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Home बिहार खगड़िया समाज में आघोषित रूप से शोषित होती रही है महिलाएं : डॉ रोशन रवि

समाज में आघोषित रूप से शोषित होती रही है महिलाएं : डॉ रोशन रवि

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समाज में आघोषित रूप से शोषित होती रही है महिलाएं : डॉ रोशन रवि

गोगरी. के.डी.एस. कॉलेज गोगरी में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्राचार्य डॉ. रोशन रवि की अध्यक्षता में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी के विविध आयाम विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. यह आयोजन एन एस एस के बैनर तले किया गया. जिसका संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ पंकज कुमार के द्वारा किया गया. प्राचार्य डॉ.रोशन रवि ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जैसा कि हम सभी जान रहे हैं कि प्राचीन काल से ही हमारे समाज में महिलाएं अघोषित रूप से शोषित होती रही है. महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को सुनिश्चित करना है तो इसके लिए जरूरी उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए तथा राजनीतिक रूप से जागरूक बनाया जाय, क्योंकि महिलाओं की सामाजिक भागीदारी के लिए संसाधन में उनकी आर्थिक हिस्सेदारी को सुनिश्चित किया जाना जरूरी है. महिलाओं की भागीदारी से समाजिक निर्णय में संवेदनशीलता आती है. आज का सामाजिक स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय में पुरुष के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी पर ही है. महिलाओं के सामाजिक उत्तरदायित्व को तय किया जा रहा है. गणित विभाग के विभागाध्यक्ष वैभव निकेत शांडिल्य ने नारी सम्मान की भावना को अपने अंदर समाहित करने की आवश्यकता की बात कही. दर्शनशास्त्र कि विभागाध्यक्ष डॉ वर्षा किरण ने कहा ये चिड़िया तुम गाओ बारम्बार, खेत में, गांव, में वन में, पत्थर हो चुके आदमी के मन में इन्होने सवाल खड़ा किया कि सिर्फ एक दिन ही क्यों ? हर दिन क्यों नही इतना सम्मान हम नारियों को दिया जाय. रेडिकल फैमिनिज्म पर अपनी बात रखते हुए अंग्रेजी विभाग कि विभागध्यक्ष डॉ वजीहा फातिमा ने कहा महिलाये पैदा नहीं होती उसे बना दीं जाती. अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ अजीत कुमार गौतम में कहा कि ये देवी देवियां एक ओर ये मां मेरी तुम एक ओर. एन एस एस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ पंकज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए महविद्यालय के प्रधान सहायक इंद्रदेव मंडल, सेविका मीरा देवी तथा साहेब मालिक के विशेष सहयोग को रेखांकित किया. साथ ही महाविद्यालय के सभी सहयोगियों को अपना सम्बल बताया और कहा कि उनके प्रत्यक्ष या परोक्ष सहयोग से ही यह कार्यक्रम सफल हो सका. जिसमें विद्यार्थियों द्वारा नाट्य मंचन, नृत्य, संगीत, भाषन प्रस्तुत किया गया. रेवती और उगन ने मंच संचालन किया.

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