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Home बिहार कटिहार कोढ़ा नगर पंचायत की घोर लापरवाही, गंदे नाले के बीच रखा शुद्ध पेयजल का घड़ा, प्यासे राहगीर आक्रोशित

कोढ़ा नगर पंचायत की घोर लापरवाही, गंदे नाले के बीच रखा शुद्ध पेयजल का घड़ा, प्यासे राहगीर आक्रोशित

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कोढ़ा नगर पंचायत की घोर लापरवाही, गंदे नाले के बीच रखा शुद्ध पेयजल का घड़ा, प्यासे राहगीर आक्रोशित
नाले के बीच रखा गया पानी का घड़ा
कटिहार के कोढ़ा से अमीर सोहेल की रिपोर्ट

Nagar Panchayat: कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत नगर पंचायत क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. इन दिनों पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप को देखते हुए नगर पंचायत प्रशासन द्वारा आम जनता और मुसाफिरों के लिए सार्वजनिक जगहों पर शुद्ध पेयजल (घड़े का पानी) उपलब्ध कराने की पहल की गई थी. लेकिन, जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह कल्याणकारी योजना विवादों के घेरे में आ गई है. नगर पंचायत की ओर से लगाया गया पानी का घड़ा एक ऐसे अस्वच्छ स्थान पर रख दिया गया है, जहां पानी पीना तो दूर, पहुंचना भी लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.

प्यास से कंठ सूखा, लेकिन नाले की गंदगी देख पानी पीने से कतरा रहे राहगीर

नगर पंचायत की इस अव्यवस्था और स्थानीय लोगों की परेशानियों का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देखा जा सकता है:

  • गंदगी के बीच ‘शुद्ध’ जल: स्थिति यह है कि राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए रखा गया मिट्टी का घड़ा सड़क किनारे बह रहे एक खुले और गंदे नाले के ठीक बीचो-बीच स्टैंड बनाकर रख दिया गया है. घड़े के चारों ओर नाले का बदबूदार और कीचड़युक्त पानी बह रहा है.
  • चयन पर उठे सवाल: स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि नगर पंचायत का यह कदम अधिकारियों की घोर संवेदनहीनता और योजना के प्रति लापरवाही को दर्शाता है. एक तरफ जहां सरकार जलजनित बीमारियों से बचने के लिए स्वच्छता का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ खुद प्रशासनिक व्यवस्था गंदगी को बढ़ावा दे रही है.
  • पहुंचना हुआ दूभर: मुख्य बाजार और सड़कों से गुजरने वाले राहगीरों ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण कंठ सूखने के बावजूद वे इस घड़े का पानी पीने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. पानी लेने के लिए पैर गंदे नाले में डालने पड़ते हैं, जिससे संक्रमण और अस्वच्छता का खतरा बना हुआ है.

बिना निरीक्षण और योजना के कागजी खानापूर्ति का आरोप

अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल: आक्रोशित ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का आरोप है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना किसी धरातलीय निरीक्षण और उचित कार्ययोजना के ही पेयजल की व्यवस्था कर दी. केवल कागजों पर योजना को पूरा दिखाने और वाहवाही लूटने के चक्कर में बिना सोचे-समझे नाले के ऊपर घड़ा रखवा दिया गया, जिससे सरकारी राशि का भी दुरुपयोग हो रहा है और जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है.

स्थान बदलकर स्वच्छ वातावरण में पानी रखवाने की पुरजोर मांग

जनता की चेतावनी और प्रशासनिक दायित्व:

गौरतलब है कि कोढ़ा प्रखंड का यह इलाका बेहद व्यस्त है और यहां प्रतिदिन हजारों ग्रामीण व राहगीर अपने काम के सिलसिले में आते-जाते हैं. ऐसे में चिलचिलाती धूप में शुद्ध पानी मिलना बेहद जरूरी है. स्थानीय नागरिकों ने कोढ़ा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) और मुख्य पार्षद से मांग की है कि इस अव्यवस्था पर तुरंत संज्ञान लिया जाए.

लोगों का कहना है कि इस घड़े को नाले के बीच से तत्काल हटाकर किसी सार्वजनिक, छायादार और पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण वाले स्थान पर स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाए, ताकि राहगीर बिना किसी हिचकिचाहट के सम्मान और स्वच्छता के साथ अपनी प्यास बुझा सकें. अब देखना यह है कि इस गंभीर और संवेदनशील जनहित के मुद्दे पर नगर पंचायत प्रशासन कब तक गहरी नींद से जागता है.

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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