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Home बिहार किशनगंज राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: बच्चों के समग्र विकास और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: बच्चों के समग्र विकास और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव

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राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: बच्चों के समग्र विकास और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव

प्रतिनिधि, किशनगंज

किसी भी समाज की प्रगति का आधार उसके बच्चों का स्वस्थ और सशक्त होना होता है. लेकिन कृमि संक्रमण जैसी मौन समस्या बच्चों के शरीर और मस्तिष्क दोनों पर गहरा प्रभाव डालती है, जिससे उनका समुचित विकास बाधित हो जाता है. यह संक्रमण न केवल बच्चों को कुपोषण और कमजोरी की ओर ले जाता है, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता, ऊर्जा स्तर और दैनिक जीवन की सक्रियता को भी प्रभावित करता है. ऐसे में समय पर कृमिनाशक दवा देना बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रभावी और आवश्यक उपाय बन जाता है. इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है, जो स्वस्थ बचपन की दिशा में एक गंभीर और दूरगामी पहल है.जिले में 25 मार्च को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल दी जाएगी. इसके साथ ही 30 मार्च को मॉप-अप दिवस आयोजित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण अभियान से वंचित न रह जाए.

कृमि संक्रमण: अदृश्य खतरा, गहरा प्रभाव

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि कृमि संक्रमण एक ऐसी समस्या है, जो धीरे-धीरे बच्चों के शरीर को भीतर से कमजोर करती है. इसके कारण बच्चों में कुपोषण, एनीमिया (खून की कमी), पेट से जुड़ी समस्याएं, थकान और बार-बार बीमार पड़ने जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं. उन्होंने कहा कि यह संक्रमण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे वे सामान्य बीमारियों के प्रति भी अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. साथ ही इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ता है, बच्चों की एकाग्रता कम होती है, स्कूल में उपस्थिति घटती है और उनकी सीखने की क्षमता प्रभावित होती है. डॉ चौधरी ने स्पष्ट किया कि कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल इन सभी समस्याओं से बचाव का एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, जो बच्चों को स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

समन्वित प्रयासों से अभियान को मिलेगी मजबूती

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक तैयारी की गई है. इस अभियान में स्वास्थ्य, शिक्षा और आईसीडीएस विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि प्रत्येक बच्चे तक इस पहल का लाभ पहुँच सके.स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दवा दी जाएगी. साथ ही शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे न केवल दवा वितरण की प्रक्रिया को सही ढंग से संचालित करें, बल्कि अभिभावकों को भी इसके महत्व के प्रति जागरूक कर सकें.जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न संचार माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंच सके कि कृमि संक्रमण से बचाव संभव है और इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं.

अभिभावकों की भागीदारी: सफलता की कुंजी

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने सभी अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अभियान को गंभीरता से लें और निर्धारित तिथि को अपने बच्चों को कृमिनाशक दवा अवश्य दिलाएं. उन्होंने कहा कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है.उन्होंने यह भी कहा कि एक भी बच्चा यदि इस अभियान से छूट जाता है, तो संक्रमण का खतरा बना रहता है. इसलिए यह जरूरी है कि सभी अभिभावक अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, बेहतर शिक्षा और सशक्त भविष्य की दिशा में एक निर्णायक पहल है. यदि हम सभी मिलकर इसे सफल बनाते हैं, तो निश्चित रूप से एक स्वस्थ, जागरूक और सक्षम पीढ़ी का निर्माण संभव हो सकेगा.

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