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नदी किनारे बसे गांवों को खनन गांव घोषित करने की मांग

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नदी किनारे बसे गांवों को खनन गांव घोषित करने की मांग

ठाकुरगंज. ठाकुरगंज प्रखंड के विभिन्न घाटों पर बालू उत्खनन परियोजना लगाने के लिए पर्यावरण स्वीकृति से पूर्व बुधवार को जन सुनवाई कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी संदीप कुमार ने सभी पक्षों की बातें सुनीं. इस दौरान मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल, केयर फोर ठाकुरगंज के फाउंडर डाॅ आसिफ सईद, प्रमुख प्रतिनिधि मो सद्दाम ने विभिन्न मुद्दों पर विभाग के घाट संचालनकर्ता का घेराव किया. लोगों ने नदी किनारे बसे पंचायत के गांवो को खनन गांव घोषित करने की मांग की. ताकि लोग अन्यत्र जाकर चैन से रह सके. लोग सिंगल लेन सड़क पर क्षमता से अधिक बालू लेकर चल रहे बड़े वाहनों की आवाजाही व उनके द्वारा सड़क व नालियों को पहुंचाए जा रहे नुकसान से नाराज थे. ग्रामीणों ने बताया कि बेतरतीब वाहनों की आवाजाही के कारण बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं. कहा कि पहले जानमाल की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए, तब पर्यावरण सुरक्षा के लिए बैठक बुलाई जाए. आरोप लगाया गया कि नियमों को ताक पर रखकर लगातार खनन हो रहा है. जिसके कारण नदी की धारा बदलने लगी है. राजस्व के नाम पर घाट संचालक लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से खिलवाड़ कर रहे हैं. कंट्रोल रूम व अधिकारियों से शिकायत करने पर सुनवाई नही होती है. लोग विरोध करते है तो उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है. सखुलाडाली पंचायत के झीलाबाडी गांव के कई लोगो पर मामला दर्ज़ कराया गया है. मौके पर पार्षदों के संग स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने घाट संचालक के मनमानी पर रोक लगाने हेतू प्रबुद्ध लोगो की समिति बनाने की मांग की. अधिकारियों की टीम ने कहा कि भविष्य में जहां भी घाट का संचालन होगा, वहां कैंप लगाकर लोगों को नियमों की जानकारी दी जाएगी. घाटों के आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाएंगे. लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए जाएंगे. मौके पर जिला खनन पदाधिकारी प्रवीण कुमार, बीडीओ अमहर अब्दाली आदि अधिकारी उपस्थित थे.

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