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Home बिहार किशनगंज क्या बदल गया जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट? नए नक्शे ने बढ़ाई चर्चा

क्या बदल गया जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट? नए नक्शे ने बढ़ाई चर्चा

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क्या बदल गया जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट? नए नक्शे ने बढ़ाई चर्चा
रेल लाइन का रूट का नक्शा
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj New Rail Line Route Map: कोसी-सीमांचल प्रक्षेत्र को रेल कनेक्टिविटी का नया संबल देने वाली बहुप्रतीक्षित ‘जलालगढ़–किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना’ एक बार फिर सुर्खियों में है. करीब 18 वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी इस योजना को लेकर रेलवे के हालिया आंतरिक दस्तावेजों, आरटीआई के खुलासों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक नए प्रस्तावित नक्शे ने क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक कड़ियों में एक नई बहस छेड़ दी है. जमीन पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने इस रेल परियोजना के पुराने तय मार्ग (एलाइनमेंट) को पूरी तरह संशोधित कर दिया है? नए नक्शे में ‘कानकी’ क्षेत्र की स्पष्ट मौजूदगी से इस बात को भारी बल मिल रहा है.

18 साल पुरानी परियोजना; डीपीआर में बढ़ी लंबाई और 1852 करोड़ का बजट

  • बदल गया लंबाई का ग्राफ: वर्ष 2008-09 में जब तत्कालीन रेल बजट में इस परियोजना को हरी झंडी (स्वीकृति) मिली थी, तब इसकी कुल लंबाई 50.87 किलोमीटर निर्धारित की गई थी. हालांकि, रेलवे के एक हालिया आरटीआई उत्तर से यह कमान साफ हुई है कि नए तैयार किए गए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में अब इस रेल लाइन की लंबाई बढ़कर 51.632 किलोमीटर संधारित की गई है.
  • लागत में भारी उछाल: समय बीतने और नए रूट की कड़ियों के जुड़ने के कारण इस रेल परियोजना की अनुमानित बजटीय लागत अब बढ़कर 1852.32 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है. लंबाई में करीब एक किलोमीटर की यह बढ़ोतरी ही रूट संशोधन की संभावनाओं को सबसे ज्यादा पुख्ता कर रही है.

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नए नक्शे में कानकी की एंट्री; किशनगंज के पश्चिमी छोर की तरफ झुकाव

“पिछले दो दशकों में सीमांचल की भौगोलिक स्थिति, नए राष्ट्रीय राजमार्गों के संधारण, आबादी के घनत्व और भूमि की उपलब्धता (Land Availability) में व्यापक बदलाव आए हैं. तकनीकी जानकारों के अनुसार, पुराने सर्वे के मुकाबले रेलवे द्वारा वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मार्ग में आंशिक या रणनीतिक परिवर्तन करना इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से बेहद सामान्य कड़ियों का हिस्सा है.”

प्रस्तावित नए डिजिटल नक्शे का विश्लेषण करने पर साफ दिखता है कि नई रेल लाइन अब कानकी (Kanki) प्रक्षेत्र को अपने दायरे में ले रही है. इसके साथ ही यह पूरा रेल मार्ग किशनगंज के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों की तरफ थोड़ा ज्यादा झुकता नजर आ रहा है, जिससे कई नए गांवों के जुड़ने और पुराने गांवों के रूट से बाहर होने की चर्चा मुस्तैद है.

विस्तृत नक्शा सार्वजनिक करने की मांग; रेलवे बोर्ड के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें

रूट एलाइनमेंट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच ठाकुरगंज और किशनगंज के प्रबुद्ध नागरिकों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने रेल मंत्रालय के मुख्य कप्तानों से मांग की है कि इस नई परियोजना का आधिकारिक और विस्तृत थ्री-डी (3D) नक्शा अविलंब सार्वजनिक किया जाए. इससे भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), नए स्टेशनों के चिन्हांकन और क्षेत्रीय किसानों के मुआवजे को लेकर बनी धुंध पूरी तरह साफ हो सकेगी.

बहरहाल, इस हलचल से इतना तो साफ है कि वर्षों से लंबित पड़ी यह कड़नी अब दोबारा गति पकड़ रही है. यदि नया एलाइनमेंट स्वीकृत होता है, तो कानकी सहित सीमांचल के सुदूरवर्ती ग्रामीण प्रक्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नया आयाम मिलेगा, जो पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के लिए बेहद गेमचेंजर साबित होगा.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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