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Home बिहार किशनगंज जीवन को सशक्त बनाना व प्रगति को गले लगाना की थीम के साथ मना विश्व थैलेसीमिया दिवस

जीवन को सशक्त बनाना व प्रगति को गले लगाना की थीम के साथ मना विश्व थैलेसीमिया दिवस

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जीवन को सशक्त बनाना व प्रगति को गले लगाना की थीम के साथ मना विश्व थैलेसीमिया दिवस

किशनगंज.विश्व थैलेसीमिया दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है. यह दिन थैलेसीमिया के मरीजों को समर्पित है, जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं. यह एक गंभीर समस्या है, जिससे दुनियाभर में कई लोग पीड़ित है. थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके लक्षणों, निदान और उपचार के विकल्पों के बारे में शिक्षित करना इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य होता है. सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया की वर्ष 2024 की विश्व थैलेसीमिया दिवस का थीम जीवन को सशक्त बनाना, प्रगति को गले लगाना, सभी के लिए न्यायसंगत और सुलभ थैलेसीमिया उपचार है.

थैलेसीमिया एक गंभीर रोग है जो वंशानुगत बीमारियों की लिस्ट में शामिल है. इस रोग में शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है. रोगी के शरीर में लगातार खून की जरूरत बनी रहती है. दो वर्ष से कम आयू के बच्चों को थैलीसीमिया से पीड़ित होने की अधिक संभावना होती है. इसमें रोगी को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है. थैलेसीमिया शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है. हीमोग्लोबिन द्वारा ही पूरे शरीर की कोशिकाओं में ओक्सीजन पहुंचता है. इस रोग के कारण रोगी को गंभीर एनीमिया हो जाता है. उसे थकावट और कमजोरी लगता है. थैलेसीमिया के कारण शरीर में रक्त के थक्के बनते हैं.पुरुष हर तीन महीने और महिला हर चार महीने के अंतराल पर दोबारा रक्तदान कर सकती हैं. रक्तदान करने से शरीर पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है. बल्कि फायदा ही होता है. 01 अप्रैल 2023 से अब तक कुल 260 यूनिट रक्तदान किया गया है.सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया की एक यूनिट रक्तदान में 350 मिलीग्राम रक्त लिया जाता है. रक्तदान के बाद हुई खून की कमी 21 दिनों में पूरी हो जाती है. एक यूनिट खून से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायो मिलता है. इनसे अलग-अलग चार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है.18 वर्ष से ऊपर के पुरुष हर तीन महीने और महिला हर चार महीने के अंतराल पर दोबारा रक्तदान कर सकती हैं. रक्तदान के लिए शरीर का न्यूनतम वजन 45 किलो होना चाहिए. रक्तदान पूर्व की जांच से शरीर की स्थिति का पता चलता है. रक्तदान करने से कैंसर का खतरा कम, हार्ट को हेल्दी रखता है, वजन कंट्रोलरेड सेल्स प्रोडक्शन एवं सेहत अच्छी रहती है. जिले के सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 01 अप्रैल 2023 से अब तक कुल 260 यूनिट रक्तदान किया गया है.

उपयोगी साबित हो रहा है ब्लड बैंक का संचालन

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया की सदर अस्पताल परिसर में संचालित ब्लड बैंक का संचालन आम जिलावासियों के लिये लाभकारी साबित हो रहा है. दुर्घटना के गंभीर मामले, जटिल प्रसव, ऑपरेशन सहित अन्य मामलों में समय पर रक्त उपलब्ध होने से मरीजों की जान बचाना संभव हो सका है. खासकर थैलेसीमिया के मरीज जिनके शरीर में खून नहीं बनते ,उनके लिये जिले में ब्लड बैंक की स्थापना एक वरदान साबित हुई है.

नोडल पदाधिकारी सह सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर आलम ने बताया कि जिले में फिलहाल थैलेसीमिया पीड़ित रोगियों की संख्या 61 है. इसमें कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें महीने में दो से तीन बार ब्लड चढ़ाना होता. अप्रैल माह में जिले के थैलीसिमिया मरीज जो 10 वर्षीय देव बसाक जो किशनगंज प्रखंड के चुनाबाड़ी निवासी है, वे पिछले 2 वर्ष से थैलेसीमिया रोग से पीड़ित है. अब तक उन्हें 09 बार रक्त उपलब्ध करवाया गया है , इसके लिए उनके पिता अमित बसाक ने अस्पताल प्रशासन के साथ रक्तदाताओं का भी धन्यवाद कहा है. वे बताते हैं कि सदर अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक मुझ जैसे थैलेसीमिया रोगियों के परिजनों के लिये सुविधाजनक साबित हो रहा है. उन्हें रक्त के लिये कहीं अन्यत्र भटकना नहीं पड़ता. ब्लड बैंक के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर रोगियों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है.

जेनेटिक बीमारी है थैलेसीमिया

थैलेसीमिया की पहचान करना जरूरी है. बच्चे के जन्म के छह माह बाद इसका पता चलता है. भारत में लगभग प्रत्येक वर्ष दस हजार बच्चे थैलेसीमिया बीमारी के साथ जन्म लेते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में 46 क्रोमोसोम होते हैं यानि कुल 23 जोड़े क्रोमोसोम होते हैं. है यानी 23 का जोड़ा होता है. अगर पति और पत्नी दोनों थैलेसीमिया के कैरियर हैं तो बच्चों के थैलेसीमिया रोगी होने की संभावना बढ़ जाती है.

थैलेसीमिया के लक्षण की रखें जानकारी

थैलेसीमिया के लक्षणों में थकान के साथ कमजोरी, त्वचा का पीला रहना, चेहरे की हड्डी की विकृति, शरीर का धीमी गति से विकास होना, पेट में सूजन, गहरा रंग का पेशाब होना आदि शामिल है.विवाह से पूर्व महिला—पुरुष की रक्त की जांच अवश्य कराएं. पति पत्नी शिशु के बारे सोचने से पूर्व रक्त की जांच अवश्य करायें. गर्भावती होने से पूर्व रक्त की जांच जरूरी है. खून की जांच करवाने से कई प्रकार की गर्भ तथा शिशु संबंधी रोग की जटिलताओं से बचा जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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