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Home बिहार किशनगंज सीमांचल के किशनगंज जिले में बादलों का डेरा: बारिश के आसार से लोगों को राहत की उम्मीद

सीमांचल के किशनगंज जिले में बादलों का डेरा: बारिश के आसार से लोगों को राहत की उम्मीद

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सीमांचल के किशनगंज जिले में बादलों का डेरा: बारिश के आसार से लोगों को राहत की उम्मीद
आसमान में छाए बादल
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट

Kishanganj Weather: बिहार के सीमावर्ती जिला किशनगंज और इसके आस-पास के मैदानी इलाकों में गुरुवार को मौसम के मिजाज में एक बड़ा और सुखद बदलाव देखने को मिला. पिछले कई दिनों से जारी रिकॉर्ड तोड़ उमस और चिलचिलाती धूप से बेहाल स्थानीय नागरिकों के लिए सुबह की शुरुआत बादलों की ठंडी छांव के साथ हुई. आसमान में घने और हल्के बादलों की सक्रिय आवाजाही के कारण सूरज के तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए हैं. मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के चलते जिले के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है.

पारा गिरा, पर नमी ने बढ़ाई उमस; ठाकुरगंज में सबसे अधिक बारिश के आसार

मौसम विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों और क्षेत्रीय विश्लेषण के अनुसार, जिले की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार बनी हुई है:

  • तापमान का ग्राफ: जिला मुख्यालय किशनगंज में गुरुवार की सुबह का न्यूनतम तापमान 25°C दर्ज किया गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 31°C के आस-पास रहने का अनुमान है. बादलों के घेरे के कारण धूप का असर न के बराबर रहेगा.
  • ह्यूमिडिटी (नमी) का असर: हवा में आर्द्रता (नमी) का स्तर बढ़ने के कारण वातावरण में चिपचिपी उमस का अहसास जरूर हो रहा है, लेकिन ठंडी हवाओं के झोंके और बारिश की संभावना ने लोगों को बड़ी राहत दी है.
  • ठाकुरगंज और बहादुरगंज हॉटस्पॉट: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ठाकुरगंज प्रखंड में इस मानसूनी सिस्टम का सबसे अधिक असर देखा जा सकता है, जहां हल्की से मध्यम दर्जे की लगातार बारिश की संभावना है. वहीं, बहादुरगंज और दिघलबैंक के इलाकों में भी आकाशीय बिजली (वज्रपात) के साथ मेघ गर्जन की चेतावनी जारी की गई है.

खरीफ फसलों को मिलेगा ‘संजीवनी’ पानी; धान की रोपनी पकड़ेगी रफ्तार

अमली जामा पहनाएगी बारिश: कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जून के इस पखवाड़े में होने वाली प्री-मानसून या मानसूनी वर्षा खेतों की सूखी मिट्टी में नमी वापस लाने के लिए ‘अमृत’ के समान है.

इस मौसमी बदलाव से सबसे ज्यादा खुशी ग्रामीण इलाकों के अन्नदाताओं के चेहरे पर देखी जा रही है. स्थानीय किसानों ने बताया कि धान की बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करने और खेतों की जुताई के लिए वे लंबे समय से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे थे. पानी के अभाव में खेतों की नमी पूरी तरह गायब हो रही थी और डीजल पंप सेट से सिंचाई करना बेहद खर्चीला साबित हो रहा था. यदि अगले 48 घंटों के भीतर संतोषजनक बारिश होती है, तो पूरे कोचाधामन, पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंड में धान की रोपनी का कार्य युद्ध स्तर पर गति पकड़ लेगा.

मौसम विभाग की एडवाइजरी: वज्रपात को लेकर रहें सतर्क, बिजली के खंभों से बनाएं दूरी

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक पूरे किशनगंज जिले में मौसम का मिजाज इसी तरह उतार-चढ़ाव भरा बना रहेगा. इस दौरान तेज रफ़्तार हवाएं चलने और कुछेक स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है.

प्रशासन ने आम नागरिकों, विशेषकर खेतों में काम करने वाले किसानों और चरवाहों से अपील की है कि खराब मौसम या बादलों की गड़गड़ाहट के दौरान खुले मैदानों, बड़े पेड़ों, तालाबों और बिजली के ऊंचे खंभों या ट्रांसफार्मर के पास बिल्कुल खड़े न हों. आपात स्थिति में पक्के मकानों या सुरक्षित भवनों की शरण लें. बहरहाल, बादलों की इस घेराबंदी ने पूरे सीमांचल को चिलचिलाती गर्मी से राहत देकर एक नई ताजगी भर दी है.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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