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Home बिहार खगड़िया थाने में रखने की व्यवस्था नहीं, जंग खा रहे सैकड़ों वाहन

थाने में रखने की व्यवस्था नहीं, जंग खा रहे सैकड़ों वाहन

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थाने में रखने की व्यवस्था नहीं, जंग खा रहे सैकड़ों वाहन

थानों के पास जब्त वाहनों को रखने की नहीं है समुचित व्यवस्था जंग खा रहीं गाड़ियां, वाहनों पर उग आये पौधे कानूनी पेच के कारण थानों से नहीं ले जा रहे वाहन, नहीं हो रही नीलामी —— फोटो-11 : कैप्सन : अलौली थाना में जब्त वाहनों पर उगे पौधे. फोटो-12 : कैप्सन : परबत्ता थाना में जब्त वाहन हो गये कबाड़. ————— प्रतिनिधि, खगड़िया जिले के विभिन्न थाने व ओपी में जब्त वाहन कानूनी पेच के कारण धूल फांक रहे हैं. करोड़ों रुपये की गाड़ियां खस्ता हाल हैं. जब्त वाहन मालिक अपनी गाड़ी को पहचान भी नहीं सकते. जिले के थानों में जब्त वाहन खुले आसमान के नीचे रखे हैं. इनमें जंग लग रहे हैं. इस कारण अधिकांश जब्त वाहन कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं. जो बचे हैं वे कबाड़ बनने की स्थिति में पहुंच गये हैं. हालांकि पुलिस महकमा चाहे, तो जब्त संपत्ति बेच कर करोड़ों का राजस्व प्राप्त किया जा सकता था. मगर आज उस वाहन की कीमत बाजार में कौड़ी की भी नहीं रह गयी है. हजारों-लाखों में खरीदी गयीं गाड़ियां अब कबाड़ में भी बिकने लायक नहीं बची हैं. थाने में रख-रखाव की समुचित व्यवस्था नहीं धूप हो या बारिश जब्त वाहन खुले आसमान तले रखे जा रहे हैं. इस कारण वाहनों में जंग लग गये हैं और इन पर पौधे उग आये हैं. बताया जाता है कि लावारिस वाहनों को एक निश्चित समय सीमा के अंदर नीलाम करने का प्रावधान है. लेकिन नीलामी नहीं होने की वजह से थानों में रखी गाड़ियां रखरखाव के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो गयी हैं. क्योंकि थानों में जब्त वाहनों को रखने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. थाने में दो-चार साल रहने के बाद वाहनों का कबाड़ बनना निश्चित है. दो-चार साल बाद अगर न्यायालय से जब्त वाहनों को ले जाने का आदेश मिलता है और लोग गाड़ियों को ले जाने थाने पहुंचते हैं, तो गाड़ियों की स्थिति देख कर वहीं छोड़ देते हैं. कुछ वाहन मालिक ऐसे भी होते हैं, जो न्यायालय के आदेश से अपना वाहन वापस ले जाते हैं, लेकिन बेनामी और लावारिस वाहन जंग खाने के लिए खड़े रह जाते हैं. गाड़ी के रजिस्ट्रेशन व चेचिस नंबर का भी मिलान करना अब संभव नहीं बताया जाता है कि जिले में नगर थाना, चित्रगुप्त नगर थाना, मुफस्सिल थाना, गंगौर ओपी, बहादुपुर ओपी, अमौसी ओपी, मोरकारही थाना, अलौली थाना, मानसी थाना, परबत्ता थाना, पसराहा थाना, महेशखूंट थाना, मड़ैया थाना, बेलदौर थाना सहित गोगरी थाना में सैकड़ों वाहन जब्त हैं. उक्त थाना में जब्त मोटरसाइकिल, स्कूटी, ट्रैक्टर, ट्रक, बस, जेसीबी व ई-रिक्शा जब्त हैं. बताया जाता है कि इनमें लावारिस वाहन, जब्त वाहन, बेनामी वाहन आदि वाहन कानूनी पेच के कारण रखा हुआ है. पुलिस के पास सटीक जानकारी नहीं है कि जिले में कितने वाहन जब्त हैं और कब से कौन वाहन हैं. स्थिति देख कर आपको खुद अंदाजा लग जायेगा कि कितने वर्षों से यहां वाहन पड़े हैं. संख्या तभी बता पायेंगे, जब कांड से संबंधित सीजर अथवा मालखाना रजिस्टर से मिलान किया जायेगा. वाहनों की स्थिति देखने से लगता है कि रजिस्ट्रेशन नंबर और चेचिस नंबर का भी मिलान करना संभव नहीं होगा. क्या हैं नीलामी के नियम बताया जाता है कि नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन की छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है. वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है. बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है. न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपका कर या समाचार पत्रों के माध्यम से उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने का प्रावधान है, ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सकें. लेकिन जटिल प्रक्रिया होने की वजह से कोई भी थानाध्यक्ष नीलामी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता है. दो साल से वाहनों की नहीं हुई है नीलामी जिले के विभिन्न थानों में जब्त वाहनों की नीलामी बीते दो साल से नहीं हुई है. इस कारण गाड़ियां कबाड़ बन चुकी हैं. जिले में एक दर्जन से अधिक थाने हैं. हर थाने में जब्त वाहनों की संख्या लगभग 30 से 50 है. बताया जाता है कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद जब्त वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई थाने तो ऐसे हैं, जहां इन वाहनों को रखने तक की जगह नहीं बची है. कई थाने में जब्त वाहन पूरी तरह से कबाड़ बन चुके हैं. शहर के नगर थाना, चित्रगुप्त नगर थाना, मुफस्सिल थाना परिसर में चारों ओर इधर-उधर दोपहिया वाहन पड़े हुए थे. इसमें बहुत से वाहनों पर झाड़-पात उग गये हैं. सभी वाहनों को जंग खा रहे हैं. जबकि अधिकांश मोटरसाइकिल जंग खा चुकी है. कहते हैं थानाध्यक्ष मोरकाही थानाध्यक्ष विजय कुमार सहनी ने बताया कि जब्त वाहनों की संख्या लगभग 52 है. दो दिन पहले भी ट्रैक्टर की जमानत करवाकर ले गये हैं. व्यवस्था नहीं रहने के कारण गाड़ियों में जंग लग रहे हैं. थाना परिसर में रखे जब्त वाहनों को नीलाम करने की एक कानूनी प्रक्रिया है.

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