तक कड़ी धूप के कारण खेतों की नमी गायब हो गयी है. टाल क्षेत्र के गोपालपुर, पूर्वी सलेमपुर, पश्चिमी सलेमपुर, कवादपुर, अवगिल रामपुर, किरणपुर, अरमा, रामपुर आदि मौजे के हजारों एकड़ जमीन में धान की खेती किसान करते हैं. किसान कहते हैं कि लेट वेरायटी का धान आद्रा नक्षत्र में धान का बिचड़ा गिराने दिया जाता है, जबकि आद्रा का भी एक सप्ताह बीत गया है अब पांच-छह दिन आद्रा नक्षत्र और बचा है. इधर, इंद्रदेव बरसने का नाम नहीं ले रहे हैं. किसान बोरिंग से धान का बिचड़ा गिराने की इस चिलचिलाती धूप में हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. धान के खेतों को जुताई कर छोड़ दिया गया है. उसका नमी पूरी तरह सूख गया है. मानसूनी बारिश की थोड़ी सी भी मदद मिल जाये तो किसान बोरिंग से भी धान का बिचड़ा गिराने की हिम्मत कर सकेंगे. बस यहां के किसान बारिश की आस लगाये हुए हैं.

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