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Home बिहार कटिहार अलविदा 2025: अधर में लटका रहा महानंदा बेसिन टू तटबंध निर्माण परियोजना

अलविदा 2025: अधर में लटका रहा महानंदा बेसिन टू तटबंध निर्माण परियोजना

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अलविदा 2025: अधर में लटका रहा महानंदा बेसिन टू तटबंध निर्माण परियोजना

– उच्च स्तरीय जांच टीम की स्थलीय जांच के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम कटिहार जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले नये वर्ष के स्वागत को लेकर तरह-तरह की प्लानिंग चल रही है. दूसरी तरफ वर्ष 2025 की विदाई की घड़ी भी अब नजदीक आ गयी है. यानी पांच दिन बाद यह साल विदा हो जायेगा तथा नये वर्ष का स्वागत किया जायेगा. नये साल के स्वागत की तैयारी के बीच तरह तरह की चर्चाएं भी रही है. दरअसल इस साल कुछ परियोजना तो पूरी हुई है. पर अभी भी कई परियोजना को जमीन पर उतारना बाकी है. इन्हीं परियोजना में एक महत्वपूर्ण परियोजना महानंदा बेसिन फेज टू है. इस परियोजना की शुरुआत पिछले वर्ष ही होनी थी. पर अबतक अधर में लटका रहा है. माना जा रहा था कि उच्च स्तरीय जांच टीम के स्थलीय जांच के बाद इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू हो सकती थी. पर अब तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ है. जबकि यह साल भी अब विदा होने के कगार पर है. उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के तहत महानंदा नदी के दोनों तरफ तटबंध निर्माण किया जाना है. महानंदा बेसिन फेज टू के तहत बांध निर्माण की प्रक्रिया वर्षों से चल रही है. इस तटबंध निर्माण को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. तब निर्माण के विरोध में स्वर उठने लगे. तब इसके बाद बड़ी तादाद में लोगों ने तटबंध निर्माण के पक्ष में भी खड़ा हो गया. स्थानीय बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कटिहार एवं जिला प्रशासन के अनुसार कटिहार जिले के कदवा अंचल में भूमि अधिकरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. विशेषज्ञ की टीम ने किया था स्थलीय जांच जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जल संसाधन मंत्री गत पांच फरवरी 2023 को कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत दिघरी में आये थे. तब कदवा के तत्कालीन विधायक डॉ शकील अहमद खान व बलरामपुर के तत्कालीन विधायक महबूब आलम आदि ने मुख्यमंत्री व जल संसाधन मंत्री से मिलकर महानंदा फेज टू के तहत बनने वाले तटबंध का निर्माण कार्य को रोकने की मांग की थी तथा उच्च स्तरीय जांच टीम भेजने का आग्रह किया था. बताया जाता है कि उसी समय उच्च स्तरीय टीम भेजने का भरोसा दिया गया था. इसके बाद भूअर्जन के विरुद्ध भूस्वामी को दिये जानेवाली मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया. इस बीच दो बार उच्च स्तरीय जांच टीम ने स्थल निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों से बातचीत की. अभी हाल ही में एक उच्च स्तरीय जांच टीम ने स्थलीय निरीक्षण व लोगों से बातचीत करके पटना लौट गये थे. उसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही सरकार कोई निर्णय लेगी व तटबंध निर्माण का काम शुरू होगा. पर ऐसा नहीं हुआ. 436 करोड़ की लागत से परियोजना होगी पूरी जानकारी के मुताबिक कटिहार के झौआ से किशनगंज के कुट्टी घाट तक 66.23 किलोमीटर महानंदा दायां तटबंध तथा कुट्टी घाट से बागडोब तक 46.01 किलोमीटर तक महानंदा बायां तटबंध निर्माण होगा. जबकि कटिहार के नागर नदी में 20 किलोमीटर तक दांया तटबंध का निर्माण कराया जायेगा. जबकि किशनगंज और अररिया में रतुआ नदी के दोनों तरफ 33-33 किलोमीटर दायां व बायां तटबंध का निर्माण होगा. यानी इस फेज में महानंदा, नागर व रतुआ नदी पर 198 किलोमीटर तटबंध का निर्माण 436 करोड़ की लागत से कराया जायेगा. भूअर्जन की राशि शामिल नहीं किया जायेगा. महानंदा फेज टू के तहत महानंदा नदी पर कटिहार के झौआ से किशनगंज के कुट्टी घाट तक दोनों तरफ तटबंध का निर्माण किया जाना है. जिसमें कटिहार के एक अंचल कदवा में 160 एकड़, पूर्णिया के तीन अंचल अमौर, बायसी और बैसा में 331 एकड़ और किशनगंज के कोचाधामन अंचल में 84 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है. भू अर्जन विभाग द्वारा संबंधित जिला में भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रक्रिया लगभग पूरी की जा चुकी है. कटिहार में भूस्वामी को अब सिर्फ मुआवजा राशि दिया जाना है. तटबंध निर्माण के पक्ष व विरोध में खड़े है लोग महानंदा बेसिन बेसिन टू के तहत बनने वाले तटबंध के पक्ष व विरोध में यहां के लोग खड़े है. मौजूदा महानंदा तटबंध के भीतर रहने वाले लोग व आसपास के लोगों की भावनाओं को लेकर तत्कालीन कदवा विधायक डॉ शकील अहमद खान व तत्कालीन बलरामपुर विधायक महबूब आलम व स्थानीय कुछ नेता, समाजिक कार्यकर्ताा प्रस्तावित तटबंध निर्माण के विरोध में खड़े है. तटबंध के बाहर के लोग बड़ी संख्या में तटबंध निर्माण के पक्ष में मुहिम चला रही है. तटबंध निर्माण का विरोध करने वालों का अपना लॉजिक है. तटबंध निर्माण के पक्ष में खड़े लोगों का अपना तर्क है. जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने अध्ययन करने के बाद ही महानंदा बेसिन टू तटबंध निर्माण को लेकर कार्य योजना तैयार किया है. उसके बाबजूद तटबंध निर्माण पर रोक समझ से परे है.

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