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हमले के एक माह बाद भी शराब माफिया पंकज को गिरफ्तार नहीं कर पायी पुलिस

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हमले के एक माह बाद भी शराब माफिया पंकज को गिरफ्तार नहीं कर पायी पुलिस

भभुआ कार्यालय. बीते सात दिसंबर को एनएच-दो पर कर्मनाशा पावर ग्रिड के समीप छज्जू बाग पोखरा के पास शराब की जांच कर रहे उत्पाद पुलिस पर शराब माफियाओं द्वारा गिरोह बनाकर किये गये हमला मामले में आज एक महीने बाद भी मुख्य आरोपित शराब माफिया पंकज यादव पुलिस की पकड़ से बाहर है. जबकि, उक्त हमले का मास्टरमाइंड व सरगना पंकज यादव ही था, जिसके द्वारा उत्पाद पुलिस पर हमला कराया गया था. इसके अलावा इसके एक और सहयोगी अभिषेक को भी पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पायी है. पंकज यादव दुर्गावती थाना क्षेत्र के भानपुर गांव का रहने वाला है, वहीं अभिषेक दुर्गावती थाना क्षेत्र के कर्मनाशा का रहने वाला है. उक्त दोनों की गिरफ्तारी नहीं होने से हमले से जुड़े कई राज आज भी खुलने बाकी है. पुलिस के अनुसंधान में यह सामने आया था कि सात दिसंबर को उत्पाद पुलिस पर जांच के दौरान जो हमला कराया गया था, वह शराब माफिया पंकज यादव द्वारा ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कराया गया था. पंकज शराब के मामले में कई बार पहले भी जेल जा चुका है. पंकज शराब की तस्करी के साथ-साथ लाइनर का भी काम किया करता था और उसी द्वारा योजनाबद्ध तरीके से सात दिसंबर को उत्पाद पुलिस पर हमला कराया गया था. = उत्पाद पुलिस ने 10 नामजद व अज्ञात पर दर्ज करायी थी प्राथमिकी उक्त हमला मामले में उत्पाद पुलिस के एएसआइ रामानंद प्रसाद द्वारा पंकज यादव, अभिषेक समेत 10 लोग नामजद व अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दुर्गावती थाने में दर्ज करायी गयी थी. पुलिस द्वारा अब तक नामजद 10 में से चार व दो अन्य हमले के आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा पंकज व अभिषेक समेत चार अन्य नामजद आरोपित आज भी फरार हैं. पुलिस द्वारा पंकज की गिरफ्तारी के लिए अब तक के किये गये सभी प्रयास विफल साबित हुए हैं. पंकज एक शातिर शराब माफिया है, जो जेल से छूटने के बाद शराब के धंधे में सक्रिय हो जाता है और उत्तर प्रदेश बिहार की सीमा पर शराब की तस्करी कर बिहार के अन्य जिलों में शराब पहुंचाकर बेहिसाब मुनाफा कमाना उसका मुख्य धंधा है. शराब की तस्करी करते-करते पंकज यूपी-बिहार के कुछ लड़कों का गिरोह बना लिया था, जिसका उदाहरण सात दिसंबर को देखने को मिला जब उत्पाद पुलिस द्वारा फायरिंग भी की जा रही थी, तब भी उनमें कोई डर नहीं था और वह अपने सहयोगियों के साथ पुलिस पर लाठी चलते दिख रहा है. साथ ही उसके गिरोह में इतने लोग शामिल हो गये हैं कि घटना के दिन देखते ही देखते 25 से 50 की संख्या में एनएच दो पर लोग एकत्रित हो गये और पुलिस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. इसी से शराब माफिया पंकज के हौसले व उसके गिरोह के ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. = पंकज की गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे कई राज पुलिस द्वारा हमले के अगले दिन हमले में शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें अक्षय ने पुलिस को या बयान दिया था कि मुख्य आरोपित शराब तस्कर पंकज का उत्पाद पुलिस के साथ गांठ था. बताया है कि उत्पाद पुलिस के अमरेंद्र नाम के व्यक्ति द्वारा पकड़ी गयी शराब को पंकज को बेचने के लिए दिया जाता था, उसके उत्पाद पुलिस के लोगों के साथ बेहतर संबंध थे और उन्हीं के साथ मिलकर वह अवैध शराब का धंधा करता था. अक्षय के बयान के बाद पुलिस के लिए पंकज की गिरफ्तारी काफी अहम है. पुलिस को उम्मीद है कि पंकज की गिरफ्तारी के बाद अभी तक की जांच में जो तथ्य सामने आये हैं उसे लेकर कई अहम खुलासे होंगे व सात दिसंबर को हमला किन परिस्थितियों में किया गया और पंकज का किसके साथ संबंध है. इसके अलावा वह किन लोगों के साथ मिलाकर शराब तस्करी का धंधा कर रहा है. पुलिस को यह जानकारी मिली है कि पंकज पेशेवर शराब तस्कर है, वह कई बार जेल भी जा चुका है. लेकिन वह जेल से छूटने के बाद एक बार फिर शराब के धंधे में सक्रिय हो जाता है और इस धंधे में वह नये-नये लड़कों को भी जोड़ने का काम कर रहा है. इसलिए कैमूर पुलिस पंकज को बेसब्री से तलाश रही है. लेकिन पंकज को भी इसका अंदाजा हो गया है और वह पुलिस की पकड़ से बचने के लिए अपने सारे मोबाइल बंद कर गांव व रिश्तेदारों का घर छोड़ अन्य जगह पर अंडरग्राउंड हो गया है. = उत्पाद अधीक्षक हटे व पूरी छापेमारी टीम सस्पेंड सात दिसंबर को उत्पाद पुलिस पर जांच के दौरान हमले के बाद उत्पाद पुलिस की कार्यशैली व भूमिका पर भी कई सवाल खड़े हुए थे. इसके बाद मद्य निषेध विभाग पटना द्वारा पूरी छापेमारी टीम की भूमिका संदिग्ध पाते हुए निलंबित कर दिया गया था. इसके साथ ही कैमूर के उत्पाद अधीक्षक को भी हटा दिया गया था. वहीं, कार्रवाई के तुरंत बाद सभी लोगों को कैमूर जिले से विरमित भी कर दिया गया था. इनके अलावा जो लोग तबादला के बाद लंबे समय से कैमूर में उत्पाद विभाग में काम कर रहे थे, उन्हें भी नये उत्पाद अधीक्षक ने प्रभार ग्रहण करने के साथ ही तबादला करते हुए अन्य जगह के लिए विरमित कर दिया गया था. = क्या कहते हैं एसडीपीओ मोहनिया एसडीपीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि पंकज की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. लेकिन वह गिरफ्तारी के डर से मोबाइल बंद कर अपने घर व रिश्तेदारी से फरार है. हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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