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Home बिहार किशनगंज तीन साल से स्टेशन परिसर में खड़ा है रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स, ठाकुरगंज में अधूरी पड़ी रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना

तीन साल से स्टेशन परिसर में खड़ा है रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स, ठाकुरगंज में अधूरी पड़ी रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना

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तीन साल से स्टेशन परिसर में खड़ा है रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स, ठाकुरगंज में अधूरी पड़ी रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना

रेलवे की योजना के तहत स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर रेल कोच रेस्टोरेंट स्थापित किया जाना था जो नहीं हो सका है.

ठाकुरगंज के रिपोर्टर के अनुसार

यात्रियों और स्थानीय लोगों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गैर-पारंपरिक स्रोतों से राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा शुरू की गई रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स योजना ठाकुरगंज में तीन वर्षों बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है. वर्ष 2023 में ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पहुंचा रेल कोच आज भी स्टेशन परिसर में खड़ा है और उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है. रेलवे की योजना के तहत स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर रेल कोच रेस्टोरेंट स्थापित किया जाना था. इसके लिए रेलवे द्वारा एक अनुपयोगी रेल कोच उपलब्ध कराया गया था, जिसे निजी संचालक आधुनिक रेस्टोरेंट में परिवर्तित करता. यहां यात्रियों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी भोजन, नाश्ता और टेक-अवे जैसी सुविधाएं उपलब्ध होनी थीं. जब वर्ष 2023 में रेल कोच ठाकुरगंज पहुंचा था, तब स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल था. रेलवे अधिकारियों ने भी जल्द संचालन शुरू होने की उम्मीद जताई थी. लेकिन समय बीतने के साथ यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और रेल कोच स्टेशन परिसर में ही खड़ा रह गया.

पहली बार ऊंची बोली बनी बाधा

जानकारी के अनुसार, पहली निविदा प्रक्रिया में चयनित पक्ष ने काफी ऊंची बोली लगाई थी. बाद में स्थानीय बाजार की स्थिति और संभावित आय-व्यय का आकलन करने पर संचालक को महसूस हुआ कि उस बोली के अनुरूप परियोजना का संचालन व्यावहारिक नहीं होगा. परिणामस्वरूप निर्धारित राशि जमा नहीं की गई और सुरक्षा जमा राशि गंवाकर परियोजना से पीछे हटना पड़ा. इसके कारण आवंटन प्रक्रिया निरस्त हो गई.

दूसरी बार कम बोली से अटका मामला

पहली निविदा विफल होने के बाद रेलवे ने अप्रैल 2025 में दूसरी बार टेंडर जारी किया. हालांकि इस बार स्थिति बिल्कुल विपरीत रही. इच्छुक पक्षों द्वारा लगाई गई बोलियां रेलवे की अपेक्षाओं से कम थीं. निर्धारित मानकों के अनुरूप बोली नहीं मिलने के कारण किसी भी आवेदक को आवंटन नहीं किया जा सका. नतीजतन योजना एक बार फिर अधर में लटक गई.

दर्जन भर स्टेशन पर चल रहे हैं कोच रेस्टोरेंट

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर वर्तमान में दर्जन भर रेल कोच रेस्टोरेंट संचालित हैं. इनमें कटिहार में आठ, अलीपुरद्वार में दो तथा रंगिया, लुमडिंग और तिनसुकिया में एक-एक रेस्टोरेंट शामिल हैं. जबकि ठाकुरगंज में यह परियोजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है.

प्लेटफॉर्म टिकट की भी नहीं थी जरूरत

योजना की खासियत यह थी कि रेस्टोरेंट स्टेशन के सर्कुलेटिंग एवं पार्किंग क्षेत्र में स्थापित किया जाना था. ऐसे में यहां आने वाले लोगों को प्लेटफॉर्म टिकट लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती. रेल यात्रियों के अलावा स्थानीय लोग भी रेल कोच में बैठकर भोजन का अनूठा अनुभव ले सकते थे. तीन वर्षों से स्टेशन परिसर में खड़ा यह रेल कोच अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि यदि रेलवे इस योजना को पुनर्जीवित करने के लिए गंभीर पहल करे तो ठाकुरगंज को एक नई सुविधा मिलने के साथ-साथ स्टेशन की पहचान भी बढ़ सकती है. फिलहाल रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स का सपना कागजों और दावों के बीच कहीं अटका हुआ नजर आ रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

कटिहार रेल मंडल के वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहली बार चयनित पक्ष द्वारा निर्धारित राशि जमा नहीं किए जाने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी. बाद में अप्रैल 2025 में पुनः टेंडर निकाला गया, लेकिन अपेक्षित बोली प्राप्त नहीं होने के कारण आवंटन नहीं हो पाया.

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