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Home बिहार कटिहार भगवान श्री कृष्ण की निकाली गयी बारात, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया भाग

भगवान श्री कृष्ण की निकाली गयी बारात, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया भाग

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भगवान श्री कृष्ण की निकाली गयी बारात, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया भाग

– श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन उमड़े श्रद्धालु बारसोई अति प्राचीन श्री विष्णु मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महायज्ञ के छठे दिन मंगलवार को कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण की बारात निकाली. बारात में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. उत्तर प्रदेश के ललितपुर से आई कथा व्यास परम पूज्या राधा स्वरूपिणी किशोरी शिवि दीक्षित ने कथा वाचन के दौरान महा रास लीला प्रसंग का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि कृष्ण मतलब जो सब को अपनी ओर आकर्षित करता है. राधा के बारे में बताते हुए कहा कि शरीर अगर कृष्ण है तो प्राण राधा है. सागर अगर कृष्ण है तो उसकी लहरें राधा है. बांसुरी को व्यास जी ने साक्षात सरस्वती का रुप बताया वहीं गोपियों के बारे में बताते हुए कहा कि ये सभी ऋषि-मुनि गण है. व्यास जी ने श्रद्धालुओं को महा रास लीला का गुढ़ सिखाते हुए कहा कि महारास लीला में भाग लेने वालों के लिए कम से कम सात योग्यताएं होनी चाहिए. जिसमें पहला भागवत श्रवण, दूसरा नवदा भक्ति, नवदा भक्ति में श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवनम, पूजा-अर्चना, वंदना, हरि का दास होना, हरि का सखी होना तथा आत्म निवेदन आते हैं. तीसरा जीवन में गुरु का होना. चौथा वैराग्य उत्पन्न होना. पांचवा देहसुधि अर्थात देह में रहते हुए भी देह में नहीं होना. छठा रास की भावना का होना के साथ-साथ सातवां आचार्य की कृपा होना जरूरी है. इतनी पात्रता रखने वाला ही महारास लीला में भाग ले सकता है. इसके उपरांत महारास लीला का मंचन भी हुआ साथ ही भगवान श्री कृष्ण की बारात निकाली गयी. रुकमणी के साथ भगवान श्री कृष्ण के विवाह का मंचन भी हुआ. ज्ञात हो कि उक्त भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन श्री विष्णु मंदिर न्यास समिति बारसोई तथा भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति बारसोई के द्वारा किया जा रहा है. जिसकी सफलता के लिए संपूर्ण बारसोई नगर वासी एवं ग्रामवासी लगे हुए हैं. कथा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के बीच महा प्रसाद का वितरित किया जाता है. बुधवार संध्या वेला सुदामा चरित्र, श्री शुकदेव विदाई हुई. मंगलवार को सुबह हवन पूर्णाहुति एवं भंडारा का आयोजन किया गया है.

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