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Home बिहार किशनगंज सुरक्षित मातृत्व के लिए संस्थागत प्रसव पर जोर

सुरक्षित मातृत्व के लिए संस्थागत प्रसव पर जोर

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सुरक्षित मातृत्व के लिए संस्थागत प्रसव पर जोर

-मां और शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा विशेष अभियान

किशनगंज

गृह प्रसव की घटनाओं को समाप्त कर प्रत्येक पंचायत को “गृह प्रसव मुक्त पंचायत” बनाने के उद्देश्य से जिले में एक विशेष अभियान शुरू किया गया है. इस पहल का मकसद है कि कोई भी गर्भवती महिला घर पर प्रसव करने को मजबूर न हो, बल्कि अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराएं.

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि जिला पदाधिकारी विशाल राज के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान को गति दी जा रही है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रसव न केवल मां और नवजात शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं से भी समय रहते निपटा जा सकता है.

सिविल सर्जन ने बताया कि गृह प्रसव रोकने के लिए गांव-गांव में आशा कार्यकर्ता और एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के महत्व की जानकारी दी जा रही है. कोई भी महिला प्रसव के दौरान आर्थिक या परिवहन की समस्या से जूझे नहीं . इसके लिए 102 एवं 108 एंबुलेंस सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं. स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें.

गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान में टेढ़ागाछ की तत्परता

जिले के अन्य प्रखंडों की तरह टेढ़ागाछ प्रखंड भी इस अभियान को सफल बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.

प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित ब्लॉक टास्क फोर्स की बैठक में इस विषय पर विशेष चर्चा की गई. बैठक में सभी स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की पहचान कर उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाए और गांवों को चरणबद्ध तरीके से “गृह प्रसव मुक्त पंचायत” घोषित किया जाए. यह भी तय किया गया कि पंचायत प्रतिनिधियों और आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी अभियान से जोड़ा जाए ताकि समुदाय की भागीदारी बढ़ सके.

अभियान की प्रभावशीलता के लिए आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

उन्हें यह सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है कि कोई भी गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच से वंचित न रहे और प्रसव के समय उचित देखभाल प्राप्त करें.

डॉ राजेश कुमार ने कहा कि अस्पताल में प्रसव कराने से मां और शिशु दोनों की जान की सुरक्षा होती है. संस्थागत प्रसव से मां को बेहतर देखभाल, शिशु को तुरंत टीकाकरण और परिवार को आर्थिक सहयोग मिलता है. यह अभियान केवल स्वास्थ्य सुधार का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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