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Home बिहार किशनगंज अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले अमर नायक सिद्धो-कान्हू को याद कर दी श्रद्धांजलि

अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले अमर नायक सिद्धो-कान्हू को याद कर दी श्रद्धांजलि

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अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले अमर नायक सिद्धो-कान्हू को याद कर दी श्रद्धांजलि

पोठिया. प्लस टू प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय पोठिया के मैदान में प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी रविवार को हूल दिवस धूम-धाम से मनाया गया. आदिवासी सांवता सेचेद लेक्चार सेमदेल किशनगंज की ओर से पोठिया मांडेर मांझी थान के नेतृत्व में संथाल हूल के अमरनायक सिद्धो कान्हू को श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि दी गयी. आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में समारोह में हिस्सा लिया. इस मौके पर समिति की ओर से तीरंदाजी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक व नृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किये गये. जिसका विधिवत उद्घाटन मिर्जापुर पंचायत के मुखिया बरियार मरांडी ने तीर चलाकर किया. इस दौरान राजेश किस्कू ने बताया कि आज के ही दिन हजारों आदिवासियों ने सिद्धो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका था. बरहेट के पचकठिया में अंग्रेजों ने दोनों भाई सिद्धो और कान्हू को पीपल पेड़ के नीचे फांसी दी थी. हूल दिवस के दिन शहीद हुए उन वीरों को याद किया जाता है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठायी थी. पोठिया मांडेर मांझी थान के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से बताया गया कि संथाल परगना में ””””संथाल हूल”””” और ””””संथाल विद्रोह”””” के द्वारा अंग्रेजों को भारी क्षति उठानी पड़ी थी. सिद्धू और कान्हू दो भाइयों के नेतृत्व में 30 जून 1855 को वर्तमान साहेबगंज जिले के भगनाडीह गांव से इस विद्रोह का प्रारंभ किया गया था. इस घटना की याद में प्रतिवर्ष 30 जून को ””””हूल क्रांति दिवस”””” मनाया जाता है. संथाल परगना के भगनाडीह में हूल के मौके पर अंग्रेजों के खिलाफ लोगों ने करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो”””” के नारे दिये थे. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य कर लोगों का मन मोह लिया. इस मौके पर समिति के अध्यक्ष बरियार मरांडी,उपाध्यक्ष सिसुराम मरांडी,पूर्व मुखिया संजय उपाध्याय, उप मुखिया प्रतिनिधि शिवनाथ पासवान,सचिव राजेश किस्कू,अमीन मुर्मू,सहित सैकड़ों स्थानीय लोग व आदिवासी समुदाय की महिला मौजूद थीं.

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