[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार कटिहार बाला लखेन्दर को अपने प्रभाव से विषहरी ने दिलायी थी जीवनदान

बाला लखेन्दर को अपने प्रभाव से विषहरी ने दिलायी थी जीवनदान

0
बाला लखेन्दर को अपने प्रभाव से विषहरी ने दिलायी थी जीवनदान

– सिरसा पुराना टोला में तीन दिनों तक विषहरी की प्रतिमा स्थापित कर भक्तिपूर्ण माहौल में हुई पूजा अर्चना – 13 को भक्तिभाव से होगा विसर्जन, बांग्ला में पाठ के दौरान एक दूसरे से लड़ते नजर आये भक्त कटिहार दलन पूरब पंचायत के सिरसा पुराना टोला में विषहरी पूजा का आयोजन धूमधाम से शुरू किया गया. माता विषहरी के महिमा मंडन के लिए हसनगंज प्रखंड के कालसर से आये पन्द्रह सदस्यीय बांग्ला कीर्तन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक भक्ति व उनकी महिमा को बखान कर भक्तों के बीच उल्लास भर दिया. विषहरी पूजा राजू सदा के आवास परिसर में आयोजन किया गया. पहले दिन जहां पूजा अर्चना की गयी. दूसरे दिन माता विषहरी के समक्ष चंदू सौदागर के पुत्र बाला लखेन्दर को जीवन दान देने की कथा से बांग्ला में अवगत कराया. कालसर से आये सभी पन्द्रह सदस्यों द्वारा बांग्ला में बाला लखेन्दर व विषहरी की महिमा को नाचगाकर जीवंत उदाहरण पेश किया. भक्तों ने पाठ करने के दौरान बताया कि चंदू सौदागर के पुत्र बाला लखेन्दर को सांप डस लेता है. विषहरी बाला लखेन्दर की पत्नी थी. सांप काटने के बाद बाला लखेन्दर को पानी में भसा दिया गया. उस दौरान विषहरी भी अपने पति के साथ रही. अपने प्रभाव से उसने बाला लखेन्दर को जीवित कराया. तब से माता विषहरी की पूजा भक्तिभाव से उनलोगों के समाज में की जाती रही है. तीन दिवसीय विषहरी पूजा अर्चना के दौरान आसपड़ोस के सैकड़ों लोगों ने भक्तिभाव से माता विषहरी की पूजा में भाग लेकर मन्नते मांगी. फुलाई सदा, राजू सदा, राहुल कुमार, मुकेश कुमार, अनिता देवी, नेहा कुमारी, निशा कुमारी समेत अन्य ने बताया कि विषहरी पूजा वषों से की जा रही है. कभी उनके दादा, परदादा द्वारा की जाती थी. अब उनके व उनके पुत्रों द्वारा इस पूजा प्रतिमा स्थापित कर निर्वाहन किया जाता है. माता विषहरी की महिमा को लेकर सभी भक्त बताते हैं कि इनकी पूजा अर्चना से उनकी मन्नते पूरी होती है. इतना ही नहीं आस पड़ोस के लोगों की भीड़ काफी होती है. हर वर्ष किसी किसी की माता विषहरी मनोकामनाएं पूर्ण करती है. ऐसा समाज के लोगों का भी मानना है. कालसर से आये पन्द्रह सदस्यीय कलाकार मंडलियों का कहना था कि माता विषहरी की महिमा अपरमपार है. उनकी कथाओं को लेकर विस्तार पूर्वक कभी नाच गाकर तो कभी एक दूसरे में लड़कर बाला लखेन्दर के पाठ को अंजाम दिया. राहुल कुमार, मुकेश कुमार, नेहा कुमारी व निशा कुमारी ने बताया कि प्रतिमा का विसर्जन 13 अगस्त को धूमधाम से किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel