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Home बिहार किशनगंज नाला निर्माण पर मचा बवाल: एक शिकायत ने हिला दी ठाकुरगंज की करोड़ों की परियोजनाएं

नाला निर्माण पर मचा बवाल: एक शिकायत ने हिला दी ठाकुरगंज की करोड़ों की परियोजनाएं

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नाला निर्माण पर मचा बवाल: एक शिकायत ने हिला दी ठाकुरगंज की करोड़ों की परियोजनाएं
नक्शा
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj Drain Construction: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले की ठाकुरगंज नगर पंचायत में विकास योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है. प्रक्षेत्र के करोड़ों रुपये के ड्रेनेज मास्टर प्लान और नाला निर्माण की योजनाओं में कथित तौर पर एक ही कार्यस्थल पर दो अलग-अलग टेंडर जारी करने की विसंगति सामने आई है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक की ओर से साक्ष्यों के साथ दर्ज कराई गई इस शिकायत ने नगर पंचायत और बुडको के तकनीकी कप्तानों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. मामला केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज पटना स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक निगरानी विभाग तक पहुंच चुकी है.

एक आवेदन से प्रशासनिक महकमे में हलचल; नक्शों में टकराईं बुडको व नगर पंचायत की योजनाएं

इस हाई-प्रोफाइल तकनीकी विवाद और निविदाओं के टकराव की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं. ठाकुरगंज निवासी कृष्ण कुमार यादव ने जिलाधिकारी (DM) किशनगंज को एक विस्तृत तकनीकी स्मार पत्र सौंपा. इसमें आरोप लगाया गया है कि बुडको द्वारा स्वीकृत मुख्य नाला योजना और नगर पंचायत की कनिष्ठ योजना संख्या 01, 05 और 06 के कार्यक्षेत्र और एलाइनमेंट मानचित्र (Map) पर आपस में मेल खा रहे हैं.

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के उद्देश्य से एक ही भौतिक संरचना का दो बार टेंडर संधारित किया गया है. इस इनपुट के साथ जमा किए गए नक्शे में दोनों एजेंसियों के कार्यस्थल एक ही परिधि में ओवरलैप होते दिखे, जिसके बाद पूर्णिया प्रमंडल के वरिष्ठ अभियंताओं को लाइव जांच के आदेश जारी किए गए हैं.

मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने आरोपों को नकारा; ‘जिलेबिया मोड़’ के नाम पर भ्रम का दावा

“मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर पंचायत ठाकुरगंज के मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) नगर विकास आवास प्रमंडल पूर्णिया को विधिक स्पष्टीकरण भेजा है. उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने भौगोलिक नामकरण को लेकर भ्रम फैलाया है. योजना संख्या-05 राम जानकी मंदिर से ब्लॉक परिसर तक और योजना संख्या-06 सिकंदर पटेल आवास से जिलेबिया मोड़ रोड तक संधारित है. ‘जिलेबिया मोड़’ और ‘जिलेबिया मोड़ रोड’ की कड़ियों को एक समझ लेने के कारण यह विसंगति पैदा हुई है.”

Thakurganj Drain Construction: करोड़ों फूंकने के बाद भी जलजमाव से बेहाल जनता; डीपीआर और चैनिज सत्यापन की मांग

कागजों और नक्शों की इस जंग के बीच प्रभावित मुख्य प्रक्षेत्र के कली-मजदूर और आम नागरिक नारकीय स्थिति झेलने को विवश हैं. नगर के अधिकांश मोहल्लों में करोड़ों खर्च होने के बाद भी पानी के अंतिम निकास (आउटफॉल) की कोई मुस्तैद व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे मानसून के आते ही नए नाले भी गाद और कचरे से भरकर गड्ढों में तब्दील हो जाते हैं.

प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि इस विसंगति का पटाक्षेप करने के लिए दोनों विभागों की संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा ग्राउंड ट्रुथ वेरिफिकेशन, डीपीआर (DPR), बीओक्यू (BOQ) और चैनिज (Chainage) का लाइव भौतिक सत्यापन कराया जाए. अब देखना दिलचस्प होगा कि स्थानीय विधायक और जिलाधिकारी कनिष्ठ अभियंताओं की इस रिपोर्ट पर क्या दंडात्मक या सुधारात्मक कमान कसते हैं, ताकि जनता का टैक्स का पैसा फाइलों की भेंट चढ़ने से बच सके.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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