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Home बिहार किशनगंज पारंपरिक कला को मिले पंख, 40 महिलाओं ने सीखी बारीकियां

पारंपरिक कला को मिले पंख, 40 महिलाओं ने सीखी बारीकियां

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पारंपरिक कला को मिले पंख, 40 महिलाओं ने सीखी बारीकियां

छह दिवसीय खेता कढ़ाई प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न

किशनगंज. कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय ””खेता कढ़ाई”” प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन मंगलवार की देर शाम हुआ. आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले की विलुप्तप्राय पारंपरिक लोककला को पुनर्जीवित करना और स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना रहा.

सांस्कृतिक पहचान व स्वावलंबन का संगम

कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ जिला पदाधिकारी विशाल राज एवं अपर समाहर्ता मो उमैर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया था. उद्घाटन के अवसर पर डीएम विशाल राज ने कहा कि खेता कढ़ाई केवल धागों का खेल नहीं, बल्कि किशनगंज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कला महिलाओं की रचनात्मकता को निखारने के साथ-साथ उनके आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम है. डीएम ने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे इस हुनर को व्यावसायिक रूप दें ताकि स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल सके.

आधुनिक बाजार के अनुरूप दिया गया प्रशिक्षण

27 जनवरी से दो फरवरी तक चली इस कार्यशाला में कुल 40 चयनित प्रशिक्षुओं को हुनरमंद बनाया गया. विशेषज्ञों द्वारा उन्हें खेता कढ़ाई की मूल तकनीक, रंग संयोजन, कपड़े का चयन और सिलाई के विभिन्न चरणों की व्यावहारिक जानकारी दी गई. खास बात यह रही कि पारंपरिक डिज़ाइनों के साथ-साथ उन्हें आधुनिक बाजार की मांग और उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) के गुर भी सिखाए गए, ताकि वे अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बेच सकें.

प्रशस्ति पत्र पाकर खिले प्रशिक्षुओं के चेहरे

समापन समारोह में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) सह वरीय प्रभारी, कला एवं संस्कृति कार्यालय, मो उमैर ने सभी सफल प्रतिभागियों, महिलाओं व बच्चों को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ऐसी विलुप्त होती कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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