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Home बिहार किशनगंज सुरक्षा एजेंसियों के आंखों में धूल झोंक कर ट्रेन और सड़क मार्ग से हो रही गोल्ड की स्मगलिंग

सुरक्षा एजेंसियों के आंखों में धूल झोंक कर ट्रेन और सड़क मार्ग से हो रही गोल्ड की स्मगलिंग

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सुरक्षा एजेंसियों के आंखों में धूल झोंक कर ट्रेन और सड़क मार्ग से हो रही गोल्ड की स्मगलिंग

सैकड़ों युवक और महिलाएं भी गोल्ड स्मगलिंग में कूरियर का कर रहे कार्य

किशनगंज.सिलीगुड़ी कॉरिडोर और किशनगंज के रास्ते तस्करी के विदेशी सोना के अवैध कारोबार का खेल बदस्तूर जारी है.तीन दिन पूर्व ही किशनगंज बीएसएफ और डीआरआई टीम ने लगभग डेढ़ करोड़ मूल्य के तस्करी के गोल्ड के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया है.चिकेन नेक और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रास्ते इस्लामपुर, किशनगंज, दालखोला, रायगंज क्षेत्र सोना तस्करी का गोल्डन प्वाइंट बन चुका है.इस इलाके में आए दिन तस्करी के सोना की बरामदगी हो रही है.इन इलाकों में रोजाना करोड़ों की सोने की स्मगलिंग होती है.भारत बांग्लादेश, भारत भूटान, भारत नेपाल की सीमा से नजदीक होने और तस्करी के सोने से मोटा मुनाफा होने के कारण इस धंधे में सैकड़ों लोग और खासकर ज्वेलरी कारोबार से जुड़े कई सफेदपोश लगे हुए हैं. इस कार्रवाई के बाद सोने की तस्करी करने वाले कई बड़े गिरोह डीआरआई और बीएसएफ की रडार पर है. दरअसल बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में गोल्ड पर कोई टैक्स नहीं है और इन देशों में दुबई से गोल्ड की आवक होती है. वहीं भारत के बाजार से तुलना करें तो भारत से लगभग 10 प्रतिशत सस्ते में समीपवर्ती तीनों देशों में गोल्ड मिलता है. साथ ही यहां अंतरर्राष्ट्रीय बाजार भाव में सोना बिकता है.वहीं भारत में कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत जुड़ जाती है. जिस कारण समीपवर्ती तीनों देशों के तुलना में भारत में गोल्ड का मूल्य 10 प्रतिशत अधिक है.अगर एक सौ ग्राम के सोने के बिस्कुट की बात करें तो अभी के बाजार मूल्य के हिसाब से भारत में लगभग 72000 रुपए दाम है,वहीं बांग्लादेश,भूटान में यह 65 हजार से कम में बिकता है. इसी फर्क के कारण सिलीगुड़ी, इस्लामपुर, किशनगंज, दलखोला, रायगंज तस्करों के लिए स्वर्ग बना हुआ है. इस कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार सिलीगुड़ी से लेकर रायगंज तक सोने की तस्करी रोजाना बड़े पैमाने पर होती है.

भारत में सोना महंगा होने के कारण तस्करी का धंधा है पूरे परवान पर

दूसरे देश का सोना बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए भारत में बिकना पूरी तरह से गैरकानूनी है.किंतु किशनगंज और आसपास के इलाकों में ज्यादातर कारखानों में धड़ल्ले से यह अवैध कारोबार कई दशकों से चलता आ रहा है.सूत्रों की माने तो किशनगंज सहित रायगंज,सिलिगुड़ी, दलखोला, इस्लामपुर में स्थित कई सोना गलाने वाले कारखानों द्वारा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के सोने की खेप तस्कर पहुंचाते हैं. कारखानों में डिलीवरी के दो मिनट के अंदर सोने को गलाकर भारत की मुहर लगा दी जाती है.कई बार गुप्त सूचनाओं के आधार पर इन कारखानों में कस्टम विभाग के द्वारा छापामारी भी की जाती रहती है,किंतु कस्टम अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही दूसरे देश के सोने को गलाकर भारत की मुहर लगा दी जाती है.यह सारा सोना भारत की मुहर लगाने के बाद एक नंबर का हो जाता है,जिसे मालदा, कोलकाता आदि सोने की बड़ी मंडियों में खपा दिया जाता है.

पूर्वोत्तर के राज्यों से स्मगल होकर आता है सोना

जांच एजेंसियों के मुताबिक पहले सबसे ज्यादा तस्करी का सोना नेपाल के रास्ते आता था.अब इसका बड़ा हिस्सा चीन से म्यांमार में प्रवेश करता है. इसके बाद मांडले-कलेवा मार्ग से भारत-म्यांमार सीमा पर लाया जाता है.मणिपुर, मिजोरम व नागालैंड के दुर्गम इलाकों से यह सोना भारत पहुंचता है और फिर ट्रेन और सड़क मार्ग से एक हिस्सा सिलीगुड़ी के रास्ते इस्लामपुर किशनगंज,दालखोला, मालदा,और कोलकाता तक पहुंचता है और इसी बीच में सोना को गला कर उसे भारतीय सोना बना दिया जाता है. दूसरा स्रोत दुबई है जहां से बांग्लादेश के रास्ते भी तो नेपाल के रास्ते भी सोना भारत आता है.

तस्करों के द्वारा देश के राजस्व को लगाया जा रहा है चूना

एक तरफ जीएसटी चोरी पर सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है तो दूसरी तरफ सोने की तस्करी का रैकेट मजबूत हो रहा है. सराफा कारोबारी अपने कैरियर (तस्करी की भाषा में ट्रैवलर) के जरिये तस्करी का सोना ला रहे हैं.इसमें सबसे प्रसिद्ध लेकिन महफूज रूट सिलीगुड़ी,किशनगंज कोलकाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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