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Home बिहार कैमूर दो माइनरों का नदियों से नहीं हुआ मिलान, हर साल किसानों के फसल पर संकट

दो माइनरों का नदियों से नहीं हुआ मिलान, हर साल किसानों के फसल पर संकट

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दो माइनरों का नदियों से नहीं हुआ मिलान, हर साल किसानों के फसल पर संकट

# घेघीया व डड़वा में छोड़े गये उसरी व मोहनिया माइनर से खेती प्रभावित # हजारों एकड़ धान व गेहूं की फसल हर वर्ष हो जाते हैं जलमग्न मोहनिया शहर. स्थानीय प्रखंड से होकर गुजरने वाली उसरी और मोहनिया माइनर का नदियों से टेल एंड मिलान नहीं होने के कारण डड़वा व आसपास के गांवों में हर वर्ष तबाही मच रही है. माइनर का पानी खेतों में फैल जाने से हजारों एकड़ में लगी धान और गेहूं की फसल बर्बाद हो जाती है, लेकिन सिंचाई विभाग इस गंभीर समस्या की ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. इस समय खेत में नमी के कारण ट्रैक्टर का बोनट खोल गेहूं की बुवाई करने को विवश हैं. जहां खेतों में नमी के कारण किसानों की खेती प्रभावित हो रही है. मालूम हो कि किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए दुर्गावती मुख्य नहर से उसरी और मोहनिया माइनर निकाली गयी है, जो कई गांवों से होते मोहनिया क्षेत्र के घेघीया व डड़वा तक पहुंचती है,.लेकिन, दोनों माइनरों के अंतिम छोर को किसी भी नदी से नहीं जोड़ा गया है. एक माइनर का टेल एंड घेघीया में है, जबकि दूसरा डड़वा तक ही लाकर छोड़ दिया गया है. परिणामस्वरूप आवश्यकता से अधिक पानी खेतों में फैल जाता है और बिना बरसात के ही फसलें जलमग्न हो जाती है. किसानों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी भी माइनर का टेल एंड नदी से मिलान किया जाता है, ताकि अतिरिक्त पानी नदी में प्रवाहित हो सके. लेकिन, यहां ऐसा नहीं होने से डड़वा और भरखर गांव के खेत हर साल डूब जाते हैं. किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि उसरी और मोहनिया माइनर के टेल एंड को शीघ्र नदियों से जोड़ा जाये या अनावश्यक रूप से माइनर में पानी छोड़ने पर रोक लगायी जाये. # खेत में नमी के कारण बुआई हो रही है प्रभावित मोहनिया प्रखंड के भरखर गांव में हजारों एकड़ फसल दोनों माइनर के पानी से बुरी तरह प्रभावित रहती है. जबकि, इस समय हालात और भी गंभीर हो गये हैं. खेतों में अत्यधिक नमी होने के कारण गेहूं की बुआई प्रभावित है. जहां नवंबर-दिसंबर में गेहूं की बुआई पूरी हो जानी चाहिए थी, वहीं अब 10 जनवरी तक भी किसान अपने खेतों में बुआई नहीं कर पाये हैं. खेतों में पानी और नमी हो जाने से ट्रैक्टर धंस जा रहे हैं, जिससे किसान जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर का बोनट खोलकर किसी तरह गेहूं की बुआई करने को मजबूर हो रहे हैं. # क्या कहते हैं किसान – इस संबंध में भरखर गांव के किसान वीरेंद्र राय ने बताया कि हर साल माइनर का अतिरिक्त पानी हमारे खेतों में भर जाता है. नदियों से मिलान नहीं होने के कारण धान और गेहूं दोनों फसल बर्बाद हो जाती हैं. विभाग को कई बार बताया गया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. – किसान झाम लाल ने कहा कि खेतों में इतनी नमी है कि ट्रैक्टर चलाना मुश्किल हो गया है. गेहूं की बुआई समय पर नहीं हो पाने से पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा. अगर यही हाल रहा तो किसानों की हालत और खराब हो जायेगी. – किसान गणेश पांडेय ने बताया कि दो माइनर को नदियों से मिलान नहीं किये जाने से हरेक वर्ष खेती प्रभवित होता है. इस वर्ष यह आलम है की पानी के कारण खेत में नमी होने से बुआई नहीं हो पा रही है. इसके कारण किसी तरह मजबूरी में ट्रैक्टर का बोनट खोल कर गेहूं की बुआई की जा रही है. – किसान देवमुनी कुशवाहा ने चिंता जताते हुए कहा कि हर साल मेहनत और पैसा पानी में चला जाता है. जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर से बुआई करनी पड़ रही है. अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो किसान आंदोलन को मजबूर होंगे. # क्या कहते हैं अधिकारी इस संबंध में दुर्गावती मुख्य नहर के अधिकारी ने बताया दोनों माइनर में पानी किसानों के कहने पर बंद किया जाता है. जहां तक टेल इंड की मिलान की बात है, तो मोहनिया से एक दुर्गावती नदी गुजरती है, जिसमें दोनों माइनर के टेल इंड को मिलान के लिए रेलवे और एनएच को क्रॉस कर ले जाना पड़ेगा. जहां भी व्यवस्था है वहां माइनर का मिलान किया गया है, जैसे सावठ माइनर का मिलान किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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