परबत्ता(खगड़िया) से पलटु झा की रिपोर्ट
Khagaria News: खगड़िया जिले में सरकारी आफिसों की कार्यसंस्कृति बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. नये जिलाधिकारी के एक सख्त आदेश ने पंचायत से लेकर ब्लांक स्तर तक के कर्मचारियों में हलचल बढ़ा दी है. अब सिर्फ आफिस पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि “फिंगर” लगाकर बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य होगा. सबसे अहम बात यह है कि कर्मचारियों का वेतन भी अब बायोमैट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा.
जिलाधिकारी के इस फैसले को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. पंचायत स्तर पर बुनियादी ढांचे की कमी को देखते हुए इसे लागू को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं.
DM का स्पष्ट आदेश, सभी स्तरों पर बायोमैट्रिक हाजिरी अनिवार्य
DM की ओर से जारी आदेश के अनुसार अनुमंडल, प्रखंड और पंचायत स्तर तक कार्यरत सभी सरकारी कर्मियों को बायोमैट्रिक प्रणाली से उपस्थिति दर्ज करनी होगी. आदेश में साफ कहा गया है कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया अब बायोमैट्रिक उपस्थिति से जुड़ी रहेगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य कार्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और आम लोगों को समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है. लंबे समय से पंचायत कार्यालयों में कर्मियों की अनुपस्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं. ऐसे में प्रशासन का यह कदम व्यवस्था सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है.
खराब मशीनें तुरंत ठीक कराने का निर्देश
DM ने उन कार्यालयों के लिए भी स्पष्ट निर्देश जारी किया है, जहां पहले से बायोमैट्रिक मशीनें लगी हुई हैं लेकिन तकनीकी कारणों से बंद पड़ी हैं.
आदेश के मुताबिक ऐसी सभी मशीनों को तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा. वहीं जिन कार्यालयों में अब तक बायोमैट्रिक मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां निर्धारित समयसीमा के भीतर नई मशीन खरीदकर स्थापित करनी होगी. पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरीय उप समाहर्ता कौशिकी कश्यप को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है.
पंचायत सरकार भवन अधूरा, जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां
प्रशासन के इस फैसले के सामने व्यावहारिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं. परबत्ता प्रखंड की देवरी, लगार, माधवपुर, तेमथा करारी, खीराडीह और पिपरा लतीफ समेत कई पंचायतों में आज भी पंचायत सरकार भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन पंचायतों के पास स्थायी कार्यालय भवन ही नहीं है, वहां बायोमैट्रिक मशीनें कहां स्थापित की जाएंगी.
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Khagaria News: आम लोगों को क्या होगा फायदा?
यदि इस आदेश का सख्ती से पालन हुआ तो पंचायत कार्यालयों में कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित हो सकती है. इसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिलेगा.
खगड़िया प्रशासन का यह फैसला सरकारी तंत्र में अनुशासन लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पंचायत स्तर पर मौजूद बुनियादी समस्याओं को कितनी जल्दी दूर किया जाता है. फिलहाल जिले के पंचायत कर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बीच इस आदेश को लेकर चर्चा तेज है और सभी की नजर इसके जमीनी क्रियान्वयन पर टिकी हुई है.
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