ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट.
Kishanganj News: हर प्रखंड में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल स्कूल खोलने का सपना बिहार सरकार ने बड़े उद्देश्य के साथ देखा था. मकसद था कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. लेकिन किशनगंज के ठाकुरगंज में इस महत्वाकांक्षी योजना की तस्वीर अभी अधूरी दिखाई देती है.
यहां मॉडल स्कूल का अपना भवन मरम्मत और जीर्णोद्धार के दौर से गुजर रहा है. नतीजतन स्कूल फिलहाल स्थानीय उच्च विद्यालय के साथ संचालित हो रहा है. अलग परिसर, अलग शैक्षणिक माहौल और मॉडल स्कूल की पहचान अभी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है.
भवन तैयार नहीं, इसलिए हाईस्कूल में चल रही पढ़ाई
ठाकुरगंज मॉडल स्कूल का निर्धारित भवन इन दिनों मरम्मत कार्य के कारण उपयोग में नहीं है. इसी वजह से स्कूल की सभी कक्षाएं अस्थायी रूप से स्थानीय उच्च विद्यालय परिसर में संचालित की जा रही हैं.
इसका सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक माहौल पर पड़ रहा है. जिस अलग पहचान और आधुनिक वातावरण के साथ मॉडल स्कूल की कल्पना की गई थी, उसका लाभ छात्रों को अभी तक नहीं मिल पा रहा है.
नामांकन सैकड़ों में, लेकिन उपस्थिति बेहद कम
विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कक्षा 9 में कुल 277 विद्यार्थी नामांकित हैं. इनमें 40 छात्र मॉडल स्कूल और 237 छात्र सामान्य उच्च विद्यालय के हैं. सोमवार को दोनों विद्यालयों को मिलाकर केवल 60 विद्यार्थी ही कक्षा में पहुंचे.
कक्षा 10 की स्थिति भी चिंताजनक रही. यहां 281 विद्यार्थियों का नामांकन है, लेकिन सोमवार को सिर्फ 20 छात्र ही विद्यालय पहुंचे. इससे नियमित उपस्थिति और पढ़ाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
वहीं कक्षा 12 में कला संकाय में 200 और विज्ञान संकाय में 107 विद्यार्थी नामांकित हैं. छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद संसाधन सीमित होने से विद्यालय पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.
मॉडल स्कूल में सिर्फ तीन शिक्षक, बाकी जिम्मेदारी हाईस्कूल पर
मॉडल स्कूल की सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की कमी है. फिलहाल केवल हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषय के तीन शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर उपलब्ध हैं.
गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई स्थानीय उच्च विद्यालय के शिक्षक करा रहे हैं. ऐसे में मॉडल स्कूल की स्वतंत्र शैक्षणिक व्यवस्था अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है.
सरकार की योजना बड़ी, लेकिन जमीन पर चुनौतियां भी कम नहीं
बिहार सरकार ने मॉडल स्कूलों की परिकल्पना आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के केंद्र के रूप में की है. इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, समृद्ध पुस्तकालय और बेहतर शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है.
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बेहतर पढ़ाई के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े.
लेकिन ठाकुरगंज में भवन निर्माण और संसाधनों की कमी के कारण यह सपना अभी अधूरा दिखाई देता है.
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Kishanganj News: अभिभावकों की उम्मीद, जल्द मिले पूरी सुविधा
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सरकार की पहल सराहनीय है, लेकिन मॉडल स्कूल को केवल नाम से नहीं बल्कि सुविधाओं और शिक्षकों के स्तर पर भी मॉडल बनाना होगा.
उनका मानना है कि भवन का मरम्मत कार्य जल्द पूरा होना चाहिए, सभी विषयों के स्थायी शिक्षक नियुक्त किए जाएं और विद्यालय को स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाए. तभी क्षेत्र के विद्यार्थियों को इस महत्वाकांक्षी योजना का वास्तविक लाभ मिल सकेगा.
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