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फलका की महिलाएं मधुमक्खी पालन कर संवार रहीं अपनी जिंदगी

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फलका की महिलाएं मधुमक्खी पालन कर संवार रहीं अपनी जिंदगी

अली अहमद, फलका

आज की आधी आबादी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. जिले के फलका प्रखंड के दो गांव भंगहा और बेचूटोला गांव की दो दर्जन भर महिलाएं संयुक्त रूप से दो समूह में मधुमक्खी पालन कर रही हैं. इससे अपनी जिंदगी को बेहतर बना रही हैं. इन महिलाओं से शहद खरीदने के लिए एक बड़ी कंपनी से समझौता की बात भी चल रही है. फलका प्रखंड के भंगहा और सोहथा दक्षिण पंचायत के बेचूटोला गांव में महिलाएं अपने हाथों से अपनी किस्मत बदल रही हैं. इसका जरिया बन रहा है मधुमक्खी पालन. जो शहद ये महिलाएं बना रही हैं वो स्वाद में ही नहीं, बल्कि इनकी जिंदगी में भी मिठास घोल रहा है. शहद उत्पादन के जरिए महिलाओं की आमदनी हो रही है और वो आत्मनिर्भर बन रही हैं.

मधुमक्खी पालन से बेहतर हो रही जिंदगी

जिले के भंगहा और बेचूटोला गांव की महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर रही हैं. बल्कि खुद के और अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी के सपने को भी संवार रही हैं. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली भंगहा और बेचूटोला गांव की जीविका दीदी शहद उत्पादन में जुटी हैं. मधुमक्खी पालन कर ये महिलाएं आर्थिक रूप से सबल बन रही हैं. समाज की प्रगति में अपना योगदान भी दे रही हैं.

मदद की है

भंगहा गांव से पश्चिम एक लीची बागान में शहद उत्पादन कर रही गणेश जी जीविका समूह की जीविका दीदी मुन्नी देवी, नीतू देवी, रंजू कुमारी, रेणु देवी, विणा देवी, अनिता देवी, दीपा कुमारी, शोभा देवी आदि ने बताया कि तीन फरवरी 2024 को दो समूह को प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बागवानी मिशन एवं जीविका के संयुक्त तत्वावधान में जीविका दीदियों प्रशिक्षित किया गया है. प्रशिक्षण के बाद हर महिला को मधुमक्खी पालन वाले ऐसे 10 बॉक्स दिए गए हैं. हालांकि इस मामले में इन महिलाओं को और भी मदद की दरकार है. महिलाओं का कहना है हाल में 50 केजी शहद जमा हुआ है. लेकिन बाजार नहीं मिल पाया है. जिस कारण थोड़ी दिक्कत आ रही है.

जल्द मिल जायेगा बाजार

बीपीएम प्रीती कुमारी ने बताया कि दो गांव भंगहा और बेचूटोला गांव की दीदी को यह अवसर मिला है और बेहतर कर भी रही हैं. बहुत जल्द बाजार भी मिल जायेगा. गुड न्यूज ये है कि जीविका और एक बड़ी कंपनी के बीच समझौता की बात चल रही है. अगर समझौता होती है तो इसके तहत बड़ी कंपनी इन महिलाओं से शहद खरीदेगी. मतलब ये कि शहद बेचने के लिए इन्हें बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने बताया कि फिलहाल दो गांव की 20 महिलाएं इस काम में लगी हैं. उम्मीद है कि इनसे प्रभावित होकर जल्द ही और भी महिलाएं शहद उत्पादन से अपने और अपने परिवार भविष्य को संवारने में सफल होंगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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