मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Galgalia National Highway: भारत-नेपाल सीमा से सटे किशनगंज जिले के गलगलिया में राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है. यहाँ बीते अप्रैल माह के दौरान विभिन्न प्रशासनिक कार्रवाइयों में जब्त किए गए कई भारी मालवाहक ट्रक आज (03 जुलाई 2026) भी मुख्य सड़क के किनारे लावारिस और कतारबद्ध खड़े हैं. तीन महीने से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन ट्रकों को पुलिस लाइंस या किसी सुरक्षित सरकारी यार्ड में स्थानांतरित नहीं किया गया है. नतीजतन, इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा स्थायी ट्रक पार्किंग में तब्दील हो चुका है, जिससे यहाँ से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों के सिर पर चौबीसों घंटे मौत का साया मंडरा रहा है.
संकरा हुआ हाईवे, बरसात और कम दृश्यता ने बढ़ाया खतरा
- संकरी हुई मुख्य सड़क: भारी ट्रकों की लंबी कतार के कारण नेशनल हाईवे की चौड़ाई कई जगहों पर आधी रह गई है. इस वजह से छोटी गाड़ियों और बाइकों को ओवरटेक करने के दौरान भारी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे आमने-सामने की टक्कर होने का खतरा बढ़ गया है.
- मानसून की दोहरी मार: वर्तमान में जारी मानसूनी बारिश और खराब मौसम के कारण हाईवे पर दृश्यता (Visibility) काफी कम हो जाती है. रात के अंधेरे या तेज बारिश में सड़क किनारे खड़े इन ट्रकों में कोई रिफ्लेक्टर या इंडिकेटर न जलने के कारण दूर से आ रहे तेज रफ्तार वाहनों के इनसे टकराने की पूरी आशंका बनी रहती है.
- पार्किंग या जब्ती स्थल?: स्थानीय बुद्धिजीवियों और वाहन चालकों के बीच यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि यदि परिवहन विभाग या स्थानीय पुलिस के पास जब्त वाहनों को रखने के लिए कोई निर्धारित सरकारी स्पेस (मालखाना या यार्ड) उपलब्ध नहीं था, तो राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी जीवन-रेखा को ही अस्थायी जब्ती स्थल बनाना कहाँ तक न्यायसंगत है?
Galgalia National Highway: “हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले जागे प्रशासन” — भड़के स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर किसी बड़ी दुर्घटना के होने और मासूमों की जान जाने के बाद ही नींद से जागता है और खानापूर्ति के लिए जांच कमेटियां गठित करता है. जरा-सी लापरवाही हाईवे पर कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां छीन सकती है. क्षेत्रवासियों ने किशनगंज के जिला पदाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) से सामूहिक मांग की है कि अप्रैल महीने से खड़े इन सभी कंडम और जब्त ट्रकों को क्रेन की मदद से तत्काल हाईवे से हटवाया जाए और संबंधित आढ़त या डंपिंग यार्ड में शिफ्ट कर सड़क को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाए.
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह लंबे समय तक वाहनों को खड़ा रखना ‘सड़क सुरक्षा अधिनियम’ के स्थापित नियमों का खुला उल्लंघन है. अब देखना यह है कि स्थानीय मीडिया द्वारा इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद क्या जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आता है, या फिर गलगलिया हाईवे किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का गवाह बनने का इंतजार करता रहेगा.
