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Home बिहार किशनगंज ठाकुरगंज की सड़कों पर ‘मौत की रफ्तार’, नाबालिगों के हाथों में ट्रैक्टर-बोलेरो की स्टीयरिंग

ठाकुरगंज की सड़कों पर ‘मौत की रफ्तार’, नाबालिगों के हाथों में ट्रैक्टर-बोलेरो की स्टीयरिंग

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ठाकुरगंज की सड़कों पर ‘मौत की रफ्तार’, नाबालिगों के हाथों में ट्रैक्टर-बोलेरो की स्टीयरिंग
नाबालिग

Thakurganj: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: किशनगंज जिले का ठाकुरगंज प्रखंड क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक समस्या से जूझ रहा है. इलाके की मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर नाबालिग वाहन चालकों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि सड़कें मानो किसी बड़े और वीभत्स हादसे का इंतजार कर रही हैं. बाइक और स्कूटी की बात तो दूर, कम उम्र के लड़के धड़ल्ले से टेंपो, मैजिक, बोलेरो, पिकअप और भारी-भरकम ट्रैक्टर सड़कों पर दौड़ा रहे हैं. परिवहन नियमों (Motor Vehicles Act) की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस और जिला परिवहन विभाग की रहस्यमयी चुप्पी पर अब जनता का आक्रोश फूटने लगा है.

न लाइसेंस, न ट्रैफिक सेंस; सवारी गाड़ियां भी कम उम्र के लड़कों के भरोसे

नियम के मुताबिक देश में 18 वर्ष की आयु पूरी होने और वैध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनने के बाद ही किसी भी वाहन के संचालन की अनुमति है. लेकिन ठाकुरगंज में यह कानून सिर्फ किताबों तक सीमित नजर आता है.

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि समस्या केवल स्टंटबाजी करने वाले बाइकर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक और सवारी वाहन भी नाबालिगों के भरोसे चल रहे हैं:

  • सवारी वाहनों में खतरा: ग्रामीण इलाकों से बाजार तक चलने वाले ऑटो, टेंपो और मैजिक गाड़ियों को 14 से 16 साल के लड़के चला रहे हैं. पर्याप्त सरकारी परिवहन साधन न होने के कारण रोज सैकड़ों यात्री इन्हीं वाहनों में अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं.
  • नियमों की समझ शून्य: इन कम उम्र चालकों को न तो ओवरटेकिंग के नियमों की समझ है, न ही स्पीड लिमिट की. इसके चलते आए दिन बाजार और मुख्य चौराहों पर छोटी-मोटी दुर्घटनाएं आम बात हो चुकी हैं.

ट्रैक्टर चालकों पर मेहरबान क्यों है पुलिस? जांच की कार्यशैली पर उठे सवाल

ग्रामीणों का सबसे बड़ा और तीखा आरोप बालू, सीमेंट, ईंट, खाद और कृषि उत्पादों (मकई व गेहूं) की ढुलाई करने वाले ट्रैक्टरों को लेकर है. लोगों का कहना है कि स्थानीय पुलिस मुख्य सड़कों पर केवल बाइक सवारों को रोककर हेलमेट और इंश्योरेंस के नाम पर चालान काटने में मुस्तैदी दिखाती है, लेकिन सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे ओवरलोडेड ट्रैक्टरों को शायद ही कभी रोका जाता है.

भारी-भरकम ट्रैक्टरों की स्टीयरिंग पर बैठे अधकचरे और कम उम्र के लड़के मुख्य बाजार और स्कूल क्षेत्रों से तीव्र गति में हॉर्न बजाते हुए गुजरते हैं. इस वीआईपी ट्रीटमेंट को लेकर स्थानीय युवाओं ने पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

बाजार और स्कूल क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दहशत, अभिभावक भी कसूरवार

बाजार के दुकानदारों और अभिभावकों के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति तब होती है जब स्कूलों की छुट्टी होती है या शाम के समय बाजार में भारी भीड़ उमड़ती है. इस दौरान ये नाबालिग चालक संकरी सड़कों पर भी वाहनों की रफ्तार कम नहीं करते, जिससे राहगीर बाल-बाल बचते हैं.

इस जानलेवा लापरवाही के लिए समाज ने अभिभावकों को भी बराबर का दोषी ठहराया है. कई माता-पिता अपने बच्चों की जिद के आगे झुककर या अपनी सहूलियत के लिए खुद ही उन्हें मोटरसाइकिल या कार की चाबियां सौंप देते हैं. उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उनकी यह आंशिक ढील किसी दूसरे परिवार का चिराग बुझा सकती है या उनके अपने बच्चे को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है.

जनता की मुख्य मांगें:

ठाकुरगंज क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (SP) से मांग की है कि:

  1. सड़कों पर नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ एक विशेष सघन चेकिंग अभियान (Special Drive) चलाया जाए.
  2. बिना लाइसेंस और कम उम्र में भारी व्यावसायिक वाहन व ट्रैक्टर चलाने वालों के मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए.
  3. नाबालिगों को गाड़ी देने वाले अभिभावकों (Parents) पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाए, ताकि भविष्य में होने वाले जानलेवा हादसों को समय रहते रोका जा सके.
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