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Home बिहार खगड़िया परबत्ता में रोजाना 1.29 लाख लीटर दूध का होता है उत्पादन, सिंथेटिक दूध का कारोबार भी खूब फल-फूल रहा

परबत्ता में रोजाना 1.29 लाख लीटर दूध का होता है उत्पादन, सिंथेटिक दूध का कारोबार भी खूब फल-फूल रहा

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परबत्ता में रोजाना 1.29 लाख लीटर दूध का होता है उत्पादन, सिंथेटिक दूध का कारोबार भी खूब फल-फूल रहा

परबत्ता. प्रखंड के चकप्रयाग गांव में सिंथेटिक दूध का मामला सामने आने के बाद अब तक इसे लेकर कोई ठोस कारवाई नहीं हो पाई है. जिसको लेकर आमलोगों में आक्रोश व्याप्त है. लोमगों का कहना है कि खगड़िया जिसे फरकिया के भी नाम से ही जना जाता है. यह पुरा क्षेत्र दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है. यदि फरकिया में सिंथेटिक या मिलावटी दूध का धंधा फल फूल रहा है तो गंभीर विषय है. विभाग को अविलंब रोक लगाने की जरूरत है.

क्या है मामला

बीते सोमवार को यह मामला उस वक्त सामने आया जब चकप्रयाग गांव के रहने वाले अनुज कुमार के यहां एक आयोजन था और उन्होंने परबत्ता स्थित जय मां दुर्गा बीएमसी सेंटर से करीब एक क्वींटल 20 किलो दूध खरीदा. जब दूध को गर्म किया तो इसका रंग बदलने लगा. घंटों तक आग पर पकाये जाने बाद दूध का खोवा निकाला गया तो उसका भी रंग अजीब था. यह देख घर वालों को हैरानी हुई और मिलावटी दूध का शक पक्का होने लग गया. हालांकि तभी आसपास के कई दूध संग्रहण करने वाले लोगों को बुलाया गया. जिसने तत्काल दूध का जांच किया तो कृत्रिम दूध बताया.

सिंथेटिक दूध मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

चिकित्कस डॉ. पवन कुमार ने बताया कि मिलावट दूध में पानी मिलाने से कहीं ज्यादा खतरनाक कृत्रिम तरीके से निर्मित किया जाता है. क्योंकि इस किस्म के मिलावटी दूध के सेवन से शारीरिक विकास में बाधा, आंखों की रोशनी जाना, पेट में अल्सर, कैंसर और नपुंसकता जैसी कई गंभीर एवं जानलेवा बीमारी हो सकती है. हालांकि पहले यह शहरों तक ही सीमित था, लेकिन खपत बढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी अब सिंथेटिक दूध का निर्माण बेधड़क किया जा रहा है.सिंथेटिक दूध निर्माण के कई अलग-अलग तरीके हैं, लेकिन मुख्य तौर पर दूध के सूखे पाउडर में ही कई तरह के केमिकल को मिलाकर इसे तैयार किया जता है और डिमांड के मुताबिक बजारों में इसे खपाया जाता है.

निगरानी तंत्र पर सवाल

खाद्य पदार्थ से जुड़े अनेतिक कार्यों पर नियंत्रण लगाने के लिए जिला में मौजूद तंत्र विफल नजर आ रहे हैं. हालांकी जिला के खाद्य संरक्षण पदाधिकारी ने इस मामले में उचित जांच बाद कारवाई का भरोसा दिलाया है. लेकिन, अभी तक पहल नहीं हो पाया है.मालूम हो कि एकमात्र पदाधिकारी के जिम्मे में अन्य तीन जिले भी हैं. ऐसे में खाद्य पदार्थों से जुड़े संवेदनशील इस मामले में क्या करवाई होगी यह तो भविष्य के गर्भ में है.

लोगों में जागरूकता का अभाव

जागरूकता हीं सिंथेटिक दुग्ध व्यवसाय पर लगाम लगाने का एक बड़ा जरिया है. ऐसे में सामाजिक संगठन को भी आगे आना होगा. देखा जाए तो बड़ी-बड़ी कंपिनयों के सेंटर लगभग हर एक गांव एवं टोलों में खुल चूके हैं. इन जगहों पर असली एवीएन नकली दूध की पहचान को लेकर तमाम तरह के अत्याधुनिक मशीन मौजूद हैं. इसके अलावे शादी ब्याह जैसे बड़े-बड़े आयोजनों में दूध दही का सीमित इस्तेमल करें तो इ कारोबारियों के हौसले पस्त हो सकते हैं.

दुग्ध शीतल केंद्र की समय-समय पर हो जांच

परबता प्रखंड में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े दुग्ध शीतल केंद्र स्थापित है. इनमें अमूल, सुधा, आईटीसी, कौशिकी, गंगा डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों के शीतल केंद्र हैं. किसान जयप्रकाश यादव व बमबम यादव ने बताया कि इन केंद्रों पर किसानों से संग्रहित दूध को इकट्ठा करने का प्रावधान है. लेकिन असली खेला यहीं से शुरू होता है. इन केंद्रों पर बिचौलियों हावी हैं. जो संचालक से मिलकर केंद्र की आड़ में सिंथेटिक दूध का डिमांड के हिसाब से स्थानीय बाजार में आसनी से खपा लेने में कामयाब हो जाते हैं. ग्राहकों को भी इन पर शक नहीं होता. बताया जाता है कि

परबत्ता प्रखंड में प्रतिदिन 1 लाख 29 हजार लीटर दूध का होता है उत्पादन

एक आंकड़े के मुताबिक प्रखंड में हर रोज करीब 1 लाख 29 हजार लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है. इनमें करीब 1 लाख लीटर दूध बड़े डेयरी के कंपनियां संग्रहित करती है. जबकि बांकी बचे दूध निजी स्तर पर व्यापारी को बेचा जाता है. किसानों से इकट्ठा कर आसपास के इलाकों में भेजते हैं. इसके अलावे बाजार में डिमांड के हिसाब से सिंथेटिक दूध का कारोबार भी धड़ल्ले से होता है.

दुग्ध उत्पादक किसानों के स्थिति आज भी दयनीय

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भले ही क्रांति आ गई हो,लेकिन बड़ी-बड़ी कंपनी का इसमें प्रवेश हो गया है. हकीकत यह है कि आज भी किसानों की स्थिति दयनीय है. डायरी कंपनी द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कई तरह के नियम बनाए गए हैं. मशीनों का भी ईजाद किया गया कि ताकि वाजिब मूल्य उनके बैंक खतों के जरिए सीधे उन तक पहुंच जाए. लेकिन धरातल पर यह टांय टांय फिस होता प्रतित हो रहा है. पशुपालक किसानों की माली हालात आज तक नहीं सुधार पायी है. कुछ कंपनी किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का दावा कर रही है.

कहते हैं पदाधिकारी

जिला खाद्य संरक्षण पदाधिकारी विरेन्द्र कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है. बताया कि आवेदन मिलने पर जांच के बाद दूध व्यवसायी पर कार्रवाई की जायेगी. बताया कि तीन जिला का प्रभार मिला है. किस किस जिले में जाकर कार्रवाई करूं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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