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Home बिहार कटिहार मनिहारी के तीन भाई-बहन हैं पुरस्कृत शिक्षक-शिक्षिकाएं

मनिहारी के तीन भाई-बहन हैं पुरस्कृत शिक्षक-शिक्षिकाएं

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मनिहारी के तीन भाई-बहन हैं पुरस्कृत शिक्षक-शिक्षिकाएं

राजेश कुमार सिंह, मनिहारी. मनिहारी के नवाबगंज में काली प्रसाद पॉल व यशोदा देवी का परिवार शिक्षकों का परिवार है. इनके परिवार को विविध रिकॉर्ड होल्डर्स का भी परिवार कहा जाता है. काली प्रसाद पाॅल एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर हैं. उनके पुत्र डॉ सदानंद पॉल, पुत्री स्वर्णलता और अर्चना कुमारी शिक्षक हैं. कोविड काल वर्ष 2020 में बिहार सरकार के राजकीय शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत डॉ सदानंद पॉल उच्च माध्यमिक विद्यालय, बौलिया में हिंदी अध्यापक हैं. स्वर्णलता को भी पिछले वर्ष राजकीय शिक्षक पुरस्कार मिला था. अर्चना कुमारी भी रिकार्ड होल्डर हैं.

डाॅ सदानंद पाॅल को 2020 में मिला था राजकीय शिक्षक पुरस्कार

राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर से विद्या वाचस्पति से सम्मानित सदानंद पॉल की बायोग्राफी पटना यूनिवर्सिटी के एक पीएचडी थीसिस में शामिल है. उन्होंने हिंदी का पहला ध्वनि व्याकरण लिखा. इसमें हिंदी शब्द श्री को दो करोड़ से अधिक तरीकों से लिखा. इसे बिहार राष्ट्रभाषा परिषद ने सम्मानित किया. अयोध्या 2024 के लिए उन्होंने राम शब्द को एक करोड़ से अधिक विविध तरीकों से लिखा. राष्ट्रगान को गणितीय संकेतों में लिखने वाले पहले व्यक्ति तथा बांग्ला लेखक बनफूल की हिंदी जीवनी लिखने के कारण उन्हें हिंदी विकिपीडिया में स्थान मिला. उनकी पुस्तक लव इन डार्विन से महानायक अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म भूतनाथ रिटर्न्स प्रेरित है. लोकगाथाओं पर आधारित उनकी हिंदी पुस्तक पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद बेहद लोकप्रिय और अनुकरणीय है. जो देश और विदेश के कुछ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल होने जा रही है. इस पुस्तक पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने फेलोशिप भी प्रदान की है. उसने छात्रहित में सैकड़ों यूनिक गणितीय सूत्र भी बनाये हैं. एक गणितीय प्रश्न का 5,124 तरीकों से हल बताया है. यह प्रश्न पुस्तक गणित डायरी में प्रकाशित है. उन्हें महान वैज्ञानिक प्रो स्टीफेन हॉकिंग, रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष रहे नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ वी रामकृष्णन सहित यूनिवर्सिटी ऑफ केरल आदि ने इन उपलब्धियों की सराहना किया है. दुनिया का सबसे बड़ा स्वदेशी सुडोकू गणित खेल पहेली सदानंदकु बनाया है. जिसमें सामान्य सुडोकू के 9 ग्रिड की तुलना में 81 ग्रिड है. दुनिया की सबसे बड़ी गणित पहेली शृंखला अटकू का निर्माण किया. इसकी संख्या 6001 है. इसमें अद्वितीय पहेलियां शामिल हैं. अटकू गणित पहेली बनाने पर छात्रों को प्रतिवर्ष 11,111 रुपये का विशेष अटकू गणित पहेली पुरस्कार दिया जा रहा है. वे रेखाचित्र बनाने की कला को छात्रों को सिखाते हैं. मेकिंग इंडिया ने मिस्टर इनसाइक्लोपीडिया की उपाधि से सम्मानित किया. बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सबसे प्रतिभाशाली एशियाई कहा. डॉ सदानंद पाल की तीन दर्जन से अधिक हिंदी पुस्तकें मौलिक और संकलित रूप से प्रकाशित है. उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सहित कई रिकॉर्ड्स बुक में दर्ज है तथा उन्हें राष्ट्रपति के द्वारा नेशनल अवार्ड भी मिला है.

शिक्षिका स्वर्णलता को 2023 में मिला था राजकीय शिक्षक पुरस्कार

काली प्रसाद पाॅल की पुत्री स्वर्णलता को वर्ष 2023 में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने राजकीय शिक्षक पुरस्कार दिया था. शिक्षिका के साथ-साथ एक सदाबहार लेखिका, कवयित्री और कलाकार भी हैं. वे कन्या मध्य विद्यालय अमदाबाद में पदस्थापित हैं. उनकी पहली कविता मात्र 9 वर्ष की अल्पायु में प्रकाशित हुई थी. शिक्षा प्रसार के अतिरिक्त नारीवादी समस्याओं सहित शोषितों, वंचितों और पिछड़ों की समस्याओं के लिए समर्पित स्वर्णलता की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं. जिनमें कविता संग्रह लिए ये उदास चेहरे, संपादन लिए बावन लघुकथाएं, कविता संकलन लिए कोसी की नई जमीन इत्यादि शामिल हैं. आदिवासी की महाश्वेता शीघ्र प्रकाश्य शोध पुस्तक है. स्वर्णलता की रचनाएं हंस, आजकल, गगनांचल, फॉरवर्ड प्रेस, आंबेडकर इन इंडिया, युद्धरत आम आदमी, संवदिया, नव बिहार, भूचाल, चेतांशी, मंडल विचार, शुक्रवार, तापमान, हिंदी सहित्यपीडिया, प्रतिलिपि, जय विजय, मैसेंजर ऑफ आर्ट, प्रभात खबर समेत अन्य अखबार सहित सर्व शिक्षा की पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं. माटी से निर्मित पुतला कला की सुयोग्य कलाकार है. उनकी कविता ये उदास चेहरे न सिर्फ कई भाषाओं में अनूदित हैं, अपितु कई पत्रिकाओं में यह प्रकाशित हुई है, तो इस शीर्षक नाम से पुस्तक भी प्रकाशित है, जो कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अभिन्न उपलब्धि लिए दर्ज हैं. जननायक कर्पूरी ठाकुर की याद में नामक कविता को बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पीके शाही ने खूब तारीफ किया था. अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के तौर पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् कविता पुरस्कार प्राप्त करने वाली स्वर्णलता बिहार की एकमात्र कवयित्री है. वे बिहार के शिक्षा मंत्री से सबसे कम उम्र में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार, बिहार सरकार के राजभाषा पांडुलिपि प्रकाशन अनुदान पुरस्कार, महाकवि नागार्जुन ट्रस्ट से राष्ट्रीय कबीर पुरस्कार, मधुबनी से, भारतीय लाल दियारा पर्यटन साहित्य कला परिषद, भागलपुर का दियारा महोत्सव सम्मान पत्र उन्हें प्राप्त है.

शिक्षिका अर्चना को भी मिले हैं कई सम्मान

कन्या मध्य विद्यालय, मनिहारी में शिक्षिका अर्चना कुमारी के बारे में कई जनरल नॉलेज संस्थानों ने प्रश्नोत्तरी बनाये हैं. अर्चना कुमारी परामर्शी कक्षाएं भी लेती हैं. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के कारण इंटरनेशनल लीडर्स अवार्ड संस्था द्वारा बेस्ट टीचर फॉर द कॉन्ट्रिब्यूशन इन द फील्ड ऑफ एजुकेशन 2023 की उन्हें प्राप्ति हुई थी. बिहार उर्दू निदेशालय के निदेशक के हाथों उर्दू शिक्षण में सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर चुकी है. ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली अर्चना कुमारी कटिहार जिले की पहली हिंदीभाषी शिक्षिका हैं. बच्चियों को माहवारी के बारे सही शिक्षा देना, फिर दहेज और बालविवाह के विरुद्ध कई मुहिम में शामिल हुई हैं. उनकी कई कविताएं इस बारे में हैं. इनका नाम केंद्रीय सूचना आयोग, नयी दिल्ली में द्वितीय अपील संबंधी केस जीतने वाली भारत की पहली महिला के रूप में ली जाती है. अर्चना कुमारी की शिक्षा विज्ञान स्नातक के साथ-साथ दो विषयों इतिहास और ग्रामीण प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि लिए है. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकार्ड्स, मार्वेलस वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, असिस्ट वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, इंडियन टैलेंट्स सिंगापुर इत्यादि में उनके नाम दर्ज है. उन्हें किलकारी अवार्ड 2018 भी प्राप्त है. ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रम पब्लिक स्पीक”””””””” में उनकी भागीदारी रही है. वे भारत के सबसे युवा महिला ग्राम कचहरी सचिव सहित बिहार की पहली महिला ग्राम कचहरी सचिव भी रही हैं. सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त अबूझ चित्र लिपि के पठन को लेकर वे अभी रिसर्च कर रही है. वे पौधरोपण अभियान चला रही है. पौधे लगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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