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Home बिहार कटिहार केंद्र सरकार किसानों के फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रति गंभीर नहीं : तारिक

केंद्र सरकार किसानों के फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रति गंभीर नहीं : तारिक

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केंद्र सरकार किसानों के फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रति गंभीर नहीं : तारिक

कटिहार. सांसद तारिक अनवर ने पूर्व की यूपीए सरकार एवं पिछले 10 वर्षों से चली आ रही एनडीए सरकार की तुलना करते हुए कहा कि रबी मौसम के छह फसलों में से पांच में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने एनडीए की तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की थी. जबकि खरीफ के 14 फसलों में से आठ फसलों में यूपीए सरकार ने एनडीए की तुलना में एमएसपी की अधिक वृद्धि की थी. अन्य फसलों यथा जुट, शुगर के जैसे फसलों में भी यूपीए सरकार ने अधिक वृद्धि की थी. सांसद श्री अनवर ने कहा कि उनके सवाल पर वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 को लेकर सरकार की ओर से जो जवाब दिया गया है. उससे साफ जाहिर होता है कि वर्ष 2020-21 में रबी और खरीफ की 19 फसलों में से 13 फसलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों को प्राप्त नहीं हुआ है. इसी तरह वर्ष 2021-22 में 19 फसलों में 13 एवं 2022-23 में 19 में से आठ फसलों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त नहीं हुआ है. जबकि एमएसपी को लेकर देश भर में किसान आंदोलित है. कांग्रेस के जिला प्रवक्ता पंकज कुमार तमाखुवाला के हवाले से सांसद श्री अनवर ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार किसानों के हित के लिए बिल्कुल गंभीर नहीं है. सांसद ने कहा कि लोकसभा में उनके द्वारा किये गये सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने जो जवाब दिया है. उससे स्पष्ट होता है कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात सिर्फ छलावा है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री से मिली रिपोर्ट के आधार पर साफ हो गया है कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने विभिन्न फसलों के एमएसपी पर जितना बढ़ोतरी 10 साल में किया था. मौजूदा मोदी सरकार उस मामले में काफी पीछे है. सांसद ने कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री की ओर से उपलब्ध कराये गये 2004 – 2014 और 2014 – 2024 के दौरान फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि के आंकड़ो के अनुसार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में मौजूदा मोदी सरकार काफी कम बढ़ोतरी की है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल यानी 2004-2005 से 2013-14 के दौरान धान की एमएससी में 134 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. लेकिन मौजूदा एनडीए सरकार ने 2014-15 से 2023-24 तक धान पर 61 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की है. इसी तरह गेहूं की एमएसपी में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के 10 साल में 122 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. जबकि मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में इसमें भी मात्र 57 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है. अन्य फसलों के एमएसपी की स्थिति भी कमोवेश ऐसी ही है. सांसद तारिक अनवर ने पूर्व की यूपीए सरकार एवं पिछले 10 वर्षों से चली आ रही एनडीए सरकार की तुलना करते हुए कहा कि रबी मौसम के छह फसलों में से पांच में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने एनडीए की तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की थी. जबकि खरीफ के 14 फसलों में से आठ फसलों में यूपीए सरकार ने एनडीए की तुलना में एमएसपी की अधिक वृद्धि की थी. अन्य फसलों यथा जुट, शुगर के जैसे फसलों में भी यूपीए सरकार ने अधिक वृद्धि की थी. सांसद श्री अनवर ने कहा कि उनके सवाल पर वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 को लेकर सरकार की ओर से जो जवाब दिया गया है. उससे साफ जाहिर होता है कि वर्ष 2020-21 में रबी और खरीफ की 19 फसलों में से 13 फसलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों को प्राप्त नहीं हुआ है. इसी तरह वर्ष 2021-22 में 19 फसलों में 13 एवं 2022-23 में 19 में से आठ फसलों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त नहीं हुआ है. जबकि एमएसपी को लेकर देश भर में किसान आंदोलित है. कांग्रेस के जिला प्रवक्ता पंकज कुमार तमाखुवाला के हवाले से सांसद श्री अनवर ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार किसानों के हित के लिए बिल्कुल गंभीर नहीं है. सांसद ने कहा कि लोकसभा में उनके द्वारा किये गये सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने जो जवाब दिया है. उससे स्पष्ट होता है कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात सिर्फ छलावा है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री से मिली रिपोर्ट के आधार पर साफ हो गया है कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने विभिन्न फसलों के एमएसपी पर जितना बढ़ोतरी 10 साल में किया था. मौजूदा मोदी सरकार उस मामले में काफी पीछे है. सांसद ने कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री की ओर से उपलब्ध कराये गये 2004 – 2014 और 2014 – 2024 के दौरान फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि के आंकड़ो के अनुसार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में मौजूदा मोदी सरकार काफी कम बढ़ोतरी की है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल यानी 2004-2005 से 2013-14 के दौरान धान की एमएससी में 134 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. लेकिन मौजूदा एनडीए सरकार ने 2014-15 से 2023-24 तक धान पर 61 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की है. इसी तरह गेहूं की एमएसपी में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के 10 साल में 122 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. जबकि मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में इसमें भी मात्र 57 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है. अन्य फसलों के एमएसपी की स्थिति भी कमोवेश ऐसी ही है.

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