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Home बिहार खगड़िया नौ दिनों तक पंचखुट्टी काली मंदिर प्रांगण में बहेगी भक्ति की सरिता

नौ दिनों तक पंचखुट्टी काली मंदिर प्रांगण में बहेगी भक्ति की सरिता

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नौ दिनों तक पंचखुट्टी काली मंदिर प्रांगण में बहेगी भक्ति की सरिता

परबत्ता. प्रखंड के दरियापुर भेलवा पंचायत के नयागांव पंचखुट्टी काली मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय राम कथा महोत्सव रविवार को कलश शोभायात्रा यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ. अयोध्या से पहुंचे कथा वाचिका निशु भारद्वाज गोपी महाराज ने कथा के प्रथम दिन रामचरितमानस में तुलसीदास द्वारा राम नाम की महिमा का बखान किया. उन्होंने कहा कि राम नाम के दो अक्षर में ही पूरी रामायण है. पूरा शास्त्र है. पुराणों में लिखा है कि ज्ञान, कर्म, ध्यान, योग, तप आदि सभी कलयुग में व्यर्थ सिद्ध होंगे. परंतु राम नाम का जप ही लोगों को भवसागर से पार ले जाने वाला सिद्ध होगा. वेद, पुराण और अन्य शास्त्रों से भी बढ़कर है दो अक्षरों वाला राम का नाम. रामचरित मानस में तुलसीदासजी ने राम नाम की महिमा का वर्णन किये हैं. प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए नीशु भारद्वाज ने कहा कि रामसेतु के निर्माण के समय हर पत्थर पर राम नाम लिखा जा रहा था. हर कोई राम नाम का जयघोष कर रहा था. जिसके चलते राम का काम बहुत ही आसान हो गया. राम के नाम लिखे पत्थर जब तैरने लगे तो प्रभु श्रीराम भी आश्चर्य में पड़ कर सोचने लगे. उन्होंने सोचा की जब मेरे नाम लिखे पत्थर तैरने लगे हैं. तो यदि मैं कोई पत्थर फेंकता हूं समुद्र में तो उसे तैरना चाहिए. मन में यही विचार करके उन्होंने भी एक पत्थर उठा लिया. जिस पर राम का नाम नहीं लिखा था. उसे समुद्र में फेंक दिया. लेकिन वह पत्थर पानी में डूब गया. भगवान श्री राम आश्चर्य में पड़ गए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ. दूर खड़े हनुमान ने यह सब देख रहे थे. तब उन्होंने प्रभु श्रीराम के मन की बात जानकर उनके पास पहुंचे. कहने लगे कि हे प्रभु. आप किस दुविधा में हैं. इस पर श्री राम जी कहने लगे कि हे हनुमान. मेरे नाम के पत्थर तैर रहे हैं. लेकिन जब मैंने अपने हाथ से वह पत्थर फेंका तो वह डूब गया. प्रभु की इस भोलेपन से कही गई बात पर बल बुद्धि के दाता हनुमानजी ने कहा कि हे प्रभु. आपके नाम को धारण कर तो सभी अपने जीवन को पार लगा सकते हैं. परंतु जिसे आप स्वयं त्याग रहे हैं. उसे डूबने से कोई कैसे बचा सकता है. राम के नाम में इतनी शक्ति है कि उनके नाम का जप करते हुए ऋषि बाल्मीकि और संत तुलसीदास महान ज्ञानी बन गये. उसके बाद उन्होंने रामायण और रामचरितमानस ग्रंथों की रचना की. सोमवार को शिव विवाह प्रसंग पर चर्चा हुई. बीच बीच में भक्ति संगीत सुनकर श्रोतागण भावविभोर हो उठें.

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