पश्चिम से पूर्व की ओर खिसका गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, बदल गया जमीन का पूरा खेल

Gorakhpur Siliguri Expressway: करीब 37,500 करोड़ रुपये की लागत वाली गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के एलाइनमेंट में बड़ा बदलाव किया गया है. अब यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे ठाकुरगंज के पश्चिमी हिस्से के बजाय पूर्वी क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके लिए किशनगंज जिले के 52 मौजों में भूमि अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

By Divyanshu Prashant | June 18, 2026 11:43 AM
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Gorakhpur Siliguri Expressway: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी सड़क बुनियादी ढांचा परियोजना, गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का आधिकारिक रूट और मानचित्र बदल गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी कप्तानों द्वारा जारी नए संशोधित एलाइनमेंट के अनुसार, करीब 550 किलोमीटर लंबा यह आर्थिक गलियारा अब ठाकुरगंज प्रक्षेत्र के पश्चिमी भाग और पौवाखाली के उत्तर दिशा के बजाय पूर्वी इलाके की कड़ियों को छुएगा. इस बड़े बदलाव के कारण जहां भू-माफियाओं और जमीन कारोबारियों का पुराना गणित पूरी तरह बिगड़ गया है, वहीं बरचौंदी, खारूदह, भोलमारा और जीरनगछ जैसी अब तक पिछड़ी कनिष्ठ पंचायतें विकास के मुख्य गलियारे के रूप में मुस्तैद होने जा रही हैं.

इन गांवों से होकर गुजरेगा नया रूट; भोगड़ाबर में बनेगा मुख्य इंटरचेंज

संशोधित रूट और भौगोलिक कड़ियों की मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं. अब यह एक्सप्रेसवे पौवाखाली और खानाबाड़ी के दक्षिणी हिस्से से आगे बढ़ते हुए कोईमारी, कुम्हार टोली, सरायकुड़ी, करूआमनी, बरचौंदी, कुंजीमारी और चक्करमारी होते हुए दोगछी पहुंचेगा. इसके बाद बेलबाड़ी और मुरलीडांगी के बीच से गुजरते हुए कथलडांगी स्थित पेट्रोल पंप और हैदर नगर के बीच से KTTG रोड को पार करेगा. वहां से मुंशीभीटा, बेबुलडांगी और कौवाभीटा के समीप से होते हुए यह पश्चिम बंगाल प्रक्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा.

इस परियोजना की सबसे मुख्य विसंगति निवारक विशेषता यह है कि किशनगंज जिले में एनएच-327ई (NH-327E) से एक्सप्रेसवे का लाइव जुड़ाव केवल भोगड़ाबर के पास प्रस्तावित इंटरचेंज के माध्यम से संधारित होगा. इसके चलते भोगड़ाबर प्रक्षेत्र में भविष्य में लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल और व्यावसायिक कमान विकसित होने की प्रबल संभावनाएं बढ़ गई हैं.

Gorakhpur Siliguri Expressway: 52 मौजों में भूमि निबंधन पर रोक; एमवीआर का विशेष पुनरीक्षण पूरा

“जिला प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक कड़ियों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए कुल 52 मौजों की भूमि चिन्हित कर अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रभावित प्रक्षेत्रों में कनिष्ठ कप्तानों द्वारा तत्काल प्रभाव से जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन पर रोक लगा दी गई है. हाल ही में केंद्रीय मूल्यांकन समिति की बैठक में आवासीय, विकासशील और दो-फसला कृषि भूमि के एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) का विशेष पुनरीक्षण पूरा कर नई सरकारी दरें संधारित कर दी गई हैं, जिससे किसानों को पारदर्शी मुआवजा मिल सके.”

इन प्रमुख मौजों की जमीन होगी अधिग्रहित; विकास का खुलेगा नया द्वार

भूमि अर्जन की मुख्य कड़ियों के तहत जिन 52 मौजों को गजट में अधिसूचित किया गया है, उनमें मुख्य रूप से कठारो, बरचौंदी, जिरनगच्छ, बहादुरपुर, अमलझाड़ी, कोदालछाड़ा, भोगड़ाबर, रूईधासा, छेतल, दोगछी, गिथिनकोला, पथरिया, बेसरवाटी, कुकुरवाधी, भोलमारा, कनकपुर, दुधमजर, अदरागुड़ी, करूआमनी, गोथरा और नेजागछ प्रक्षेत्र शामिल हैं.

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और कली-मजदूरों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ने वाला यह आर्थिक गलियारा सीमांचल के कृषि उत्पादों को देश की मुख्य मंडियों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा. जहां कुछ निवेशकों को इस बदलाव से आंशिक झटका लगा है, वहीं पूर्वी ठाकुरगंज के दर्जनों देहाती गांवों में इस सुचारू कमान से आर्थिक समृद्धि और कली-मजदूरों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की नई सुबह की आहट साफ सुनाई देने लगी है.

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