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Home बिहार किशनगंज रेल मंत्री को सांसद का पत्र: ‘जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट न बदलें’, जानें क्या है पूरा विवाद

रेल मंत्री को सांसद का पत्र: ‘जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट न बदलें’, जानें क्या है पूरा विवाद

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रेल मंत्री को सांसद का पत्र: ‘जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन का रूट न बदलें’, जानें क्या है पूरा विवाद
नया पुराना नक्शा

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj New Rail Line Route: कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व बहुप्रतीक्षित जलालगढ़–किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना एक बार फिर से बड़े विवाद और चर्चा के केंद्र में आ गई है.रूट में बड़े बदलाव की इस आशंका के बीच किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने केंद्रीय रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को एक आपातकालीन आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने वर्ष 2008-09 में स्वीकृत मूल एलाइनमेंट (Root Alignment) को हर हाल में बरकरार रखने की पुरजोर वकालत की है.

बढ़ी लंबाई और लागत; 1,852 करोड़ का हुआ प्रोजेक्ट

  • बजट में भारी उछाल: सालों की देरी के कारण इस परियोजना की अनुमानित लागत अब कई गुना बढ़कर 1,852.32 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है.
  • लंबाई में वृद्धि: वर्ष 2008-09 में जब इस रेल लाइन को पहली बार प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, तब इसकी कुल लंबाई 50.87 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन हालिया संशोधित डीपीआर में यह बढ़कर 51.632 किलोमीटर दर्ज की गई है. लंबाई में हुई इसी बढ़ोतरी ने रूट परिवर्तन की खबरों को पुख्ता किया है.

पुराना रूट बनाम प्रस्तावित नया एलाइनमेंट; कौन से क्षेत्र होंगे प्रभावित

  • मूल स्वीकृत पुराना रूट (2008-09): इस पुराने नक्शे के अनुसार रेल लाइन खाता हाट, पोठिया हाट, तस्लीम नगर, रोतरा, वाजिदपुर, कुतुबगंज हाट और मझगांव होते हुए किशनगंज मुख्यालय तक पहुंचने वाली थी.
  • संशोधित प्रस्तावित नया रूट (2026): सोशल मीडिया और आरटीआई से लीक हुए नए नक्शे के अनुसार, अब यह नई रेल लाइन दोमुहाना, भेड़ना, मजगामा, पठान टोली और बाभन टोली होते हुए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे कानकी स्टेशन की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है.

सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने उठाया जनहित का सवाल; रेल मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

17 जून 2026 को रेल मंत्रालय को भेजे गए पत्र में सांसद ने तर्क दिया है कि मूल एलाइनमेंट व्यापक जमीनी सर्वेक्षण और स्थानीय आबादी की जरूरतों को देखकर तय हुआ था. पुराने मार्ग में पड़ने वाले खाता हाट, पोठिया और कुतुबगंज जैसे क्षेत्र बेहद घनी आबादी वाले व्यापारिक केंद्र और ग्रामीण हाट-बाजार हैं. यदि इस लाइन को कानकी की तरफ मोड़ा गया, तो ये मूल गांव रेल संपर्क से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगे, जिससे इस परियोजना का मुख्य जन-कल्याणकारी उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा. अतः रेल मंत्रालय इस नए बदलाव को तत्काल निरस्त करे.

Kishanganj New Rail Line Route: रेलवे बोर्ड के अंतिम फैसले पर टिकी जनता की निगाहें

हालांकि, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) और कटिहार रेल मंडल के अधिकारियों की ओर से इस नए एलाइनमेंट को अंतिम और आधिकारिक स्वीकृति दिए जाने की कोई सार्वजनिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है. लेकिन विभागीय स्तर पर तैयार हुई नई फाइल और उस पर सांसद के कड़े रुख ने इस ठंडे बस्ते में पड़ी परियोजना को दोबारा जीवित कर दिया है.

अब पूरे सीमांचल के किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों की निगाहें रेल भवन, नई दिल्ली के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं. क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि रेलवे ने जबरन रूट बदलने की कोशिश की, तो इसके खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर सीमांचल के आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है.

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