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Home बिहार किशनगंज मुहर्रम पर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मंदिरों के बीच से शांति व भाईचारे के साथ गुजरता है ताजिया जुलूस

मुहर्रम पर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मंदिरों के बीच से शांति व भाईचारे के साथ गुजरता है ताजिया जुलूस

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मुहर्रम पर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मंदिरों के बीच से शांति व भाईचारे के साथ गुजरता है ताजिया जुलूस
पौआखाली के इमामबाड़ा चौक पर मुहर्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में शामिल जनप्रतिनिधि एवं कमेटी के सदस्य.

पौआखाली (किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट:

Muharram Kishanganj News: बदलते सामाजिक परिवेश और बढ़ती सामाजिक चुनौतियों के बीच पौआखाली नगर पंचायत का हाईस्कूल रोड मोहल्ला आज भी सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी विश्वास और भाईचारे की अनूठी मिसाल बना हुआ है. वार्ड संख्या-8 स्थित यह इलाका, जिसे स्थानीय लोग सिन्हा टोला के नाम से जानते हैं, वर्षों से गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है.

इस मोहल्ले की सबसे खास बात यह है कि यहां तीन-तीन मंदिर स्थापित हैं, लेकिन इसके बावजूद हर वर्ष मुहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस इसी मार्ग से पूरी शांति, सम्मान और परंपरागत गरिमा के साथ गुजरता है. इस दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए सौहार्द का संदेश देते हैं.

दशकों पुरानी परंपरा आज भी कायम

स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा दशकों पुरानी है. मुहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया जुलूस का हिंदू समाज के लोग स्वागत करते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय भी मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं का पूरा सम्मान करता है. यही आपसी विश्वास और सहयोग क्षेत्र में सामाजिक समरसता की मजबूत नींव बना हुआ है.

मुहर्रम के दौरान आयोजित अखाड़ों में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के युवक एक साथ लठियारी, पारंपरिक खेल और करतबों का प्रदर्शन करते हैं. यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बन जाता है.

पर्व नहीं, साझा संस्कृति का उत्सव

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि त्योहार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज की साझा सांस्कृतिक विरासत हैं. इसी सोच के साथ दोनों समुदायों के लोग हर पर्व और आयोजन में एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं.

मुहर्रम के अवसर पर लोग ताजिया जुलूस का इंतजार करते हैं और इसके बाद परिवार व मित्रों के साथ ईदगाह मैदान में लगने वाले अखाड़ों तथा मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं. यह परंपरा क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता को और मजबूत बनाती है.

शांति व्यवस्था में समाज की अहम भूमिका

मुहर्रम के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर सभी लोग यह सुनिश्चित करते हैं कि पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब देश के विभिन्न हिस्सों से सामाजिक तनाव की खबरें आती हैं, तब पौआखाली का यह मोहल्ला एक सकारात्मक संदेश देता है कि आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग से हर परिस्थिति में भाईचारा कायम रखा जा सकता है.

शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर हुई बैठक

इधर मुहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस एवं अन्य कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए इमामबाड़ा चौक पर नौजवान मुहर्रम कमेटी की बैठक आयोजित की गई.

बैठक की अध्यक्षता मुख्य पार्षद प्रतिनिधि अहमद हुसैन उर्फ लल्लू एवं उपमुख्य पार्षद प्रतिनिधि अबूनसर आलम ने की. इस दौरान वार्ड पार्षद नफीस आलम, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि असलम आजाद, कामरान खान, जरदीश आलम, पूर्व जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी नौशाद आलम, समाजसेवी शमसूल हक, मो. कासिम सहित अन्य लोगों ने अपने विचार रखे और शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर आवश्यक सुझाव दिए.

बैठक में सभी ने मुहर्रम पर्व को आपसी भाईचारे, सौहार्द और सामाजिक समरसता के साथ मनाने का संकल्प लिया.

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