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आकाशीय बिजली से बचाव को लेकर बरतें सावधानी

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आकाशीय बिजली से बचाव को लेकर बरतें सावधानी

भभुआ सदर. पिछले दो-चार सालों से बारिश के समय या माॅनसून में बिजली कड़कना या गिरना अब आम बात हो चुकी है. इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी बहुत जरूरी है. यद्यपि, आपदा विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष जोर-शोर से प्रचार-प्रसार कराया जाता है. दरअसल, बारिश के दौरान लोगों द्वारा पेड़ के नीचे छिपने, बिजली और मोबाइल के टॉवर के नजदीक होने व पानी के करीब होने के कारण वे आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाते हैं. गुरुवार को कैमूर में आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाने से 12 वर्षीय किशोरी सहित चार युवकों की मौत के बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने इससे बचाव करने की अपील करते हुए कहा कि लोग बारिश के समय व आसमान में आकाशीय बिजली के कड़कने के समय घरों के अंदर ही रहें. उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि वे बारिश के दौरान घर से बाहर नहीं निकलें या बहुत ज्यादा जरूरी हो तभी सावधानी पूर्वक घर से बाहर निकलें. आकाशीय बिजली से बचाव के लिए बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है. फिलहाल लोगों को चाहिए कि जब भी बादल गरजना शुरू हो, सुरक्षित स्थानों से बाहर न निकलें और अगर कहीं फंस भी जायें, तो लोगों को चाहिए कि बड़े पेड़ों की बजाय मकानों के नीचे खड़े हों, क्योंकि आकाशीय बिजली अधिकतर ऊंचे स्थानों या लंबे-ऊंचे पेड़ों पर ही गिरती है. = पांच माह में चार महिलाओं सहित 11 लोगों की जा चुकी है जान जिले में आकाशीय बिजली से इस साल के अप्रैल से सितंबर महीने तक चार महिलाओं सहित 11 लोगों की जान जा चुकी है. अप्रैल महीने में 13 तारीख को अधौरा थाना क्षेत्र के सिकरवार गांव के रहने वाले भगवान यादव की 28 वर्षीय पत्नी सुमन देवी व बुधराम यादव की बेटी अमृता कुमारी की मौत हो गयी थी. जबकि, 28 जून को मोहनिया अनुमंडल के कुढ़नी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में वज्रपात से सरोज राय के 15 वर्षीय बेटे विवेक राय की मौत हो गयी थी. जबकि, रविवार सात जुलाई को वज्रपात की चपेट में आने से नुआंव थानाक्षेत्र के सातों एवंती गांव निवासी स्वर्गीय कपिल पाल के बेटे सुग्रीव पाल, रामगढ़ थानाक्षेत्र के सीझुआ गांव निवासी रामजस बिंद की बेटी सीता मुनि कुमारी, कुढ़नी थानाक्षेत्र के हरिहरपुर गांव निवासी रामचरित बिंद के बेटे शिवजी बिंद, बेलांव थानाक्षेत्र के पुनाव गांव निवासी 17 वर्षीय मनोज सिंह और भगवानपुर थानाक्षेत्र के जैतपुर खुर्द गांव निवासी रामनिवास बिंद की मौत हो गयी थी. इधर, गुरुवार पांच सितंबर को अधौरा थाना क्षेत्र के बभनीकलां गांव निवासी छविनाथ यादव की 12 वर्षीय बेटी सोनम कुमारी और उनके भाई स्व राम स्नेही यादव के 17 वर्षीय बेटे कमलेश कुमार के अलावा भगवनापुर थानाक्षेत्र के नदुला ओरगाव निवासी दीनानाथ राम के 15 वर्षीय बेटे प्रिंस कुमार और मुंशी राम के 16 वर्षीय बेटे निरंजन कुमार की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी. = वज्रपात से यहां रहता है सबसे अधिक खतरा – पेड़ बिजली को आकर्षित करते हैं, इसलिए बिजली चमकते समय कभी भी पेड़ के नीचे खड़ा नहीं होना चाहिए – मोटरसाइकिल, बिजली या टेलीफोन के खंभे, तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें – ऊंची इमारतों वाले क्षेत्र में आश्रय न लें, समूह में खड़े होने के बजाय अलग-अलग हो जायें – किसी मकान में आश्रय लेने से बेहतर है, सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें – मजबूत छत वाले वाहन में रहें, खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें – बाहर रहने पर धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें – तालाब और जलाशयों से दूर रहें, यदि आप पानी के भीतर हैं या किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जायें = वज्रपात से बचने के जरूरी उपाय – बिजली गिरने के दौरान मजबूत छत वाला पक्का मकान सबसे सुरक्षित है – ऊंचे घरों में तड़ित चालक जरूर लगवाएं – बिजली से चलने वाले उपकरण बंद कर दें – यदि किसी वाहन पर सवार हैं, तो तुरंत सुरक्षित जगह चले जाएं – टेलीफोन, बिजली के पोल के अलावा टेलीफोन और टीवी टावर से दूर रहें – किसी इकलौते पेड़ के नीचे नहीं जाएं – यदि जंगल में हैं, तो छोटे (कम ऊंची पेड़) और घने पेड़ों के नीचे रहें – गीले खेतों में हल चलाने या रोपनी करने वाले किसान और मजदूर सूखे स्थानों पर जाएं – नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें – बिजली कड़कने के दौरान मोबाइल और छतरी का प्रयोग न करें – घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर पर्दे का इस्तेमाल करें इनसेट वज्रपात से मौत या घायल होने पर आपदा प्रबंधन से है मुआवजे का प्रावधान भभुआ सदर. बिहार सरकार के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग से भी वज्रपात के दौरान मौत होने या घायल होने पर मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वज्रपात से किसी व्यक्ति की मौत पर उनके आश्रित को चार लाख का मुआवजा दिये जाने का प्रावधान है. जबकि, इसी प्रकार घायल होने पर प्रति व्यक्ति 4300 से अधिकतम दो लाख रुपये तक देने का प्रावधान है. कच्चा या पक्का घर के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर प्रति मकान 95,100 रुपये, झोपड़ियों की क्षति पर प्रति झोपड़ी 2100 रुपये, दुधारू गाय, भैंस की मौत पर प्रति पशु 30000 रुपये, बैल, भैंसा जैसे पशु की मौत पर प्रति पशु 25000 रुपये और भेड़ व बकरी सहित अन्य की मौत पर प्रति पशु 3000 रुपये देने का नियम निर्धारित किया गया है.

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