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Home बिहार किशनगंज स्कूल खाली, कोचिंग हाउसफुल! ठाकुरगंज में शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

स्कूल खाली, कोचिंग हाउसफुल! ठाकुरगंज में शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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स्कूल खाली, कोचिंग हाउसफुल! ठाकुरगंज में शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
खाली पड़ी विद्यालय

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

Kishanganj Education News: सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के सरकारी दावों के बीच ठाकुरगंज से सामने आई तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं. एक तरफ स्कूलों में कक्षाएं सूनी दिखाई दे रही हैं, तो दूसरी ओर निजी कोचिंग सेंटर छात्रों से खचाखच भरे हुए हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, तब छात्र आखिर कहां हैं? यदि छात्र स्कूल में उपस्थित हैं, तो दिन के समय कोचिंग सेंटरों में इतनी भीड़ क्यों दिखाई दे रही है? और यदि वे कोचिंग संस्थानों में हैं, तो विद्यालयों में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है?

सरकारी स्कूलों की खाली कक्षाएं बढ़ा रहीं चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग की कमजोर निगरानी और लचर व्यवस्था का लाभ उठाकर कई निजी कोचिंग संस्थान स्कूल समय में ही कक्षाएं संचालित कर रहे हैं. इसका सीधा असर सरकारी विद्यालयों की उपस्थिति और शैक्षणिक वातावरण पर पड़ रहा है.

शहर के उच्च विद्यालय ठाकुरगंज, प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय ठाकुरगंज तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोधाबाड़ी समेत कई विद्यालयों में छात्रों की कम उपस्थिति की चर्चा है. लोगों का मानना है कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं.

यह भी पढ़ें: सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था की होगी बड़ी जांच, 7 प्रखंडों में उतरेगी टीम

ई-शिक्षाकोष व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

सरकार ने 15 जनवरी 2026 से सरकारी विद्यालयों में ई-शिक्षाकोष ऐप के माध्यम से फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफसीआर) आधारित ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू की थी. इसका उद्देश्य फर्जी नामांकन और कागजी हाजिरी पर रोक लगाना था.

हालांकि, ठाकुरगंज प्रखंड में यह व्यवस्था अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध है, तब भी विद्यालयों में वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है.

शिक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि स्कूल समय में कोचिंग सेंटरों का भरा होना केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सरकारी विद्यालय केवल नामांकन तक सीमित होकर रह जाएंगे और वास्तविक पढ़ाई निजी कोचिंग संस्थानों तक सिमट जाएगी.

कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी

मामले को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अवधेश शर्मा ने कहा कि क्षेत्र के सभी कोचिंग संस्थानों की सूची तैयार की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल समय में कोचिंग संचालित करते पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन की यह चेतावनी कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में स्कूल समय में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई होती है.

फिलहाल ठाकुरगंज में स्कूलों की खाली बेंचें और कोचिंग सेंटरों की भरी हुई कुर्सियां शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रही हैं, जो कई असहज सवालों को जन्म देती है.

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