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Home बिहार किशनगंज एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे…

एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे…

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एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे…

ठाकुरगंज एसो मां लोक्खी आमादेर घोरे, थाको आलो कोरे..’ के आह्वान के साथ बंगाली समुदाय द्वारा मनाई जाने वाली कोजागरी लखी पूजा सोमवार को उत्साह के साथ संपन्न हुई. इस दौरान महिलाओं ने व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पुजा-अर्चना की. सुख एवं समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की आराधना के लिए सोमवार को इन लोगों ने अपने घर-आंगन की सफाई कर आकर्षक ढंग से सजाया. पुजा के पूर्व घर के आंगन, बरामदा, कमरा आदि में तरह-तरह की रंगोली बनाई जाती हैं. रंगोली में मां की पद्चिन्ह भी बनाये जाते हैं जो घर के आंगन से मुख्य घर की ओर बनाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी इन पदचिन्हों पर घर प्रवेश करती है और खूब धन बरसाती हैं. रंगोली से बने ये पदचिह्न विशेष आकर्षित करती हैं. इस दौरान लोग अपने सगे संबंधियों एवं अपने पड़ोसी व मित्रजन को आमंत्रित कर मां का भोग लगा प्रसाद दिया जाता है. कहीं खिचड़ी तो कहीं खीर का भोग लगाया जाता है. इस पूजा की विशेषता है की लोग बिना आमंत्रण के ही घरों में जाकर प्रसाद ग्रहण करते है. इस बाबत पंडित जयंतो गांगुली ने बताया की लक्ष्मी पूजा घर में सुख, समृद्धि व धन- संपदा की वृद्धि के लिए पूजा की जाती है. इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रख कर विधि-विधान व वैदिक मंत्रोच्चारण करा कर मां की पूजा करती हैं. पूजा में विशेष प्रसाद के रूप में व्रती महिलाएं नारियल व तिल के लड्डू, धान का लाखा, फल, खिचड़ी आदि को चढाते हैं .

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