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बरारी में बाढ़ से 50 हजार की आबादी प्रभावित

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बरारी में बाढ़ से 50 हजार की आबादी प्रभावित

बरारी. खंड के दर्जनों पंचायतों के लोग एक फिर से बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. बाढ़ की विभिषिका के कहर से करीब 50 हजार की बड़ी आबादी त्रस्त है. कई तरह की परेशानी से लोग जूझ रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्ग, महिला, पुरुष सभी बाढ़ की खतरनाक वापसी से घबराये हुए है. सबसे बड़ी समस्या शौचालय एवं आवागमन की है. विषैले कीड़े मकौड़े से भी सुरक्षा का सवाल है. वैसे तो कई लोग बाढ़ के कारण अपना घर ऊंचा स्थान पर बनाये हुए है. लेकिन आपदा जब आती है तो कई तरह से परेशानी का सबब बनती है. दुबारा आई बाढ़ में करीब दर्जनों पंचायत के गांव बुरी तरह प्रभावित हुई है. आवागमन में भी घोर परेशानी हो रही है. घर छोड़कर बाढ़ के समय कहीं जाने पर घर में चारी का खतरा बना रहता है. बाढ़ पीड़ित परिवार बताते हैं कि डीलर को भी अभी लूटने का मौका मिला है. कोई देखने वाला नहीं है. अंचल पदाधिकारी मनीष कुमार बताते हैं कि सामुदायिक कीचन संचालित करने को लेकर तैयारी की जा रही है. ताकि आपदा में लोगो को थोड़ी राहत मिल सकें. भीषण बाढ़ में दर्जनों विद्यालय डूबे हैं. जिसमें बैसा बासगढ़ा में प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ का पानी घुसा. मोहनाचांदपुर पंचायत में आई बाढ़ में मध्य विद्यालय भवानीपुर, प्लस टू उवि जोतराम राय भवानीपुर, प्रावि सोनाखाल, प्रावि मोहनाडीह एवं निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन बाढ़ के पानी में डूबा है. कांतनगर पंचायत में आई बाढ़ में प्रावि मोदीचक, प्रावि मरकरियाबाड़ी, उच्च माध्यमिक विद्यालय सिरनिया, उत्क्रमित उवि कांतनगर में पानी भरा है. विशनपुर पंचायत के उमवि ढेनुआ, प्रावि बकिया रानीचक, प्रावि गुंजरा शर्मा टोला एवं पश्चिमी बारीनगर पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय तारिकुल्ला टोला सहित दर्जनों विद्यालय में बाढ़ का पानी घुस जाने से सभी विद्यालय बंद हैं. जिसके कारण करीब छह हजार बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गयी है. जबकि एक आंगनबाड़ी ऊंचे स्थान पर संचालित किया जा रहा है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अशोक झा ने बताया कि अत्यधिक बाढ़ के कारण सुरक्षा दृष्टिकोण से विद्यालय बंद किया गया है. बाढ़ पीड़ित को सही माप से राशन नहीं दिये जाने पर एमओ से जानकारी लेनी चाही. लेकिन संर्पक नहीं हो सका. ज्ञात हो कि प्रखंड का काढ़ागोला पंचायत एवं जौनिया पंचायत का गंगा कटाव में विलिन हो जाने से कई हजार परिवार आज तक भूमिहीन विस्थापित होने का दंश झेल रहे हैं. बाढ़ से बचाव की स्थाई रणनीति सरकार को बनानी होगी तभी क्षेत्र का कल्याण हो सकेगा.

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