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कोढ़ा के पूर्व डीएसपी धर्मेंद्र कुमार किये गये निलंबित

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कोढ़ा के पूर्व डीएसपी धर्मेंद्र कुमार किये गये निलंबित

कोढ़ा के पूर्व डीएसपी धर्मेंद्र कुमार किये गये निलंबित – छापेमारी में असहयोग से फरार हुए अपराधी, महिला हत्या केस ने बढ़ाई मुश्किलें धर्मेंद्र कुमार वर्तमान में जहानाबाद में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के पद पर थे पदस्थापित कोढ़ा बिहार पुलिस महकमे में इन दिनों कोढ़ा के तत्कालीन डीएसपी धर्मेंद्र कुमार को लेकर जबरदस्त हलचल मची है. छापेमारी के दौरान कथित असहयोग, गंभीर लापरवाही और एक विवाहिता की संदिग्ध मौत मामले में गड़बड़ी के आरोपों के बीच राज्य सरकार के गृह विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. धर्मेंद्र कुमार वर्तमान में जहानाबाद में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के पद पर पदस्थापित थे. उनके खिलाफ यह कार्रवाई पूर्णिया पुलिस द्वारा की गई एक बड़ी छापेमारी के दौरान सहयोग नहीं करने के आरोप में की गई है. विभागीय जांच में उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया. जिसके बाद गृह विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया. छापेमारी में देरी बनी बड़ी वजह पूरा मामला एक फरवरी 2026 की रात की घटना से जुड़ा है, जब पूर्णिया जिले में लूट और छिनतई की लगातार कई घटनाएं सामने आई थीं. जांच में इन वारदातों के तार कटिहार के कुख्यात कोढ़ा गैंग से जुड़ा सामने आया. पूर्णिया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया जिसमें करीब 15 थानों के थानाध्यक्ष, 50 सशस्त्र पुलिसकर्मी और 50 लाठीधारी जवान शामिल थे. इतनी बड़ी टीम कोढ़ा पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से व्यापक छापेमारी की योजना बनाई. टीम ने डीएसपी धर्मेंद्र कुमार को 13 वांछित अपराधियों की सूची सौंपी और तत्काल कार्रवाई की बात कही लेकिन आरोप है कि डीएसपी ने छापेमारी से पहले गिरफ्तारी वारंट की मांग कर दी जिससे कार्रवाई में देरी हुई. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में वारंट की अनिवार्यता नहीं होती. खासकर जब अपराधी फरार हो और तत्काल कार्रवाई जरूरी हो. इसके बावजूद करीब एक घंटे तक चली चर्चा और असमंजस ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया. अपराधियों को मिला भागने का मौका पूर्णिया एसपी की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इस देरी के कारण अपराधियों को भनक लग गयी और वे मौके से फरार हो गये. रिपोर्ट में डीएसपी के रवैये को उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना बताया है. यह भी उल्लेख किया कि भारी पुलिस बल के लंबे समय तक इलाके में ठहरने से गतिविधियां बढ़ीं और अपराधियों को सतर्क होने का पर्याप्त समय मिल गया. डीआईजी स्तर पर जांच, दो जिलों से मांगी गयी रिपोर्ट डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल ने तुरंत जांच के आदेश दिया और पूर्णिया व कटिहार दोनों जिलों के एसपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी. पूर्णिया एसपी कार्तिकेय के शर्मा ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी. जिसमें धर्मेंद्र कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए. कटिहार एसपी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई. जिसके बाद निलंबन का निर्णय लिया गया. महिला हत्या केस ने बढ़ाई मुश्किलें इस पूरे मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया. जब जांच के दौरान एक विवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला भी सामने आया. आरोप है कि इस केस में हत्या को आत्महत्या में बदलने की कोशिश की गयी. परिजनों की शिकायत पर जब उच्च स्तर पर जांच हुई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और सच्चाई दबाने का प्रयास किया गया. इस खुलासे ने धर्मेंद्र कुमार की मुश्किलों को और बढ़ा दिया. अब इस मामले की भी अलग से विभागीय जांच चल रही है. विभागीय कार्रवाई जारी, सख्त संदेश आईजी मुख्यालय द्वारा तैयार विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने धर्मेंद्र कुमार से स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया. इसके बाद गृह विभाग ने निलंबन की कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी. सूत्रों के अनुसार, यह मामला यहीं नहीं रुकेगा. विभागीय जांच पूरी होने के बाद और भी कड़ी कार्रवाई जैसे पद से हटाना या सेवा से बर्खास्तगी पर विचार किया जा सकता है., यदि आरोप साबित होते हैं. पुलिस महकमे में बढ़ी बेचैनी इस घटना ने बिहार पुलिस के भीतर भी बेचैनी बढ़ा दी है. एक ओर अपराध नियंत्रण को लेकर दबाव है तो दूसरी ओर इस तरह के मामले से विभाग की साख पर सवाल उठ रहे हैं. वरिष्ठ अधिकारी इसे अनुशासन और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं.

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