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एचएमपीवी वायरस को लेकर घबराएं नहीं,लेकिन रहें सावधान

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एचएमपीवी वायरस को लेकर घबराएं नहीं,लेकिन रहें सावधान

किशनगंज.कोरोना से अभी लोग ठीक से उबर भी नहीं पाए थे इसी बीच एचएमपीवी एक नया खतरा बनकर बढ़ने लगा है.सबसे पहले चीन से खबरें सामने आई वहीं सोमवार को भारत में भी इस संक्रामक रोग का पहला मामला सामने आया.वहीं अब तक देश में आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं.

देश में इस वायरस के दस्तक के बाद प्रभात खबर ने भी इस वायरस से होने वाले नुकसान और इससे कैसे बचा जाए इस संबंध में जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक डा.शिव कुमार से लंबी बातचीत की उन्होंने बताया कि एचएमपीवी श्वसन संबंधी बीमारी है अलग-अलग मौसमों में इसका संक्रमण बढ़ता है, खासकर सर्दियों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है. एचएमपीवी संक्रामक रोग है और संक्रमित व्यक्ति से दूसरों में आसानी से फैलता है.

इन माध्यमों से संक्रमण का प्रसार हो सकता है.

खांसने और छींकने से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स़़, ऐसी वस्तुओं या सतहों को छूना जिन पर वायरस हो,मुंह, नाक या आंखों को छूना इत्यादि से इसका फैलाव हो सकता है.

संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर शिव कुमार बताते हैं कि अभी इससे बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है.और न ही इससे बचाव के लिए कोई बहुत खास उपाय की आवश्यकता है. श्वसन संक्रामक रोगों से बचाव के लिए कोविड में जो उपाय किए जाते रहे थे (जैसे हाथों की स्वच्छता और इम्युनिटी बढ़ाने के प्रयास) वही काफी हैं. जो लोग किसी गंभीर रोग का शिकार रहे हैं.इम्युनिटी कमजोर है उन्हें मास्क लगाने और सामाजिक दूर का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.

एचएमपीवी के प्राथमिक लक्षण

ये बहुत गंभीर रोग वाला वायरस नहीं है.इससे ज्यादातर संक्रमितों में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं, कुछ लोगों में इसके कारण अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मामले जरूर ट्रिगर हो सकते हैं.ये वायरस ज्यादातर कम उम्र के बच्चों और बुजुर्गों या फिर कमजोर इम्युनिटी वालों को अपना शिकार बना रहा है.ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस चूंकि ये एक आरएनए वायरस है जो जिंदा रहने के लिए प्राकृतिक रूप से म्यूटेट होते रहते हैं.रिपोर्ट्स के मुताबिक एचएमपीवी में भी नया म्यूटेशन हुआ है.

बरतें सावधानी

इस वायरस के संक्रमण के लक्षणों में खांसी, बुख़ार, नाक बंद होना और सांस लेने में तकलीफ़ और फ़्लू शामिल हैं. अधिक गंभीर मामलों में, इससे ब्रोंकाइटिस या निमोनिया भी हो सकता है.इसका असर ख़ासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों पर अधिक होता है.ये वायरस छींक से निकली बूंदों, क़रीबी व्यक्तिगत संपर्क और वायरस से दूषित जगहों को छूने के बाद मुंह, नाक या आंखों को छूने से फैलता है.

क्या कहतें हैं चिकित्सक

एचएमपीवी को रोकने के लिए अभी कोई विशेष वैक्सीन नहीं है.इसलिए संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए और इससे बचे रहने के लिए तरीकों को अपना सकते हैं.अपने हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं.ऐसे व्यक्तियों से दूर रहें जिनमें श्वसन संबंधी बीमारी के लक्षण दिखें. बार-बार छूई जाने वाली सतहों, जैसे कि दरवाजे के हैंडल, फोन और काउंटरटॉप्स को साफ करते रहें.संक्रमण फैलने वाले या फ्लू के मौसम के दौरान मास्क पहनने से श्वसन बूंदों के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है. यदि आपमें कोई लक्षण हों तो टेस्ट कराएं और डॉक्टर से संपर्क करें.

फोटो 2

डा शिव कुमार,वरिष्ठ फिजिशियन एवं विभागाध्यक्ष टीबी एंड चेस्ट,एमजीएम, किशनगंजB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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