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Home बिहार किशनगंज मातृ मृत्यु दर में आयी भारी कमी, सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा

मातृ मृत्यु दर में आयी भारी कमी, सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा

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मातृ मृत्यु दर में आयी भारी कमी, सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा

एक साल में जिले में हुए 31 हजार से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव, योजनाओं का मिल रहा सीधा लाभ

किशनगंज. मातृत्व केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज व स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता की भी सबसे बड़ी कसौटी माना जाता है. कभी गर्भावस्था व प्रसव के दौरान समय पर उपचार, उचित जांच व अस्पताल तक पहुंच के अभाव में अनेक महिलाओं की जान जोखिम में पड़ जाती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में घरों पर असुरक्षित प्रसव की परंपरा भी मातृ मृत्यु के बड़े कारणों में शामिल रही है. लेकिन अब किशनगंज जिले में यह स्थिति तेजी से बदल रही है.

मातृ मृत्यु दर में कमी की दिशा में तेजी से बढ़ रहा जिला

मातृ मृत्यु अनुपात किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है. वर्ष 2014-16 में देश का मातृ मृत्यु अनुपात 130 था, जो वर्ष 2020-22 में घटकर 88 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है. बिहार में भी इस दिशा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जहां यह आंकड़ा 118 से घटकर 91 पर पहुंच गया है.

सरकारी अस्पतालों में बढ़ा विश्वास, हजारों महिलाओं को मिली सुरक्षित प्रसव सुविधा

जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक कुल 31,188 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए गए, जिनमें 167 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं. वहीं निजी संस्थानों में 5,284 प्रसव हुए. सरकारी अस्पतालों में बढ़ती यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि अब लोग सुरक्षित मातृत्व के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं.

गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी व समय पर उपचार

गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी व समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) सेवाओं को भी सशक्त किया गया है. जिले में 66,281 नयी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया, जिनमें 44,877 महिलाओं का प्रथम तिमाही में प्रारंभिक पंजीकरण हुआ. इसके अतिरिक्त 65,356 महिलाओं ने चार या उससे अधिक प्रसव पूर्व जांच कराई तथा 60,114 महिलाओं का चार या उससे अधिक बार हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया.

सुरक्षित मातृत्व के लिए सरकार की पहल : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना व प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं का लाभ लगातार गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाया जा रहा है. प्रत्येक माह की नौ तारीख को आयोजित विशेष जांच शिविरों में हाई-रिस्क (उच्च जोखिम) गर्भावस्था की पहचान कर समय रहते उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा सुविधा देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.

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