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Home बिहार किशनगंज धूमधाम से मनायी गयी लक्खी पूजा

धूमधाम से मनायी गयी लक्खी पूजा

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धूमधाम से मनायी गयी लक्खी पूजा

किशनगंज.बंगाली समुदाय के द्वारा जिले में बुधवार को लख्खी पूजा पूरी श्रद्धा व विधि विधान के साथ की गयी. शाम मं बंगाली समुदाय के द्वारा लक्खी पूजा वैदिक मंत्रोच्चारण और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई. पूजा को लेकर भक्तों में उत्साह का माहौल था. शहर के नेपालगढ़ कॉलोनी, डुमरिया, लाइन, मिलन पल्ली, रूईधासा, रोलबाग आदि मोहल्लों में मनाया गया. पूजा में घरों में मां लख्खी की प्रतिमा भी स्थापित की गयी थी. लक्खी पूजा को लेकर महिलाओं ने सुबह से व्रत रखा था. पूजा में प्रसाद के रूप में फल, नारियल का लड्डू, खिचड़ी आदि का भोग लगाया गया. पुरोहित मलय मुखर्जी ने बताया कि दुर्गा पूजा के बाद यह पूजा मनायी जाती है. लख्खी पूजा का बंगाली समुदाय के लोगों में विशेष महत्व है. पूजा शरद पूर्णिमा के दिन मनायी जाती है. इस दिन को मां लक्खी की पूजा के लिए समर्पित मना जाता है. पुरोहित ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लख्खी पृथ्वी में विचरण करती है. मां लख्खी की पूजा करने से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती है. कुल मिलाकर लख्खी पूजा को लेकर शहर का माहौल भक्तिमय बना हुआ था. एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे.. ठाकुरगंज . एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे..’ के आह्वान के साथ बंगाली समुदाय द्वारा मनाई जाने वाली कोजागरी लखी पूजा बुधवार को उत्साह के साथ संपन्न हुई. इस दौरान महिलाओं ने व्रत रखकर माँ लक्ष्मी की पुजा अर्चना की. सुख एवं समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए बुधवार को इन लोगो ने अपने घर-आंगन की सफाई कर आकर्षक ढंग से सजाया. पुजा के पूर्व घर के आंगन,बरामदा, कमरा आदि में तरह-तरह की रंगोली बनाई जाती हैं.रंगोली में माँ की पद्चिन्ह भी बनाये जाते हैं जो घर के आंगन से मुख्य घर की ओर बनाई जाती हे .ऐसा माना जाता है कि माँ लक्ष्मी इन पदचिन्हों पर घर प्रवेश करती है और खूब धन बरसाती हैं.रंगोली से बने ये पदचिह्न विशेष आकर्षित करती हैं. इस दौरान लोग अपने सगे संबंधियों एवं अपने पड़ोसी व मित्रजन को आमंत्रित कर मां का भोग लगा प्रसाद दिया जाता है. कहीं खिचड़ी तो कहीं खीर का भोग लगाया जाता है. इस पूजा विशेषता हे की लोग बिना आमंत्रण के ही घरों में जाकर प्रसाद ग्रहण करते हे. इस बाबत पंडित जयंतो गांगुली ने बताया की लक्ष्मी पुजा घर में सुख,समृद्धि व धन- संपदा की वृद्धि के लिए पूजा की जाती है. इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रख कर विधि-विधान व वैदिक मंत्रोच्चारण करा कर माँ की पूजा करती हैं.पूजा में विशेष प्रसाद के रूप में व्रती महिलाएं नारियल व तिल के लड्डू,धान का लाखा,फल,खिचड़ी आदि को चढाते हैं. वहीं नगर के बंगाली समुदाय की व्रती महिलाओं ने बताया कि माँ की पुजा के क्रम में केला पौधा के छिलके से नाव बनाकर उसमें पांच तरह के अन्न फल-फुल डालकर पूजा की जाती है जिससे घर में अन्न,धन की कभी कमी नहीं होती है.

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