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Katihar, मक्का के बाद अब जूट की ओर लौट रहे कटिहार के किसान

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Katihar, मक्का के बाद अब जूट की ओर लौट रहे कटिहार के किसान

लाइन सोइंग विधि से बंपर पैदावार की उम्मीद

कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट, जूट की नगरी कहे जाने वाले कटिहार में एक बार फिर किसानों का रुझान जूट की खेती की तरफ बढ़ा है. मक्का की कटाई के बाद अब किसान बड़े उत्साह के साथ लाइन सोइंग विधि से जूट की बुआई कर रहे हैं.

सदर प्रखंड में सबसे ज्यादा रुझान

सदर प्रखंड के भवारा और दलन पूरब पंचायत में किसान इस नई विधि को तेजी से अपना रहे हैं. पारंपरिक छिड़काव विधि को छोड़कर मशीन से लाइन सोइंग कर रहे हैं.

क्यों खास है लाइन सोइंग विधि

जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि लाइन सोइंग विधि के कई फायदे हैं. कम बीज, ज्यादा फायदा, छिड़काव विधि में बीज ज्यादा लगता है, जबकि लाइन सोइंग में सीमित बीज से ही काम चल जाता है. पौधों का बेहतर विकास, इस विधि में पौधे निश्चित दूरी पर लगते हैं. इससे हर पौधे को हवा, धूप और पोषक तत्व भरपूर मिलते हैं. नतीजा, पौधों का विकास तेजी से होता है. बंपर पैदावार, पौधों के बेहतर विकास के कारण पैदावार भी बंपर होती है. निराई-गुड़ाई आसान, लाइन में बुआई होने से खेतों से खर-पतवार निकालना बेहद आसान हो जाता है. दवा का छिड़काव भी सही तरीके से होता है.

किसानों में उत्साह

भवारा के किसान सुनील मंडल ने बताया, पहले छिड़ककर जूट लगाते थे तो बीज भी ज्यादा लगता था और घना होने से पौधे कमजोर रह जाते थे. मशीन से लाइन में बोने से खर्च भी कम आया और खेत भी साफ दिख रहा है.

जूट की नगरी का पुराना रुतबा लौटने की उम्मीद

कटिहार कभी जूट उत्पादन के लिए पूरे देश में जाना जाता था. बीच में किसानों का रुझान मक्का और केला की तरफ ज्यादा हो गया था. लेकिन अब बेहतर तकनीक और अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद से किसान फिर जूट की ओर लौट रहे हैं. कृषि विभाग भी बीज और तकनीकी मदद देकर किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है. जिला कृषि पदाधिकारी का कहना है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो इस बार जिले में जूट का रिकॉर्ड उत्पादन हो सकता है.

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