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Home बिहार किशनगंज आजादी के 7 दशक बाद भी कच्ची है सड़क, हल्की बारिश में कीचड़ से लबालब हुआ गोबिंदपुर-डेंगा बस्ती मार्ग

आजादी के 7 दशक बाद भी कच्ची है सड़क, हल्की बारिश में कीचड़ से लबालब हुआ गोबिंदपुर-डेंगा बस्ती मार्ग

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आजादी के 7 दशक बाद भी कच्ची है सड़क, हल्की बारिश में कीचड़ से लबालब हुआ गोबिंदपुर-डेंगा बस्ती मार्ग
गोबिंदपुर से डेंगा बस्ती जाने वाली कच्ची सड़क

पौआखली से रणविजय की रिपोर्ट:

ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बनी एकमात्र मुख्य सड़क

एक तरफ जहाँ सरकार हर गाँव को पक्की सड़क से जोड़ने का दावा करती है, वहीं रसिया पंचायत के वार्ड संख्या 01 से सामने आई यह तस्वीर प्रशासनिक दावों की हकीकत बयां कर रही है. गोबिंदपुर से डेंगा बस्ती जाने वाली यह कच्ची सड़क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. मानसून की दस्तक से पहले हुई हल्की बारिश ने ही पूरी सड़क को कीचड़ से लबालब कर दिया है. हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों का इस मार्ग पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है.

आजादी के सात दशक बाद भी नहीं बदला गाँव का नसीब

गाँव की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों का कहना है कि देश को आज़ादी मिले सात दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इस सुदूर इलाके की सड़क का पक्कीकरण नहीं हो सका. हर साल बरसात के मौसम में यह पूरी सड़क जलजमाव और दलदल का रूप ले लेती है. इस वजह से राहगीर आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में होती है.

नेताओं और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं ग्रामीण

विकास की मुख्यधारा से महरूम ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है. लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे और वोट मांगने आने वाले नेता जीत दर्ज करते ही लापता हो जाते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने त्रिस्तरीय निकाय के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर क्षेत्र के विधायक और सांसद तक को कई बार इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद किसी ने भी इस इलाके की सुधि लेना ग्वारा नहीं किया.

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, जिलाधिकारी से गुहार

सड़क की बदहाली से तंग आकर अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और प्रखंड प्रशासन से अविलंब इस मार्ग के पक्कीकरण और निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गोबिंदपुर से डेंगा बस्ती मार्ग का पक्का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे लोग उग्र आंदोलन करने पर विवश हो जाएंगे. अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस बदहाल सड़क को लेकर कब जागते हैं, या फिर ग्रामीणों को यूं ही कीचड़ में चलने को मजबूर होना पड़ेगा.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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