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Home बिहार कटिहार आरामदायक जीवन सैली से बढ़ रहे डायबिटीज मरीजों की संख्या : डॉ विनकर

आरामदायक जीवन सैली से बढ़ रहे डायबिटीज मरीजों की संख्या : डॉ विनकर

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आरामदायक जीवन सैली से बढ़ रहे डायबिटीज मरीजों की संख्या : डॉ विनकर

आरामदायक जीवन जीने के चक्कर में लोगों ने अपने शरीर में कई बीमारियों को आमंत्रण दे दिया है. हाल के एक रिपोर्ट के अनुसार सदर अस्पताल के साथ अन्य सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में डायबिटीज के शिकार वाले मरीज ज्यादा मिल रहे हैं. इसके अलावा ब्लड प्रेशर से भी ग्रसित मरीजों की संख्या पहले से काफी बढ़ी है. इन दिनों सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट क्लिनिक मरीजों की जांच के क्रम में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज पाए जा रहे हैं. यह सभी मरीज 40 साल से ऊपर के हैं. इस आंकड़े को देखते हुए सदर अस्पताल जेनरल फिजिशियन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एसपी विनकर ने चिंता जतायी है. डॉ विनकर ने बताया कि हाल के आंकड़े के अनुसार डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इसका सीधा कारण है कि लोगों के खानपान और शरीर के ऊपर ध्यान नहीं देने के कारण ही डायबिटीज के लोग शिकार हो रहे हैं. सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के कई केश पाये जा रहे हैं. अपने खराब जीवनशैली जीने के कारण इस बीमारी से ग्रसित लोगों की संख्या ज्यादा हो गयी है. डॉ विनकर ने बताया कि डायबिटीज दो टाइप के होते हैं. टाइप दो में 95 प्रतिशत लोग इस टाइप के शिकार होते हैं. डॉ विनकर ने बताया कि शोध के अनुसार 40 वर्ष से ऊपर ज्यादातर लोग डायबिटीज के शिकार हो रहे है.

सावधानी ही इस बीमारी को हावी होने से बचाया जा सकता है

डॉ विनकर ने बताया कि दुनियाभर में लाखों लोग डायबिटीज बीमारी से ग्रसित हैं. डायबिटीज मधुमेह को साधारण भाषा में शुगर कहते हैं. यह एक लाइलाज बीमारी है, जो जड़ से कभी खत्म नहीं होती है. यह कंट्रोल की जा सकती है. यानी इस पर सिर्फ नियंत्रण किया जा सकता है. जिस भी व्यक्ति को यह बीमारी हो जाती है उसे इसका इलाज बंद नहीं करना चाहिए. डायबिटीज हमें तब होती है जब शरीर की रक्त शर्करा या ग्लूकोस अधिक हो जाती है. ब्लड ग्लूकोस हमारी ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है. हम जो भोजन ग्रहण करते हैं उससे हमारे शरीर को रक्त शर्करा प्राप्त होती है. डायबिटीज को अगर हम इलाज द्वारा नियंत्रित न करें तो इसका असर हमारे शरीर के अन्य भागों जैसे किडनी, आंख, फेफड़ा, ह्रदय और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है. जब हमारे शरीर के हार्मोन इंसुलिन (बीटा सेल्स के अंदर पैंक्रियास से निकलने वाला हार्मोन) हमारे शरीर के साथ सही ताल-मेल नहीं बिठा पाता है. तब यह बीमारी होती है. यह बीमारी एक खराब जीवनशैली के कारण होती है.

यह सभी लक्षण दिखे तो डायबिटीज के हो सकते हैं शिकार

डॉ एसपी विनकर ने बताया कि डायबिटीज बढ़ती उम्र के साथ होना आम हो गया है. इसके कुछ लक्षण है जो दिखाई पड़ने पर लोग फौरन अपना डायबिटीज की जांच करवा लें. जैसे बार-बार प्यास लगना, भूख का बढ़ना, अचानक वजन का बढ़ना या घट जाना, थकान और कमजोरी महसूस होना, घाव का जल्दी न भरना, फोड़े-फुंसी निकलना, आंखों की दृष्टि धुंधली होना, दंत रोग, हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्न हो जाना, पैरों व घुटनों में हमेशा दर्द होना, डायबिटीज के लक्षण है. डायबिटीज की जांच दो बार में होती है. डायबिटीज की एक जांच खाली पेट होती है. उसे फास्टिंग कहते है. खाली पेट जांच कराने पर यदि खून में शुगर की मात्रा 125 एमजी से अधिक होती है तो यह डायबिटीज रोग होने की तरफ इशारा करता है. दूसरी जाँच जो खाना खाने के दो घंटे बाद की जाती है. इसमें यदि शरीर में शर्करा की मात्रा 147 एमजी से अधिक पायी जाए तो यह मधुमेह होने की ओर इशारा करती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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