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Home बिहार कटिहार सीएम के आने की खबर पर चमका था पुराना टोल, अब लाखों खर्च के बाद भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर 500 ग्रामीण

सीएम के आने की खबर पर चमका था पुराना टोल, अब लाखों खर्च के बाद भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर 500 ग्रामीण

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सीएम के आने की खबर पर चमका था पुराना टोल, अब लाखों खर्च के बाद भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर 500 ग्रामीण
जलजमाव

Purba Panchayat: कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट: कटिहार जिले के दलन पूरब पंचायत अंतर्गत आने वाले महादलित (एससी व एसटी) बहुल ‘पुराना टोल’ में सरकार की विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है. करीब 7-8 साल पहले मुख्यमंत्री के आगमन की सिर्फ एक प्रशासनिक सूचना पर जिस टोले में आनन-फानन में लाखों रुपये की लागत से बुनियादी सुविधाएं खड़ी की गई थीं, आज वह पूरा इलाका बदहाली के आंसू रो रहा है. जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यहाँ के करीब 500 से अधिक लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं.

सीएम के ‘आगमन ब्रेक’ से थमा विकास, आंधी-बारिश में घरों में घुसता है पानी

स्थानीय बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि वर्ष 2018-19 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस वार्ड में आने की आधिकारिक सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के आला अधिकारी करीब 4 से 5 दिनों तक इसी प्लॉट पर कैंप कर तैयारियों में जुट गए थे.

  • दिखाया गया था भारी विकास: मनरेगा योजना के तहत रिकॉर्ड समय में 20 पशु शेड, 70 घरों में पक्के शौचालय, वर्मी कम्पोस्ट पिट और कई संपर्क सड़कों का निर्माण कराकर टोले को चकमक (चमकदार) बना दिया गया.
  • निकासी की प्लानिंग गायब: इत्तेफाक से किसी अपरिहार्य कारणवश मुख्यमंत्री का आगमन टल गया. सीएम का दौरा क्या रद्द हुआ, अधिकारियों ने इस टोले से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया. सड़कें तो बना दी गईं, लेकिन उनके किनारे नाला नहीं बनाया गया. नतीजा यह है कि आज हल्की बारिश होते ही पूरे मोहल्ले में भयंकर जलजमाव हो जाता है.

स्थिति इतनी भयावह है कि गंदा पानी लोगों के आंगन और घरों में प्रवेश कर जाता है, जिसके कारण ग्रामीणों को मजबूरन दूसरों के निजी परिसरों से होकर मुख्य सड़क तक आना-जाना पड़ता है.

‘शोपीस’ बने 70 शौचालय और पशु शेड, योजनाओं की खुली पोल

प्रशासनिक देखरेख और जागरूकता के अभाव में लाखों की सरकारी राशि से बनीं संरचनाएं कबाड़ में तब्दील हो रही हैं:

  • भोजनघर बने पशु शेड: जिन 20 दुधारू पशुओं के लिए शेड बनाए गए थे, उनमें आज मवेशियों के बजाय ग्रामीणों द्वारा जलावन की लकड़ियां और उपले (गोइठा) रखे जा रहे हैं, तो कई परिवार इसमें खाना बना रहे हैं.
  • 95% शौचालय बंद: स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखाते हुए 70 घरों में बने शौचालयों में से महज 5 प्रतिशत का भी उपयोग नहीं हो रहा है. उचित रख-रखाव न होने से ये जर्जर हो चुके हैं और लोग आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.
  • जर्जर वर्मी पिट: जैविक खाद बनाने के उद्देश्य से बने वर्मी कंपोस्ट पिट पूरी तरह टूटकर मलबे में तब्दील हो चुके हैं.

ग्रामीण महिलाओं की चेतावनी: टोले की आक्रोशित महिलाओं का साफ कहना है कि मुखिया, सरपंच और उपसरपंच केवल चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने आते हैं, जीत जाने के बाद कोई शक्ल दिखाने तक नहीं आता. इस बार पंचायत चुनाव में ग्रामीण ‘वोट की चोट’ से इन जनप्रतिनिधियों को करारा जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं.

मुखिया ने स्वीकारी नाकामी; कहा—निकासी के बिना नाला निर्माण असंभव

इस पूरे मामले पर दलन पूरब पंचायत के मुखिया मोहम्मद नैमूल हक ने अपनी लाचारी और प्रशासनिक विफलता को स्वीकार करते हुए कहा:

“यह सच है कि साल 2018-19 में तत्कालीन सीएम के आगमन की सुगबुगाहट पर मनरेगा मद से 10 से 15 लाख रुपये की मोटी राशि से यहाँ पशु शेड, शौचालय और सड़कों का निर्माण हुआ था. बीच-बीच में मैं खुद भी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जांच में गया हूँ. वर्तमान में अधिकांश शौचालय बंद पड़े हैं और पशु शेड का गलत इस्तेमाल हो रहा है. मोहल्ले में जलजमाव की समस्या बेहद गंभीर है, क्योंकि यहाँ पानी की प्राकृतिक निकासी (आउटलेट) का कोई जरिया नहीं है. जब तक जमीन अधिग्रहण कर पानी निकासी की स्थाई व्यवस्था नहीं कराई जाती, तब तक नाले का निर्माण संभव नहीं है. हम वरीय अधिकारियों से इस दिशा में वार्ता कर रहे हैं.”

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