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अब अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे विद्यालय

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अब अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे विद्यालय

हादसे की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने बैठक कर लिया निर्णय भभुआ नगर. साहब, अब हम लोग अपने नन्हें-मुन्ने बच्चों को शहर की जानलेवा ट्रैफिक को पार कर गांव से दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगरपालिका मध्य विद्यालय में पढ़ने के लिए नहीं भेज पायेंगे. इसके लिए पूरे गांव के ग्रामीणों ने आपस में बैठक कर निर्णय लिया है. यह बातें शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचे सदर प्रखंड अंतर्गत अखलासपुर पंचायत के सेमरिया गांव के ग्रामीणों ने बतायीं. समाहरणालय पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि सेमरिया विद्यालय को नगर पालिका मध्य विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है. अब विद्यालय व गांव की दूरी दो से तीन किलोमीटर है. इतना ही नहीं, नन्हें-मुन्ने बच्चों को विद्यालय आने के लिए शहर की व्यस्ततम सड़क और जानलेवा चौक-चौराहों (अष्टभुजी चौक, अतिव्यस्त पटेल चौक, अतिव्यस्ततम जयप्रकाश चौक व कचहरी रोड) से होकर गुजरना पड़ता है. इसके कारण आये दिन बच्चों के साथ दुर्घटना होने का भय बना रहता है. कभी-कभी छात्र दुर्घटना में आकर घायल भी हो जाते हैं. यह गुहार समाहरणालय पहुंचे ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी सावन कुमार को आवेदन देकर लगायी है. डीएम को दिये आवेदन में पूर्व विद्यालय शिक्षा समिति सचिव हृदयानंद गोंड एवं विद्यालय शिक्षा समिति अध्यक्ष अनिता कुमारी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि न्यू प्राथमिक विद्यालय अखलासपुर पंचायत के सेमरिया गांव में स्थित है. प्राथमिक विद्यालय को समाप्त करते हुए नगर पालिका मध्य विद्यालय भभुआ में शिफ्ट कर दिया गया है. प्राथमिक विद्यालय सेमरिया में डेढ़ सौ बच्चे नामांकित हैं व पढ़ते हैं, जिनमें अधिकतर बच्चे महादलित परिवार से आते हैं. लेकिन, विद्यालय को शिफ्ट किये जाने के कारण बच्चों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. इसीलिए, सभी ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि सेमरिया गांव के बच्चे अब नगर पालिका मध्य विद्यालय में पढ़ने के लिए नहीं जायेंगे. = ग्रामीण देंगे पैसे, भाड़े के मकान में संचालित हो विद्यालय प्राथमिक विद्यालय सेमरिया नगर पालिका मध्य विद्यालय में शिफ्ट होने के बाद डीएम को आवेदन देने समाहरणालय पहुंचे ग्रामीणों ने डीएम को दिये आवेदन में कहा है कि जब तक गांव में विद्यालय भवन का निर्माण एवं भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित नहीं हो जाती है, तब तक विद्यालय भाड़े के मकान में संचालित किया जाये. इसका किराया ग्रामीणों ने मिलकर देने का निर्णय लिया है. = भूमि मापी के बाद भी नहीं दी गयी रिपोर्ट ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी को दिये आवेदन में कहा कि विद्यालय निर्माण के लिए अंचल अधिकारी के आदेश पर राजस्व कर्मचारी व अमीन की ओर से भूमि की मापी करा दी गयी है. लेकिन, विद्यालय निर्माण के लिए अंचलाधिकारी की ओर से सिर्फ एनओसी नहीं दिया गया है. जब हम लोग एनओसी की मांग करते हैं, तो सीओ की ओर से कहा जाता है कि शिक्षा विभाग को एनओसी दे दिया जायेगा. इधर, शिक्षा विभाग कहता है कि भूमि नहीं रहने और विद्यालय भवन नहीं बनने के कारण विद्यालय को शिफ्ट कर दिया गया है. = दो दर्जन से अधिक विद्यालय किये गये शिफ्ट बता दें कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि नहीं रहने और विद्यालय का भवन निर्माण नहीं होने के कारण जिले के दो दर्जन से अधिक विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों में शिफ्ट कर दिये गये हैं. हालांकि, विद्यालय शिफ्ट करने से पहले विभाग की ओर से यह देखा गया था कि विद्यालय से सटे विद्यालय की दूरी कितनी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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