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Home बिहार किशनगंज अब ‘तत्काल युद्ध’ लड़ रहे हैं रेल यात्री; किशनगंज-कोलकाता रूट पर ट्रेनें मिनटों में फुल, IRCTC पर ‘High Load’ से हाहाकार

अब ‘तत्काल युद्ध’ लड़ रहे हैं रेल यात्री; किशनगंज-कोलकाता रूट पर ट्रेनें मिनटों में फुल, IRCTC पर ‘High Load’ से हाहाकार

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अब ‘तत्काल युद्ध’ लड़ रहे हैं रेल यात्री; किशनगंज-कोलकाता रूट पर ट्रेनें मिनटों में फुल, IRCTC पर ‘High Load’ से हाहाकार
ए आई जेनरेटेड तस्वीर

Train Ticket: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: पूर्वोत्तर भारत और सीमांचल के जिलों को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग इन दिनों यात्रियों की अभूतपूर्व भीड़ के आगे पूरी तरह बेपटरी और असहाय नजर आ रहा है. स्थिति इस कदर विकराल हो चुकी है कि अब सामान्य रिजर्वेशन तो दूर, ‘तत्काल टिकट’ हासिल करना भी आम मध्यमवर्गीय यात्रियों के लिए किसी मानसिक और डिजिटल युद्ध से कम नहीं रह गया है. हर रोज सुबह तत्काल कोटा खुलते ही महज कुछ ही सेकंड में सारी सीटें हवा हो जा रही हैं और हजारों लोग अपने मोबाइल व कंप्यूटर स्क्रीन पर सिर्फ एक ही संदेश पढ़ते रह जाते हैं— “High Load – Please Retry”.

जून-जुलाई की वेटिंग लिस्ट ने खोली पोल, ‘रेग्रेट’ पर पहुंचीं ट्रेनें

गर्मी की छुट्टियां, कोलकाता के बड़े अस्पतालों में इलाज, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं, व्यवसाय और उच्च शिक्षा के लिए हर दिन हजारों लोग किशनगंज और आसपास के इलाकों से कोलकाता की ओर रुख करते हैं. लेकिन बढ़ती पैसेंजर आबादी के मुकाबले रेलवे की इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन तैयारी बेहद कमतर दिखाई दे रही है. जून और जुलाई महीने की आरक्षण स्थिति (Reservation Status) ने रेलवे के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल कर रख दी है:

  • दार्जिलिंग मेल (Darjeeling Mail): इस वीआईपी ट्रेन में सबसे अधिक मारामारी देखी जा रही है. इसके 2AC और 3AC की सीटें लगभग पूरी तरह ब्लॉक व फुल हो चुकी हैं, जबकि स्लीपर क्लास में वेटिंग का आंकड़ा 70 के पार पहुंच चुका है. रात में चलकर सुबह कोलकाता पहुंचाने वाली इस ट्रेन में एक कन्फर्म टिकट मिलना अब किसी सौभाग्य से कम नहीं माना जा रहा.
  • कंचनकन्या एक्सप्रेस (Kanchan Kanya Express): इस ट्रेन में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है. स्लीपर और 3एसी कोचों में लंबी प्रतीक्षा सूची लगातार बढ़ रही है.
  • कामरूप, पदातिक, कंचनजंघा व तीस्ता तोर्शा एक्सप्रेस: इन सभी पारंपरिक ट्रेनों में भी यात्रियों का दबाव चरम पर है. स्लीपर से लेकर एसी तक का हर कोच क्षमता से अधिक यात्रियों से खचाखच भरा हुआ है.
  • एसटीएल एससी एक्सप्रेस (SCL SC Express): इस ट्रेन में तो स्थिति सबसे ज्यादा बदतर है. जून की कई महत्वपूर्ण तारीखों में टिकट बुकिंग “रेग्रेट” (Regret) मोड में जा चुकी है, यानी अब इसमें वेटिंग टिकट मिलने की संभावना भी तकनीकी रूप से खत्म हो गई है.
  • वंदे भारत व शताब्दी एक्सप्रेस: हैरानी की बात यह है कि प्रीमियम श्रेणी की सेमी-हाईस्पीड वंदे भारत (Vande Bharat Express) और शताब्दी एक्सप्रेस भी इस भीड़ से अछूती नहीं हैं. महंगे किराए के बावजूद इनमें भी सीटें बिजली की रफ्तार से फुल हो रही हैं.

10 और 11 बजते ही क्रैश हो रहा सर्वर, यात्रियों का फूटा गुस्सा

सबसे ज्यादा नाराजगी और आक्रोश रेलवे की डिजिटल तत्काल टिकट व्यवस्था को लेकर सामने आ रहा है. नियमों के मुताबिक, सुबह 10 बजे एसी (AC) और सुबह 11 बजे स्लीपर (Sleeper) क्लास के लिए तत्काल बुकिंग शुरू होती है. तय समय पर जैसे ही हजारों रेल यात्री IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लॉगिन करते हैं, सर्वर बैठ जाता है.

भुक्तभोगी स्थानीय यात्रियों ने आरोप लगाया कि डिजिटल इंडिया और आधुनिक बुलेट ट्रेन के बड़े-बड़े विज्ञापनों के बीच देश का आम नागरिक आज भी एक कन्फर्म स्लीपर टिकट के लिए दर-दर भटक रहा है. लोगों ने तीखा सवाल उठाया कि जब रेलवे प्रशासन को पहले से पता है कि समर सीजन (गर्मी की छुट्टियों) में सर्वर पर लोड बढ़ेगा, तो एडवांस में आईआरसीटीसी की सर्वर क्षमता और तत्काल कोटा सीटों को अपग्रेड क्यों नहीं किया जाता?

मजबूरी में बसों का महंगा सफर, अतिरिक्त कोच और नई स्पेशल ट्रेनों की मांग

इस टिकट संकट और रेल व्यवस्था की लाचारी का सीधा फायदा निजी ट्रैवल एजेंसियां और बस ऑपरेटर उठा रहे हैं. ट्रेन में कन्फर्म टिकट न मिलने के कारण गंभीर मरीजों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को मजबूरी में दो से तीन गुना महंगा किराया देकर बसों या निजी वाहनों से कोलकाता का सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक कमर टूट रही है.

ठाकुरगंज और किशनगंज के स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और दैनिक रेल यात्रियों ने रेल मंत्रालय और कटिहार रेल मंडल के डीआरएम (DRM) से पुरजोर मांग की है कि:

  1. किशनगंज-कोलकाता रेलखंड पर चलने वाली सभी नियमित ट्रेनों में कम से कम 2 से 3 अतिरिक्त स्लीपर और एसी कोच तुरंत जोड़े जाएं.
  2. इस रूट पर समर स्पेशल या ‘एग्जाम स्पेशल’ ट्रेनों का परिचालन अविलंब शुरू किया जाए.
  3. तत्काल बुकिंग व्यवस्था के सर्वर को दुरुस्त किया जाए ताकि आम जनता को साइबर कैफे और दलालों के चंगुल से बचाया जा सके.

ग्रामीणों का कहना है कि देश भले ही अंतरिक्ष और तकनीकी मोर्चे पर चंद्रयान जैसी बड़ी उपलब्धियों पर गर्व कर रहा हो, लेकिन धरातल पर आम रेल यात्री आज भी एक अदद सफर के टिकट के लिए डिजिटल जंग लड़ने को अभिशप्त है.

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