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Home बिहार कटिहार नशा मुक्ति केंद्र से लोगों को नहीं मिल रहा कोई लाभ

नशा मुक्ति केंद्र से लोगों को नहीं मिल रहा कोई लाभ

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नशा मुक्ति केंद्र से लोगों को नहीं मिल रहा कोई लाभ

मरीजों को नहीं मिल रही हैं किसी भी प्रकार की कोई सुविधा कटिहार बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री द्वारा नशे की लत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से सदर अस्पताल में स्थापित नशा मुक्ति केंद्र आज बदइंतजामी और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. शुरुआती दौर में यह केंद्र बेहतर ढंग से संचालित होता था. बड़ी संख्या में नशे के आदि मरीज यहां भर्ती होकर उपचार प्राप्त कराते थे. मरीज यहां से ठीक होकर अपने घर भी लौटते थे. यह केंद्र पूरे जिले में उम्मीद की किरण बनकर उभरा था. बीते कुछ वर्षों से इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गयी. सदर अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में संचालित हो रहा यह केंद्र अब दूसरी बिल्डिंग में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में है. वर्तमान में मरीजों को आईसीयू वार्ड के इंटरनल रूम में अस्थायी रूप से जगह दिया गया है. जहां ना तो मूलभूत सुविधाएं हैं और ना ही उपचार के लिए अनुकूल माहौल. नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती होने वाले मरीज को बेहतर लाइट के अभाव में भी रहने को मजबूर हैं. अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही का सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य और उनके मानसिक तौर पर पड़ रहा है. नशा मुक्ति केंद्र पुरानी बिल्डिंग से हटाकर पहले जहां पर कोरोना वार्ड तैयार किया गया था. उस स्थान पर उस बिल्डिंग में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है. क्योंकि पुरानी बिल्डिंग में जर्जर अवस्था के कारण न तो वहां पर मरीज रहने के लिए चाह रहे थे और ना ही स्वास्थ्य कर्मी को बेहतर महसूस हो रहा था. पुरानी बिल्डिंग होने के कारण हमेशा वहां पर कीड़े, मकोड़े सांप बिच्छू का आतंक हमेशा बना रहता था. इस कारण से नशा मुक्ति केंद्र को दूसरे बिल्डिंग में स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया. हालांकि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में जो मूलभूत सुविधा होनी चाहिए उन सभी के अनुरूप केंद्र को तैयार किया जायेगा. पिछले दो महीने से फाइल अटका पड़ा हुआ है. अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक मरीजों को बेहतर इलाज के लिए स्थान नहीं मिल पाया है. ऐसे में नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों के लिए जो मूलभूत सुविधा होनी चाहिए जो माहौल होना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है. मरीज तो भर्ती होते हैं, एक-दो दिन के बाद ही अव्यवस्था के कारण भाग जाते हैं. ऐसे में सरकार की नशा से पूरी तरह से छुटकारा दिलाने का यह योजना सिर्फ खानापूर्ति साबित हो रही है.

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