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Home बिहार किशनगंज अपने अनोखे स्वाद व खुशबू के लिए मशहूर सूरजापुरी आम को नहीं मिल पायी है राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

अपने अनोखे स्वाद व खुशबू के लिए मशहूर सूरजापुरी आम को नहीं मिल पायी है राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

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अपने अनोखे स्वाद व खुशबू के लिए मशहूर सूरजापुरी आम को नहीं मिल पायी है राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

बच्छरात नखत. ठाकुरगंज

आम को फलों का राजा कहा गया है और इसके कई किस्में हैं. इनमें से एक है सूरजापुरी आम जो सीमांचल का मशहूर आम माना जाता है. यह खाने में काफी स्वादिष्ट होता है. यहां की मिट्टी और जलवायु के प्रभाव से सूरजापुरी आम का स्वाद अनोखा है. इसके बावजूद भी ये आम की प्रजाति राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्षरत है. सूरजापुरी आम स्वादिष्ट होने के कारण बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी इसकी मांग है.

अन्य आमो से अलग है स्वाद

सूरजापूरी आम का स्वाद और इसकी विशेषताएं दुनिया के अन्य किसी भी प्रजाति के आम में नहीं है. सबसे रसीला और बिना फाइबर (रेशा) के इस आम का स्वाद अगर आपने एक बार चख लिया तो सूरजापुरी आम आपकी पहली पसंद बन जाएगी. स्वाद के साथ-साथ इसकी खुशबू भी लोगों को आकर्षित करती है. इसका गुद्दा क्रीम की तरह होता है. जिसे आप आसानी से मक्खन की तरह रोटी और ब्रेड पर लगाकर भी खा सकते हैं. रेशा नहीं होने की वजह से सूरजापुरी आम सुपाच्य होता है.

कैसे नाम पड़ा सूरजापूरी आम

पूर्व में इसी क्षेत्र को परगना सूरजापुरी के नाम से जाना जाता था. आज भी कई दस्तावेजों में ””””परगना सूरजापुरी”””” के नाम का इस्तेमाल किया जाता है.बिहार के किशनगंज, पूर्णिया और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के हिस्सों में सूरजापुरी आमों की पैदावार होती है.सूरजापुरी आम कभी सड़ता नहीं, यह पड़ा-पड़ा धीरे-धीरे सूख जाता है.

इस आम का अचार बड़े चाव से खाते है लोग

शुरुआती दौर में यह काफी खट्टा होता है, उस समय भी लोग इसका चटनी व आचार बना कर बड़े चाव से खाते हैं और जब ये पुरी तरह पक जाता है तो अन्य आमों की तुलना में अधिक मीठा होता है.

सरकार की उदासीनता की वजह से विलुप्ति के कगार पर ये आम

सरकार की उदासीन नीतियों, जनप्रतिनिधियों के गैर जिम्मेराना रवैए की वजह से इस प्रजाति को विश्वव्यापी पहचान नहीं मिल सकी है. अब सूरजापुरी आम की यह प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है. अगर अब भी इस प्रजाति पर ध्यान दिया जाए तो इसे लुप्त होने से बचाया जा सकता है.

किसानोंं को सरकार से मदद की है उम्मीद

विशेषताओं से भरे सूरजापुरी आम की प्रजाति के प्रसार के लिए जिला कृषि विभाग ने भी कोई योगदान नहीं दिया. कृषि विभाग की ओर से फलदार वृक्षों का वितरण होता है. लेकिन वे सूरजापुरी आम के वृक्ष उपलब्ध करवाने में असफल रहे हैं. जिला प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों को सूरजापुरी आम की प्रजाति को बचाने के लिए योजनाएं बनानी होंगी. फलदार पौधे वितरण करते वक्त या पौधरोपण में सूरजापुरी आम की कलम का उपयोग करना होगा. इस प्रजाति में कभी कभी कीड़े भी ल गने की समस्या आती है. विगत तीन सालों से लगातार कीड़े लगने की समस्या से किसान जूझ रहे हैं. गांव की सरकार को अपने अपने क्षेत्र में इससे संबंधित समस्याओं को कृषि विभाग के समक्ष रखकर समाधान करवाने की पहल करनी होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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