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Home बिहार कटिहार संघर्ष, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी की मिसाल बनी बारसोई की बेटी ऐश्वरी, तीसरे प्रयास में बिना कोचिंग के BPSC फतह

संघर्ष, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी की मिसाल बनी बारसोई की बेटी ऐश्वरी, तीसरे प्रयास में बिना कोचिंग के BPSC फतह

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संघर्ष, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी की मिसाल बनी बारसोई की बेटी ऐश्वरी, तीसरे प्रयास में बिना कोचिंग के BPSC फतह
70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद अपने माता पिता के साथ बारसोई की बेटी ऐश्वरी कुमारी

बारसोई (कटिहार) से अरविन्द गुप्ता की रिपोर्ट

Aishwarya Kumari Crack BPSC: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत कटिहार जिले के बारसोई अनुमंडल से महिला सशक्तिकरण और कड़े संघर्ष की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है. कहते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी भी आपकी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती. इस जीवंत मिसाल को बारसोई बाजार की बेटी ऐश्वरी कुमारी ने सच साबित कर दिखाया है. शनिवार देर शाम जारी हुए 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के फाइनल रिजल्ट में ऐश्वरी ने शानदार रैंक हासिल कर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) के पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया है.

प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) पद पर हुआ चयन

ऐश्वरी की इस बड़ी सांगठनिक सफलता और उनके परिवार से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं. बीपीएससी की अंतिम मेधा सूची के अनुसार, ऐश्वरी कुमारी ने राज्य स्तर पर 4325वीं रैंक प्राप्त की है, जिसके आधार पर उन्हें प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (Block Panchayat Raj Officer) का गरिमामय पद आवंटित किया गया है.

बारसोई बाजार स्थित विष्णु मंदिर के समीप रहने वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी की इस कामयाबी से न केवल उनका घर बल्कि पूरा बारसोई अनुमंडल क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

पिता हैं LIC एजेंट, कपड़ों की छोटी दुकान से चलता है खर्च

ऐश्वरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी प्रेरणा की कड़ियां बेहद भावुक और संघर्षपूर्ण रही हैं. वे स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक अशोक कुमार रजक एवं भारती देवी की सुपुत्रियां हैं. उनके पिता अपनी आजीविका के लिए एलआईसी (LIC) एजेंट के रूप में कार्य करते हैं और साथ ही घर चलाने के लिए कपड़ों की एक बेहद छोटी सी दुकान संचालित करते हैं.

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तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते ऐश्वरी पर पूरे परिवार की उम्मीदों का बड़ा बोझ था. सीमित और कमजोर आर्थिक संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने अपनी इस लाडली बेटी का हौसला कभी टूटने नहीं दिया और हर मुश्किल घड़ी में अपनी सामर्थ्य से बढ़कर उसका साथ दिया.

मैट्रिक से लेकर बीटेक (इंजीनियरिंग) तक का शैक्षणिक सफर

ऐश्वरी कुमारी के शैक्षणिक सफर और प्रारंभिक कड़ियों पर नजर डालें तो उनकी शिक्षा काफी मेधावी रही है:

  • 2014: उच्च विद्यालय बारसोई से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की.
  • 2016: प्रतिष्ठित डीएस कॉलेज कटिहार (D.S. College) से इंटरमीडिएट (आईएससी – गणित) की पढ़ाई पूरी की.
  • 2018-2022: नालंदा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक (B.Tech) की डिग्री सफलतापूर्वक हासिल की.

लगातार दो बार मिली असफलता, तीसरे प्रयास में लहराया परचम

बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐश्वरी का एकमात्र लक्ष्य बिहार प्रशासनिक सेवा में जाना था. हालांकि यह रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा. उन्होंने इससे पहले 68वीं और 69वीं बीपीएससी की संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी पूरे मन से भाग लिया था, लेकिन अंतिम रूप से सफलता हाथ नहीं लगी.

लगातार दो बार मिली इस करारी असफलता से वे निराश जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपनी कमियों को सुधारते हुए उन्होंने तीसरे प्रयास में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और आखिरकार राजपत्रित अधिकारी बनकर ही दम लिया.

“इंटरनेट और ऑनलाइन स्टडी मटीरियल ही मेरा कोचिंग संस्थान”

“अपनी इस असाधारण कामयाबी पर बात करते हुए नवनियुक्त बीपीआरओ ऐश्वरी कुमारी भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगहाली के कारण वे किसी बड़े शहर जाकर महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस वहन नहीं कर सकती थीं. इसलिए उन्होंने पूरी तरह ‘सेल्फ स्टडी’ (स्वाध्याय) का मार्ग चुना. आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पढ़ाई के बेहतरीन रिसोर्सेज मुफ्त में उपलब्ध हैं, बस छात्रों को कड़े अनुशासन और लगन के साथ निरंतर मेहनत करने की जरूरत है.”

Aishwarya Kumari Crack BPSC: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा सुधार और बेटियों को आगे बढ़ाना है मुख्य लक्ष्य

ऐश्वरी ने अपनी भविष्य की प्रशासनिक प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा कि यदि उनकी पोस्टिंग गृह जिले या सीमांचल में होती है, तो वे ग्रामीण इलाकों में गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी शिक्षा व्यवस्था को धरातल पर मजबूत करने के लिए विशेष कार्य करेंगी. वे चाहती हैं कि सुदूर देहाती क्षेत्रों की लड़कियां उन्हें देखकर प्रेरित हों और रूढ़िवादी सोच को तोड़कर उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाएं.

ऐश्वरी की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर मिलते ही पूर्व जनप्रतिनिधियों, स्थानीय शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उनके निवास स्थान पर बधाई देने और मुंह मीठा कराने के लिए तांता लगा हुआ है.

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